डिजिटल पेमेंट और यूपीआई के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद मोबाइल रिचार्ज का बिजनेस आज भी छोटे दुकानदारों के लिए कमाई का एक अहम जरिया बना हुआ है। शहरों से लेकर गांवों तक बड़ी संख्या में लोग अब भी दुकानों पर जाकर रिचार्ज करवाना पसंद करते हैं।
खासतौर पर वे ग्राहक जो कैश पेमेंट करते हैं या जिन्हें ऑनलाइन ऐप्स का ज्यादा इस्तेमाल नहीं आता, वे मोबाइल शॉप और किराना स्टोर पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर दुकानदार किस प्लेटफॉर्म से रिचार्ज करते हैं और उन्हें इसमें कितनी कमाई होती है।
रिचार्ज के लिए किन ऐप्स का इस्तेमाल होता है?
मोबाइल रिचार्ज करने के लिए दुकानदार आमतौर पर बिजनेस और B2B प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करते हैं। इनमें Paytm for Business, PhonePe Merchant और Google Pay Merchant जैसे एप्स शामिल हैं।
इसके अलावा कई दुकानदार खास Multi Recharge Apps का भी इस्तेमाल करते हैं। इनमें eजी पे (eZeePay), बिजनेक्स्ट (Biznext), A1Topup, मल्टीपे (Multipay), पेन (Payben), जोलो (Jolo), CyberPlat और Payworld जैसे प्लेटफॉर्म लोकप्रिय हैं।
इन ऐप्स की मदद से एक ही डैशबोर्ड पर अलग-अलग टेलीकॉम कंपनियों जैसे Jio, Airtel और Vi के रिचार्ज किए जा सकते हैं। कुछ दुकानदार सीधे टेलीकॉम कंपनियों के रिटेलर पोर्टल का भी इस्तेमाल करते हैं, जो उन्हें डिस्ट्रीब्यूटर के जरिए उपलब्ध कराया जाता है।
कैसे काम करता है पूरा सिस्टम?
रिचार्ज बिजनेस में दुकानदार पहले अपने बिजनेस अकाउंट या रिटेलर वॉलेट में पैसे जोड़ते हैं। इसके बाद ग्राहक के नंबर पर उसी बैलेंस से रिचार्ज किया जाता है। हर सफल ट्रांजैक्शन पर दुकानदार को एक तय कमीशन मिलता है। यही कमीशन उनकी कमाई का मुख्य स्रोत होता है, हालांकि मोबाइल रिचार्ज में मार्जिन ज्यादा नहीं होता, लेकिन ज्यादा संख्या में ट्रांजैक्शन होने पर यह अच्छी आय में बदल जाता है।
कितना मिलता है कमीशन?
मोबाइल रिचार्ज पर मिलने वाला कमीशन तय नहीं होता। यह पूरी तरह टेलीकॉम कंपनी और रिचार्ज पार्टनर पर निर्भर करता है। आमतौर पर दुकानदारों को 1% से 3% तक का कमीशन मिलता है। उदाहरण के तौर पर अगर कोई दुकानदार ₹500 का रिचार्ज करता है, तो उसे करीब ₹5 से ₹15 तक की कमाई हो सकती है। पहली नजर में यह रकम कम लग सकती है, लेकिन दिनभर में बड़ी संख्या में रिचार्ज होने पर कुल कमाई ठीक-ठाक हो जाती है।
किन बातों से बदलता है कमीशन?
दुकानदारों की कमाई कई चीजों पर निर्भर करती है। इसमें सबसे बड़ा फैक्टर रिचार्ज का वॉल्यूम होता है। जो दुकानदार ज्यादा रिचार्ज करते हैं, उन्हें कई बार अतिरिक्त बोनस या ज्यादा प्रतिशत कमीशन भी मिलता है।
कुछ कंपनियां टार्गेट आधारित इंसेंटिव भी देती हैं यानी तय सीमा से ज्यादा रिचार्ज करने पर दुकानदारों को अलग से फायदा मिलता है, हालांकि कई प्लेटफॉर्म मेंटेनेंस चार्ज या प्लेटफॉर्म फीस भी काटते हैं, जिससे वास्तविक कमाई थोड़ी कम हो सकती है।
