उत्तर प्रदेश में कुल 17 नगर निगम, 198 नगर पालिका और 493 नगर पंचायत हैं। इन सीटों के लिए मई महीने में चुनाव हो सकता है। दरअसल, चुनाव में पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने के लिए राज्य सरकार की ओर से गठित आयोग ने बीते दिनों अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी। आयोग ने प्रत्येक जिले में जाकर सर्वे का काम किया और पिछड़े वर्ग की नुमाइंदगी को लेकर अपनी सर्वे रिपोर्ट तैयार की। आयोग ने अपने सर्वे में ओबीसी आरक्षण को लेकर कई खामियां पाईं और इन्हें दूर करने के लिए उसने सिफारिशें की हैं। आयोग की इस रिपोर्ट पर यूपी कैबिनेट ने अपनी मुहर लगा दी। योगी सरकार इस रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट को सौंप चुकी है। शीर्ष अदालत इस रिपोर्ट पर 24 मार्च को सुनवाई करेगी। कोर्ट यदि इस रिपोर्ट को स्वीकार कर लेता है तो उत्तर प्रदेश में शहरी निकाय चुनाव का रास्ता साफ हो जाएगा।
दरअसल, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण के बिना तत्काल चुनाव कराने का आदेश दिया था। योगी सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई। योगी सरकार की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी और राज्य में ओबीसी आरक्षण पर सर्वे कराने का आदेश दिया। राज्य सरकार की ओर से गठित ओबीसी आयोग ने अपना सर्वे तय समय से पहले कर रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। नगर निकाय चुनाव में इस बार मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच होगा।