jorhat majuli 2026: लगातार फोन के नोटिफिकेशन, शहर की भागदौड़ और थका देने वाला माहौल ने मुझे दिल्ली में पूरी तरह से बर्नआउट कर दिया था। सोचा घूमने का प्लान करता हूं ऐसे में माजुली (असम) जाने का फैसला किया। मैंने सोचा मैं घूमने जा रहा हूं, लेकिन माजुली ने मुझे खुद से मिलवा दिया। आगे की यात्रा के बारे में और बताऊं इससे पहले जान लें कि माजुली भारत का हॉटेस्ट ट्रैवल डेस्टिनेशन है जहां घूमना लोग काफी पसंद कर रहे हैं।
इसी वजह से मैंने सोचा, चलो, इस बार कुछ अलग ट्राई करते हैं और बस बैग पैक किया, फ्लाइट बुक की और निकल पड़ा माजुली की ओर। 5 दिन बाद जब वापस लौटा, तो मैं वो शख्स नहीं रहा जो गया था। माजुली ने मुझे खुद से मिलवा दिया। अगर तुम भी रोमांच की चाह में यात्रा करने का प्लान कर रहे हो, तो ये स्टोरी तुम्हारे लिए ही है।
दिल्ली से माजुली तक का मेरा सफर
दिल्ली से जोरहाट के लिए डायरेक्ट फ्लाइट लेना काफी आसान है। इंडिगो या एयर इंडिया की फ्लाइट्स मिल जाती हैं और सफर करीब 2.5 से 3 घंटे का होता है। मैंने सुबह की फ्लाइट ली थी, जिससे समय भी बच गया और दिनभर घूमने का मौका भी मिल गया। जोरहाट एयरपोर्ट पहुंचने के बाद मैं टैक्सी लेकर निमाटी घाट गया, जो लगभग 15-16 किलोमीटर दूर है। वहां तक जाने में करीब ₹300-400 का खर्च आता है।
इसके बाद शुरू हुआ इस ट्रिप का सबसे यादगार हिस्सा-फेरी राइड।
निमाटी घाट से कलंबारी घाट (माजुली) तक फेरी से जाना होता है, जिसमें करीब 1 से 1.5 घंटे लगते हैं। ब्रह्मपुत्र नदी के बीचों-बीच जब फेरी चलती है और सूरज ढलने लगता है, तो नजारा सच में दिल छू लेने वाला होता है। ऐसा लगता है जैसे समय थम गया हो। फेरी का टिकट भी बहुत सस्ता है, सिर्फ ₹15-30 के बीच। अगर आप अपनी बाइक या स्कूटर साथ ले जा रहे हैं, तो उसका अलग से थोड़ा चार्ज लगता है।
मैंने यह ट्रिप मार्च के शुरुआती दिनों में की थी उस समय का मौसम एकदम परफेक्ट था ना ज्यादा ठंड, ना ज्यादा गर्मी। तापमान करीब 15 से 25 डिग्री के बीच रहता है, जिससे घूमना और भी मजेदार हो जाता है। जैसे ही मैं माजुली पहुंचा, सच बताऊं तो ऐसा लगा जैसे किसी अलग ही दुनिया में आ गया हूं। यहां ना बड़े-बड़े होटल हैं, ना ट्रैफिक का शोर। चारों तरफ सिर्फ हरी-भरी हरियाली, बांस के घर और एक अलग ही सुकून महसूस होता है।

मजुली द्वीप ब्रह्मपुत्र नदी पर स्थित एक प्राकृतिक चमत्कार (फोटो: ट्रैवल थ्राइव हब)
माजुली में कहां ठहरें?
