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41 मजदूरों के लिए ये टेक्नोलॉजी बनी भगवान, 17 दिनों में हुआ चमत्कार

Uttarakhand Tunnel Rescue Operation Technology: सुरंग में फंसे 41 मजदूरों के बचाव कार्य में नई के साथ पुरानी टेक्नोलॉजी की भी मदद ली गई है। एंडोस्कोपिक फ्लेक्सी कैमरा से लेकर मेडिकल डिवाइस तक ने इस सबसे बड़े बचाव अभियान में से एक को सफल बनाया है। चलिए जानते हैं इन टेक्नोलॉजी के बारे में...

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Uttarakhand Tunnel Rescue Operation Technology

Photo : Twitter

Uttarakhand Tunnel Rescue Operation Technology: पिछले 17 दिनों से उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग के अंदर फंसे 41 मजदूरों को बचाने का अभियान अखिरकार सफल हो गया है। इन 17 दिनों में मजदूरों को बचाने के लिए बचाव दल ने दिन-रात काम किया और कई उपाए किए गए। मजदूरों को सुरंग से निकालने के लिए 86 मीटर गहराई तक सीधी ड्रिलिंग की गई है, जिसमें बरमा मशीन का इस्तेमाल भी किया गया। बचाव कार्य में नई के साथ पुरानी टेक्नोलॉजी की भी मदद ली गई है। एंडोस्कोपिक फ्लेक्सी कैमरा से लेकर मेडिकल डिवाइस तक ने इस सबसे बड़े बचाव अभियान में से एक को सफल बनाया है। चलिए जानते हैं इन टेक्नोलॉजी के बारे में जो मजदूरों के लिए भगवान बन गईं।

एंडोस्कोपिक फ्लेक्सी कैमरा

उत्तरकाशी की सिल्क्यारा सुरंग में फंसे मजदूरों के पहली सफलता इसी डिवाइस की मदद से मिली थी। दस दिनों के बचाव प्रयासों के बाद एक एंडोस्कोपिक फ्लेक्सी कैमरा को मजदूरों के पास पहुंचाने में मदद मिली थी। फ्लेक्सी कैमरे को छह इंच छोटे पाइप के जरिए मजदूरों तक पहुंचाया गया था। एंडोस्कोपिक फ्लेक्सी कैमरा एक आधुनिक एंडोस्कोपिक कैमरा होता है, जो 'चिप-ऑन-टिप' टेक्नोलॉजी पर आधारित होता है। एंडोस्कोपिक कैमरा इसलिए भी खास है क्योंकि यह छोटी से छोटी जगह में भी काम लाया जा सकता है। छोटा होने के अलावा यह एलईडी की मदद से कम लाइट्स में भी हाई क्वालिटी फोटो कैप्चर कर सकता है।

मेडिकल डिवाइस का भी हुआ इस्तेमाल

सुरंग में फंसे मजदूरों के रेस्क्यू के लिए कई मेडिकल डिवाइस का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिनमें एंडोस्कोपिक कैमरा भी शामिल है।

मेरिकन ऑगर्स ड्रिलिंग मशीन

एंडोस्कोपिक फ्लेक्सी कैमरा के अलावा मजदूरों को बचाने के लिए अमेरिकन ऑगर्स ड्रिलिंग मशीन का भी इस्तेमाल किया गया था, जो दुर्घटनास्थल पर ही असेंबल की गई थी। यह मशीन 10 घंटे में 50 मीटर गहराई तक खुदाई कर सकती है।

रोबोटिक असिस्टेंट

बचाव कार्यों को बढ़ाने के लिए DRDO के रोबोट्स को भी तैनात किया गया था। रोबोटिक सिस्टम में तीन चीजें प्रमुख थीं। इसमें गैस का पता लगाने का सिस्टम, इंटरनेट सर्विस देना का काम और अपने स्थान से 100 मीटर की दूरी से फंसे हुए मजदूरों के स्वास्थ्य की निगरानी करने जैसा काम शामिल था। इन रोबोट्स को कैमरा और सेंसर से लैस किया गया था। इन रोबोट्स ने ही ड्रिलिंग की सटीक लोकेशन बताने में मदद की थी।

हाईटेक ड्रोन

एक बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप स्क्वाड्रन इंफ्रा एंड माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड ने बचाव कार्य के लिए अपने दो हाईटेक ड्रोन को तैनात किया था। यह कंपनी खनिज अन्वेषण, खनन, सुरंग बनाने और बुनियादी ढांचे के लिए हवाई खुफिया जानकारी में माहिर है। सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को सुरक्षित निकालने की संभावनाओं का आकलन करने के लिए सुरंगों के भीतर ड्रोन का उपयोग किया गया था।

अंडरवाटर कम्युनिकेशन

सुरंग में फंसे मजदूरों से बात करने के लिए अंडरवाटर कम्युनिकेशन सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। यह संभवतः पहली बार था जब किसी सुरंग में इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया हो। अंडरवाटर कम्युनिकेशन में एक हाइड्रोफोन करीब 150 मीटर लंबे वायर से जुड़ा होता है। इस हाइड्रोफोन की मदद से बिना रुकावट के बात की जा सकती है। सुरंग के अंदर वॉकी-टॉकी के कमजोर सिग्नल और नेटवर्क की समस्या के कारण अंडरवाटर कम्युनिकेशन का इस्तेमाल किया गया है।

Vishal Maithil
Vishal Mathelauthor

विशाल मैथिल टाइम्स नाऊ नवभारत में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर 2023 से जुड़े हुए हैं। पत्रकारिता में 6+ वर्षों के अनुभव के साथ वह टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया, गैजेट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों पर गहरी समझ रखते हैं। वे ऑटोमोबाइल, बिजनेस, यूटिलिटी और हाइपरलोकल से लेकर एजुकेशन और इंटरनेशनल बीट्स पर भी काम कर चुके हैं। भोपाल से ताल्लुक रखने वाले विशाल ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से मीडिया रिसर्च में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। रिसर्च के क्षेत्र में उनके कई पेपर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने दैनिक भास्कर, अमर उजाला, मासिक पत्रिका "संदेश" और सोशल मीडिया फर्म में भी काम किया है। टेक-यूटिलिटी और बिजनेस से जुड़ी खबरों को आसान और काम की भाषा में समझाना विशाल को खूब आता है। वो कोशिश करते हैं कि कम शब्दों में ज्यादा और साफ-सुथरी जानकारी मिल जाए। किताबें पढ़ना और संगीत सुनना उनका पसंदीदा काम है। आप इनसे Vishal.mathel@timesgroup.com पर संपर्क कर सकते हैं।

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