यात्रा

न दोस्त, न रिश्तेदार, फिर भी अजनबियों के साथ ट्रिप पर क्यों जा रहे युवा?

Gen Z Travel Trends: आजकल घूमने का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब खासकर युवाओं में एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। इसे अजनबियों के साथ यात्रा करना कह सकते हैं।

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अजनबियों के साथ ट्रिप पर जा रहे हैं युवा

Gen Z Travel Trends: घूमने का ट्रेंड तेजी से बदल रहा है। सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है कि कोई अनजान लोगों के साथ आखिर घूमने क्यों जाएगा? लेकिन युवाओं में ये ट्रेंड तेजी से पॉपुलर हो रहा है जिसमें लोग अजनबी लोगों के साथ यात्रा करना पसंद कर रहे हैं। इसके पीछे कई दिलचस्प वजहें हैं। किसी को नए लोगों से मिलना पसंद है, कोई अकेलेपन से बाहर निकलना चाहता है तो किसी को बिना किसी रोक-टोक के नई जगहें देखने का मौका चाहिए। कई युवाओं के लिए यह खुद को समझने और नए अनुभव लेने का भी एक तरीका बन गया है।

अकेलापन है एक बड़ी वजह

आज की डिजिटल दुनिया में लोगों से जुड़े रहना पहले से आसान हो गया है। फोन पर लगातार बातचीत होती रहती है, सोशल मीडिया पर सैकड़ों दोस्त और फॉलोअर्स भी होते हैं, लेकिन इसके बावजूद कई युवा खुद को अकेला महसूस करते हैं। ऐसे में किसी अनजान समूह के साथ यात्रा करना उन्हें नए लोगों से खुलकर मिलने का मौका देता है। यहां पहले से बनी दोस्ती या किसी पुराने रिश्ते की उम्मीद नहीं होती। सफर के दौरान लोग धीरे-धीरे एक-दूसरे को समझते हैं और कई बार छोटी-सी मुलाकात अच्छी दोस्ती में बदल जाती है।

दोस्तों के साथ ट्रिप हमेशा आसान नहीं होती

दोस्तों के साथ घूमना बेशक मजेदार होता है, लेकिन हर बार ट्रिप वैसी नहीं होती जैसी सोची गई थी। किसी को महंगा होटल चाहिए तो कोई बजट में रहना चाहता है। किसी को सुबह जल्दी उठकर घूमना पसंद है, तो कोई देर तक सोना चाहता है। खाने, घूमने और खर्च को लेकर भी अलग-अलग राय हो सकती है। इन छोटी-छोटी बातों की वजह से कई बार दोस्तों की ट्रिप में तनाव पैदा हो जाता है। अजनबियों के साथ यात्रा में भी तालमेल बैठाना पड़ता है, लेकिन वहां लोग एक-दूसरे से किसी पुरानी उम्मीद के साथ नहीं जुड़े होते। इसलिए कई युवा इसे ज्यादा खुला और सहज अनुभव मानते हैं।

अकेले घूमने की आजादी भी, साथ भी

अकेले यात्रा करने का अपना अलग मजा है। कब निकलना है, कहां जाना है और कितना खर्च करना है, इसका फैसला खुद किया जा सकता है। लेकिन कई बार अकेले सफर करते हुए मन करता है कि कोई साथ हो, जिससे रास्ते की बातें और अनुभव साझा किए जा सकें। अजनबियों के साथ यात्रा इसी कमी को पूरा करती है। युवा अपनी आजादी भी बनाए रखते हैं और सफर के दौरान दूसरे लोगों के साथ समय भी बिता पाते हैं। यही वजह है कि यह तरीका उन लोगों को खास तौर पर पसंद आ रहा है जो अकेले घूमना तो चाहते हैं, लेकिन पूरी यात्रा अकेले नहीं बिताना चाहते।

सोशल मीडिया ने बदल दी सोच

सोशल मीडिया ने भी इस ट्रेंड को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है। इंटरनेट पर आज ऐसे ढेरों वीडियो और पोस्ट देखने को मिल जाते हैं, जिनमें लोग अनजान लोगों के साथ ट्रिप, ट्रेक या एडवेंचर करते नजर आते हैं। जब युवा दूसरों को ऐसे सफर का मजा लेते देखते हैं तो उनके मन में भी इसे आजमाने की इच्छा पैदा होती है। ऑनलाइन बने यात्रा समूहों और समुदायों की वजह से अब समान पसंद वाले लोगों से जुड़ना भी आसान हो गया है। यानी फोन की स्क्रीन से शुरू हुई बातचीत कई बार असली दुनिया की यात्रा तक पहुंच जाती है।

क्या यह तरीका हर किसी के लिए सही है?

अजनबियों के साथ यात्रा रोमांचक हो सकती है, लेकिन इसके लिए थोड़ी सावधानी भी जरूरी है। किसी अनजान समूह के साथ जाने से पहले उसके बारे में अच्छी तरह जानकारी लेना, यात्रा की पूरी योजना समझना और रहने-खाने से जुड़ी जरूरी बातें पहले तय कर लेना बेहतर होता है। पहली बार ऐसा सफर कर रहे हैं तो भरोसेमंद लोगों को अपनी यात्रा की जानकारी देना भी समझदारी है।

prabhat sharma
प्रभात शर्माauthor

प्रभात शर्मा टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के फीचर डेस्क में कार्यरत ट्रैवल और लाइफस्टाइल राइटर हैं। यात्राओं के प्रति उनका गहरा जुनून और नई जगहों को समझने–परखने की क्षमता उनकी लेखन शैली को बेहद जीवंत और पाठकों से जोड़ने वाली बनाती है। वे ऑफबीट डेस्टिनेशन, लोकल कल्चर, हेरिटेज साइट्स, रोड ट्रिप्स, फूड जर्नी और बजट ट्रैवल जैसे विषयों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। प्रभात की स्टोरीज़ सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि यात्रा के माहौल, भाव और अनुभव को भी महसूस कराती हैं। अब तक 7,000 से अधिक कंटेंट लिख चुके प्रभात अपनी सहज भाषा, प्रामाणिक जानकारी और अनुभव-आधारित दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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