मैंने ईको होमस्टे चुना ट्राइबल फैमिली के साथ बैंबू हाउस में। बजट ₹800-1500 पर नाइट रहा जिसमें खाना भी शामिल था। अगर आप मिड रेंज में स्टे का ऑपशन तलाश रहे हैं तो जान लें कि बैंबू कॉटेज या ईको रिजॉर्ट के लिए ₹2000 से 4000 तक का खर्चा हो सकता है। जैसे- एयरबेन रिजॉर्ट या माजुली रिजॉर्ट का चुनाव आप कर सकते हैं।
लक्जरी फील के लिए आप रिवर व्यू के पास स्टे भी चुन सकते हैं। हालांकि, होमस्टे में लोकल मिशिंग फैमिली के साथ रहना बेस्ट था। उन्होंने अपोंग (राइस बीयर) बनाकर पिलाया, हैंडलूम वीविंग सिखाई और स्टोरीज सुनाईं। वाई-फाई नहीं था, लेकिन मैंने शिकायत नहीं की क्योंकि वहां का माहौल ऐसा था कि फोन की जरूरत ही नहीं पड़ी।
माजुली में क्या करें? टॉप एक्सपीरियंस (4-5 दिन की यात्रा का प्लान)
दिन 1: आगमन + ब्रह्मपुत्र पर सनसेट
फेरी से उतरकर होमस्टे में चेक-इन करो। शाम को नदी किनारे घूमो। बर्ड्स, फिशिंग बोट्स और ऑरेंज स्काई-फोटोग्राफी के लिए हेवन जैसा लगता है।
दिन 2: सत्रा घूमने का असली मजा
माजुली में 20 से ज्यादा सत्रा (वैष्णव मठ) हैं, जो 15वीं सदी से श्रीमंत शंकरदेव की शिक्षाओं को आगे बढ़ा रहे हैं। यहां जाना सिर्फ घूमना नहीं, एक अलग ही सुकून और आध्यात्मिक अनुभव देता है। सबसे पहले जाओ औनियाती सत्रा, ये सबसे बड़ा है और यहां एक छोटा सा संग्रहालय भी है, जहां पुरानी चीजें देखने को मिलती हैं।
फिर पहुंचो दक्षिणपात सत्रा, इसकी बनावट बहुत खूबसूरत है। अगर मौका मिले तो शाम की आरती जरूर अटेंड करना, माहौल बहुत शांत और सुकून भरा होता है। अब बारी आती है सबसे यूनिक जगह की-सामगुड़ी (चामागुड़ी) सत्रा। यहां मास्क बनाने का काम होता है। कलाकार बांस, मिट्टी और कपड़े से बड़े-बड़े मास्क बनाते हैं, जो रास लीला में इस्तेमाल होते हैं। मैंने खुद भी ट्राय किया था, एक छोटा मास्क बनाने में करीब 2 घंटे लग गए। आप यहां से मास्क खरीद भी सकते हो, कीमत ₹500 से ₹5000 तक रहती है।
यहां के साधु लोग ट्रेडिशनल सत्रिया डांस भी करते हैं। और अगर आप शाम की प्रार्थना में बैठ गए, तो सच में लगेगा जैसे दुनिया की सारी टेंशन गायब हो गई-ना कोई शोर, बस भक्ति गीत और शांति।

माजुली के पवित्र मुखौटे (फोटो: गारलैंड पत्रिका)
दिन 3: मिशिंग गांव और लोकल लाइफ का मजा
मिशिंग लोग माजुली के असली रहने वाले हैं। इनके गांव में जाओ और उनके स्टिल्ट (ऊंचे) घर देखो। यहां आपको असली गांव वाली लाइफ देखने को मिलेगी। वहां जाकर हैंडलूम पर कपड़े बनते देखो और उनका पारंपरिक खाना जरूर ट्राय करो।
खाने में क्या ट्राय करें:
अपोंग (चावल से बनी हल्की ड्रिंक)
पीठा (चावल से बना मीठा/नमकीन)
बांस के साथ बनी मछली करी
ताजी नदी की मछली और लोकल सब्जियां
(अगर आप वेज खाते हो तो वो भी आसानी से मिल जाएगा)
