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Loktak Lake Floating Village: भारत की वह अनोखी झील, जहां तैरते द्वीपों पर बसे हैं घर और पानी से चलती है जिंदगी

ट्रैवल फिल्ममेकर कनिष्क गुप्ता के वीडियो में देखें मणिपुर की लोकटक झील का तैरता गांव। जानें फुमदी, फुमशांग, मछुआरों की जिंदगी और केइबुल लामजाओ नेशनल पार्क की खासियत।

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भारत का पानी पर तैरता गांव, कनिष्क गुप्ता ने दिखाई लोगों की लाइफ

Loktak Lake Manipur: मणिपुर की लोकटक झील केवल खूबसूरत पर्यटन स्थल नहीं है। यह मछुआरों का घर, उनकी रोजी-रोटी और सदियों से चली आ रही जीवनशैली का आधार भी है। ट्रैवल फिल्ममेकर कनिष्क गुप्ता के वीडियो में झील पर बसे गांव की जिंदगी बेहद करीब से दिखाई देती है। यहां जमीन स्थिर नहीं है, घर पानी के बीच हैं और कहीं आने-जाने के लिए नाव रोजमर्रा की जरूरत है।

दिल्ली या किसी बड़े शहर में रहने वाले व्यक्ति के लिए सुबह की शुरुआत सड़क पर दौड़ती गाड़ियों से होती है। लेकिन लोकटक झील के बीच रहने वाले परिवारों की जिंदगी कुछ अलग ही है। उनकी सुबह नाव की हल्की आवाज, पानी पर पड़ती धूप और मछली पकड़ने की तैयारियों के साथ होती है।

यहां खिड़की के बाहर कोई गली नहीं दिखती। चारों ओर पानी नजर आता है। एक घर से दूसरे घर तक जाना हो तो नाव चाहिए। ऐसे में बच्चे हों या बड़े, सभी का जीवन झील की लय के साथ आगे बढ़ता है।

कहां है लोकटक झील

लोकटक झील मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में स्थित है। यह राजधानी इंफाल से करीब 48 किलोमीटर दूर है। इसे पूर्वोत्तर भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील माना जाता है।

दूर से देखने पर यह किसी छोटे समुद्र की तरह दिखाई देती है। झील के बीच हरे रंग के गोल और अलग-अलग आकार के टुकड़े तैरते नजर आते हैं। पहली नजर में ये छोटे द्वीप लगते हैं, लेकिन वास्तव में इन्हें फुमदी कहा जाता है।

लोकटक झील की फुमदी क्या होती है

फुमदी मिट्टी, जलीय वनस्पतियों, जड़ों और दूसरे जैविक पदार्थों से बनी प्राकृतिक परत होती है। ये परतें पानी की सतह पर तैरती रहती हैं। कुछ फुमदी इतनी मजबूत और बड़ी होती हैं कि उन पर झोपड़ीनुमा घर बनाए जा सकते हैं।

इन तैरते घरों को स्थानीय रूप से फुमशांग कहा जाता है। इन्हीं घरों में मछुआरा परिवार रहते हैं। घर के बाहर खड़ी नाव यहां स्कूटर या साइकिल जैसी जरूरी सवारी है। बाजार जाना हो, मछली पकड़नी हो या पड़ोसी से मिलना हो- नाव के बिना बात नहीं बनती।

कनिष्क गुप्ता की मानें तो पर्यटकों को यहां का जो दृश्य रोमांचक लगता है, स्थानीय परिवारों के लिए वही सामान्य जीवन है।

मछली पकड़ने से चलती है अर्थव्यवस्था

लोकटक झील के कई परिवारों की आजीविका मछली पकड़ने पर निर्भर है। दिन की शुरुआत अक्सर जाल देखने से होती है। झील से मिली मछलियों को स्थानीय बाजार तक पहुंचाया जाता है। मौसम, जलस्तर और मछलियों की उपलब्धता का सीधा असर परिवार की कमाई पर पड़ता है। पानी यहां केवल घर को चारों ओर से घेरता नहीं, बल्कि रसोई का चूल्हा जलाने में भी मदद करता है।

गोल आकार में क्यों दिखाई देती हैं फुमदी

लोकटक झील की हवाई तस्वीरों में कई गोल घेरे दिखाई देते हैं। ये प्राकृतिक फुमदी को व्यवस्थित करके बनाए गए मछली पकड़ने के क्षेत्र हो सकते हैं। पानी के भीतर मौजूद इन घेरों का इस्तेमाल मछलियों को एक सीमित हिस्से में आकर्षित करने के लिए किया जाता है।

यही गोल आकृतियां लोकटक को दूसरी झीलों से बिल्कुल अलग रूप देती हैं। ऊंचाई से झील किसी प्राकृतिक पेंटिंग जैसी दिखाई देती है- नीले पानी पर तैरते हरे घेरे, उनके बीच छोटी नावें और दूर तक फैली पहाड़ियां।

दुनिया का अनोखा तैरता नेशनल पार्क

लोकटक झील में स्थित केइबुल लामजाओ नेशनल पार्क को दुनिया का एकमात्र तैरता राष्ट्रीय उद्यान माना जाता है। यह पार्क भी फुमदी के विशाल हिस्से पर बना है। यहां मणिपुर का राज्य पशु संगाई हिरण पाया जाता है, जिसे उसकी खास चाल के कारण डांसिंग डियर भी कहा जाता है।

सर्दियों के दौरान यहां कई तरह के स्थानीय और प्रवासी पक्षी भी देखे जा सकते हैं। मणिपुर पर्यटन के अनुसार पक्षियों को देखने के लिए नवंबर से मार्च का समय विशेष माना जाता है।

लोकटक झील घूमने पर क्या-क्या देखें

लोकटक की यात्रा केवल बोटिंग तक सीमित नहीं रखनी चाहिए। यहां कुछ खास अनुभव यात्रा को यादगार बना सकते हैं।

  • स्थानीय नाव में बैठकर फुमदी और तैरते घर देखें।
  • ऊंचाई से झील का विस्तृत नजारा देखने के लिए सेंद्रा जाएं।
  • केइबुल लामजाओ नेशनल पार्क की यात्रा करें।
  • समय मिलने पर मोइरांग स्थित INA मेमोरियल भी देखें।
  • स्थानीय समुदाय से बातचीत करें, लेकिन उनकी निजता का सम्मान रखें।
  • झील में प्लास्टिक या खाने का कचरा बिल्कुल न छोड़ें।

लोकटक केवल पर्यटन स्थल नहीं, एक जीवित संसार है

लोकटक झील की सुंदरता कैमरे को तुरंत आकर्षित करती है। मगर इसकी असली कहानी पानी पर तैरते उन घरों के भीतर मिलती है, जहां लोग प्रकृति से लड़कर नहीं बल्कि उसके साथ तालमेल बनाकर रहते हैं। लोकटक में घर भले ही तैरते दिखाई दें, लेकिन यहां के लोगों का अपनी झील से रिश्ता बेहद गहरा और मजबूत है।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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