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हमारी डिमांड क्लियर है...हमारे एग्रीमेंट को न भूले सरकार; प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR वापस ले; SC के दखल पर क्या बोले सौरव दास

सौरभ दास ने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट का रुख हमारी मांगों के 'अतिरिक्त' है। उन्होंने कहा, "हम लंबे समय से जमीन पर सक्रिय हैं और हमारी कुछ मांगें हैं, जिन्हें पूरा करना सबसे महत्वपूर्ण है। सरकार को पहले हमारी मांगें माननी होंगी, उसके बाद ही वह अदालत के निर्देशों का अनुपालन करे।"

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'कॉकरोच जनता पार्टी' के प्रवक्ता सौरव दास

दिल्ली : 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार के सामने अपनी शर्तें स्पष्ट कर दी हैं। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने मंगलवार, 28 जुलाई को कहा कि युवा हितों के लिए सुप्रीम कोर्ट की किसी भी पहल का स्वागत है, लेकिन प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों को पूरा करना सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

नीट पेपर लीक मामले को पिछले दिन जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी के बीच मांगे पूरी करने पर बनी सहमति बनने के बाद समाप्त हो गया है, लेकिन विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन के दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफआईआर हटाने की मांग जारी है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट युवाओं के हित में काम कर रहा है तो हम ऐसे आदेशों या फैसलों का स्वागत करते हैं। दूसरी ओर, हम लंबे समय से ज़मीनी स्तर पर सक्रिय हैं और हमारी कुछ मांगें हैं जिन्हें पूरा किया जाना चाहिए। यही सबसे ज़रूरी बात है। हमारी मुख्य मांगों में से एक यह थी कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सभी FIR वापस ली जाएं और सरकार भविष्य में किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई जवाबी कार्रवाई न करे।

सौरव दास ने कहा कि हमें उम्मीद थी कि मंगलवार तक इस बारे में लिखित गारंटी जारी की जाएगी और हिरासत में लिए गए या गिरफ्तार किए गए सभी लोगों को रिहा कर दिया जाएगा। हमने कल शाम एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी जिसमें हमने घोषणा की थी कि अगर सरकार अपना वादा पूरा नहीं करती है, तो हम दिल्ली में एक बार फिर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। सुप्रीम कोर्ट जो भी कहे, वह हमारी मांगों के ‘अतिरिक्त’ होना चाहिए। हमारी मांगें पहले पूरी होनी चाहिए। उसके बाद सरकार सुप्रीम कोर्ट की बात माने या जो भी राहत वह दे, उसे लागू करे।

CJP की प्रमुख शर्तें और अल्टीमेटम

पार्टी ने सरकार से बिना किसी शर्त या घालमेल के लिखित आश्वासन की मांग की है। सौरभ दास के अनुसार, इन मांगों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर (FIR) को वापस लेना, भविष्य में किसी भी तरह की प्रतिशोधात्मक कार्रवाई न करने की लिखित गारंटी और वर्तमान में हिरासत में लिए गए या गिरफ्तार सभी प्रदर्शनकारियों की तत्काल रिहाई शामिल है। दास ने चेतावनी दी कि यदि सरकार इन वादों को पूरा करने में विफल रहती है, तो पार्टी दिल्ली में एक नए सिरे से बड़े आंदोलन का आह्वान करने को मजबूर होगी।

सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख और निर्देश

दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और गहन जांच सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने के संकेत दिए हैं। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि चाहे कोई भी हो, जिसने कानून अपने हाथ में लिया है, उसे सजा मिलनी चाहिए।

अदालत ने हिंसा के दौरान 250 पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों का संज्ञान लेते हुए कहा कि यह जांचना जरूरी है कि ये हमले वास्तव में छात्रों द्वारा किए गए थे या कुछ उपद्रवियों (miscreants) द्वारा। इसके साथ ही, कोर्ट ने 18 वर्ष से कम उम्र के उन छात्र प्रदर्शनकारियों को रिहा करने का निर्देश दिया है जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। साथ ही, सभी संबंधित इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का आदेश भी जारी किया गया है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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