फिर एक साइकिल किराए पर ले लो (₹100-200 रोज का) और आराम-आराम से पूरे आइलैंड में घूमो। हर तरफ हरियाली, पक्षियों की आवाज और छोटे-छोटे मिट्टी के गांव-पूरा माहौल बहुत शांत और फ्रेश लगता है।

औनियाती सत्र माजुली द्वीप (फोटो: वर्ल्डप्रेस)
दिन 4: हिडन जेम्स + स्लो ट्रैवल
पॉटरी विलेज: यहां महिलाएं हाथ से मिट्टी के बर्तन बनाती हैं। बर्डवॉचिंग: खासकर सर्दियों में माइग्रेटरी बर्ड्स आते हैं। छोटे-छोटे चैनल्स में बोट राइड। अगर किस्मत अच्छी हो तो लोकल फेस्टिवल भी देख सकते हैं।
दिन 5: जोरहाट साइड ट्रिप
वापसी से पहले जोरहाट में टी गार्डन विजिट किया। टोकलाइ टी रिसर्च इंस्टीट्यूट या किसी एस्टेट का टूर ले सकते हैं। असम टी का स्वाद अलग ही होता है।
बजट ब्रेकडाउन (सोलो ट्रैवलर, 5 दिन)
फ्लाइट्स (दिल्ली-जोरहाट रिटर्न): ₹6000-9000
लोकल ट्रांसपोर्ट + फेरी: ₹1000
स्टे (होमस्टे): ₹4000-6000
फूड: ₹1500-2000 (बहुत सस्ता और स्वादिष्ट)
एक्टिविटीज + सॉवेनियर्स: ₹2000
कुल खर्च: ₹15,000-22,000 (लक्जरी में थोड़ा ज्यादा हो सकता है)
क्यों माजुली ने मुझे बदल दिया? (पर्सनल टेकअवे)
पहले दिन मैं थोड़ा बेचैन था क्या करूं, वाई-फाई कहां है? तीसरे दिन जब मैं साइकिल पर घूम रहा था, तो अचानक रुक गया। कोई जल्दी नहीं, कोई डेडलाइन नहीं। बस नदी का बहना, हवा में धान के खेतों की खुशबू और दूर सत्रा से आती भक्ति संगीत की आवाज।
तभी मुझे एहसास हुआ असली लग्जरी यही है कि आप अपनी जिंदगी की रफ्तार धीमी कर पाओ। माजुली आपको सिखाता है कि खुशियां छोटी-छोटी चीजों में होती हैं लोकल खाना, दिल से होने वाली बातें और प्रकृति के साथ तालमेल।
अगर आप भी थकान या बर्नआउट महसूस कर रहे हैं, या 2026 में कुछ अलग ट्रिप प्लान कर रहे हैं, तो जोरहाट-माजुली जरूर जाओ। ये सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि एक पूरा अनुभव है।

असम में स्थित माजुली की जादुई दुनिया (फोटो: travelandleisureasia)
प्रैक्टिकल टिप्स (आसान भाषा में समझो)
बेस्ट टाइम: अक्टूबर से अप्रैल सबसे अच्छा रहता है। अभी मार्च में मौसम एकदम परफेक्ट है। ना ज्यादा गर्मी, ना ज्यादा ठंड।
कैसे पहुंचें: पहले जोरहाट तक फ्लाइट लो, फिर निमाटी घाट जाओ और वहां से फेरी पकड़कर माजुली पहुंच जाओ।
कहां रुकें: होमस्टे में रहो, तभी असली माजुली का अनुभव मिलेगा और लोकल लाइफ करीब से समझ पाओगे।
क्या पैक करें: मच्छर भगाने की क्रीम जरूर रखो, आरामदायक जूते पहनना, पावर बैंक साथ रखना और हल्के कपड़े रखो। शाम के लिए एक हल्की जैकेट भी काम आ जाएगी क्योंकि मौसम थोड़ा ठंडा हो जाता है।
अगर आप कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखेंगे, तो आपकी माजुली ट्रिप और भी मजेदार बन जाएगी। परिवार के साथ या फिर सोलो ट्रिप पर जाने का आप प्लान कर सकते हैं। इस ट्रिप के दौरान आपको खुदको जानने का तो मौका मिलेगा ही साथ ही आप कुछ नया और यूनीक करके वापस लौटेंगे।
