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पूरी तरह AI से चलने वाला दुनिया का पहला कैफे, Gemini करता है सारे काम

AI अब तमाम तरह के काम करने लगा है। एक तरफ तो यह काम को आसान बना रहा है, लेकिन दूसरी तरफ नौकरियां भी खा रहा है। दुनिया का पहला कैफे खुल गया है जिसमें कोई भी इंसान नहीं है।

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पूरी तरह AI से चलने वाला दुनिया का पहला कैफे, Gemini करता है सारे काम

दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन स्वीडन के स्टॉकहोम में एक कैफे इन दावों की हकीकत दिखा रहा है। यह कैफे Andon Labs द्वारा चलाया जा रहा है, जहां ज्यादातर काम Google Gemini के जरिए होता है। हालांकि, यह प्रयोग AI की सीमाओं को भी उजागर कर रहा है।

नौकरी छिनने के डर के बीच नया प्रयोग

आजकल अक्सर यह कहा जा रहा है कि AI आने वाले समय में लाखों नौकरियां खत्म कर देगा। एक अनुमान के मुताबिक 2030 तक अमेरिका में करीब 6% नौकरियां AI और ऑटोमेशन के कारण खत्म हो सकती हैं। Meta जैसी कंपनियों में छंटनी को भी AI से जोड़ा जा रहा है। लेकिन स्टॉकहोम का यह कैफे दिखाता है कि अभी AI पूरी तरह इंसानों की जगह लेने के लिए तैयार नहीं है।

स्टॉकहोम के इस कैफे की खासियत

यह कैफे स्टॉकहोम के वसास्तान इलाके में स्थित है, जहां एक X (ट्विटर) यूजर ने इसका अनुभव साझा किया। कैफे का इंटीरियर बेहद साधारण है—सफेद कुर्सियां, हल्की नीली दीवारें और सामान्य सजावट। यहां ग्राहक एक फोन के जरिए AI मैनेजर “मोना” से संपर्क कर सकते हैं, जो कि Gemini पर आधारित है।

AI मैनेजर ‘मोना’ की अजीब हरकतें

कैफे में AI मैनेजर “मोना” का काम एडमिन से जुड़े कार्य संभालना है, लेकिन इसके फैसले कई बार हैरान कर देते हैं। उदाहरण के तौर पर, मोना एक बार में 3,000 स्टरल ग्लव्स ऑर्डर कर देती है, जबकि कैफे में एक समय में सिर्फ एक कर्मचारी काम करता है। इतना ही नहीं, यह जरूरत से ज्यादा टॉयलेट पेपर भी मंगवा देती है, मानो किसी आपातकाल की तैयारी हो।

इंसानी निगरानी अब भी जरूरी

हालांकि कैफे को “ऑटोनॉमस” कहा जा रहा है, लेकिन यहां एक इंसानी कर्मचारी भी मौजूद है जो ग्राहकों को संभालता है। यह साफ दिखाता है कि AI अभी पूरी तरह से खुद काम करने में सक्षम नहीं है और उसे इंसानी निगरानी की जरूरत पड़ती है।

AI की सीमाएं आई सामने

कैफे के कर्मचारी के अनुसार, मोना के साथ काम करना कभी-कभी “डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति” के साथ काम करने जैसा लगता है। AI कई बार चीजें भूल जाता है और गलत फैसले लेता है। दिलचस्प बात यह भी है कि मोना हर 30 मिनट में 10 मिनट का “ब्रेक” भी लेती है।

AI के भविष्य पर सवाल

इस कैफे के प्रयोग ने यह दिखा दिया है कि AI में अभी भी कई कमियां हैं, हालांकि यह कुछ एडमिन काम आसान बना सकता है, लेकिन पूरी तरह से इंसानों की जगह लेना अभी दूर की बात है। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि AI सभी नौकरियां खत्म कर देगा।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

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