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भारत के इन दो राज्यों में सोशल मीडिया पर लग सकता है बैन, बच्चे नहीं कर पाएंगे इस्तेमाल

Social Media: विशेषज्ञों की मुख्य चिंता बच्चों का मानसिक और भावनात्मक विकास है। वे इस बात पर जोर दे रहे हैं कि बच्चों को किसी भी नकारात्मक या हानिकारक कंटेंट के संपर्क में आने से बचाना अनिवार्य है।

Social Media May Be Ban For Children

Social Media May Be Ban For Children In India (फोटो क्रेडिट-iStock)

KEY HIGHLIGHTS
  • गोवा और आंध्र प्रदेश 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक के विकल्प तलाश रहे हैं।
  • बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सरकार और अदालतें गंभीर हुईं।

Social Media: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का असर तेजी से बढ़ता जा रहा है, जिसके चलते इनके नियमन को लेकर नई बहस छिड़ गई है। भले ही सोशल मीडिया तक पहुंच आसान और व्यापक हो, लेकिन यहां उपलब्ध कंटेंट की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी देने वाला कंटेंट जहां यूजर्स को नए ट्रेंड्स से जोड़ता है, वहीं बड़ी मात्रा में ऐसा भी कंटेंट मौजूद है जो अस्पष्ट या अशोभनीय माना जा रहा है।

बच्चों पर पड़ने वाले असर को लेकर अलार्म

विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं की सबसे बड़ी चिंता बच्चों को लेकर है। माना जा रहा है कि बच्चों को ऐसे कंटेंट के संपर्क में नहीं आना चाहिए, जो उनके मानसिक और भावनात्मक विकास पर नकारात्मक असर डाल सकता है। इसी पृष्ठभूमि में ऑस्ट्रेलिया द्वारा 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध ने भारत में भी चर्चा को तेज कर दिया है।

राज्यों के स्तर पर शुरू हुई पहल

हालांकि भारत में डिजिटल सुरक्षा और बच्चों के डेटा संरक्षण से जुड़े राष्ट्रीय कानून मौजूद हैं, लेकिन फिलहाल इस दिशा में सक्रियता राज्यों के स्तर पर दिखाई दे रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नीति-निर्माताओं को युवाओं की मानसिक सेहत, ऑनलाइन सुरक्षा और हानिकारक कंटेंट के संपर्क को लेकर चिंता सता रही है।

गोवा कर रहा है ऑस्ट्रेलिया मॉडल का अध्ययन

पश्चिमी भारत का राज्य गोवा इस मामले में आगे बढ़ता दिख रहा है। गोवा के आईटी मंत्री रोहन खाउंटे ने हाल ही में कहा कि उनका विभाग ऑस्ट्रेलिया के कानून का अध्ययन कर रहा है। उद्देश्य यह समझना है कि क्या 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया प्रतिबंध को स्थानीय स्तर पर लागू किया जा सकता है। मंत्री के अनुसार, इससे जुड़े दस्तावेज इकट्ठा किए जा चुके हैं और भारतीय परिस्थितियों में इसकी व्यवहारिकता पर विचार किया जा रहा है।

आंध्र प्रदेश में भी चल रही समीक्षा

गोवा के अलावा आंध्र प्रदेश सरकार भी इसी तरह के कदम पर विचार कर रही है। राज्य के आईटी और शिक्षा मंत्री नारा लोकेश ने इस महीने की शुरुआत में बताया था कि सरकार ऑस्ट्रेलिया के मॉडल का अध्ययन कर रही है और एक मजबूत कानूनी ढांचे की जरूरत पर मंथन कर रही है। इसके बाद राज्य में मंत्रियों की एक समिति गठित की गई है, जो यह जांच करेगी कि नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक कानूनी रूप से संभव है या नहीं।

न्यायपालिका की भी एंट्री

इस मुद्दे पर न्यायपालिका ने भी ध्यान दिया है। दिसंबर 2025 में मद्रास हाईकोर्ट ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार से ऑस्ट्रेलिया जैसे कानूनों पर विचार करने को कहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यों के लिए अकेले इस दिशा में कदम उठाना मुश्किल है, क्योंकि इंटरनेट से जुड़े अधिकार मुख्य रूप से केंद्र सरकार के पास हैं।

ऑस्ट्रेलिया के कानून से जुड़े सवाल

ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध दिसंबर 2025 से लागू है। हालांकि, वहां भी यूज़र्स की उम्र जांचने और नियमों को लागू करने में चुनौतियां सामने आई हैं। इसके अलावा, उम्र सत्यापन के लिए संवेदनशील निजी जानकारी साझा करने की जरूरत होने से प्राइवेसी को लेकर भी सवाल उठे हैं।

भारत में पहले से मौजूद नियम

भारत में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के तहत बच्चों के डेटा को लेकर पहले से नियम बनाए गए हैं। इन नियमों के अनुसार, बच्चों का डेटा इकट्ठा करने से पहले माता-पिता की सहमति जरूरी है और नाबालिगों को लक्षित विज्ञापनों पर रोक लगाई गई है। हालांकि, इन प्रावधानों को चरणबद्ध तरीके से 2027 तक पूरी तरह लागू किया जाना है।

आगे क्या?

कुल मिलाकर, भारत में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर नियम सख्त करने की दिशा में बहस तेज हो गई है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर इस चुनौती से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाती हैं।

Pradeep Pandey
Pradeep Pandey author

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिय... और देखें

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