मोबाइल फोन आज के समय में हर व्यक्ति की रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है। बैंकिंग, ओटीपी, ऑनलाइन सेवाएं और आपात स्थिति में संपर्क के लिए मोबाइल बेहद जरूरी हो गया है। इसी मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चढ्ढा ने संसद में प्रीपेड मोबाइल रिचार्ज से जुड़े नियमों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि टेलीकॉम कंपनियां प्रीपेड ग्राहकों के साथ मनमानी कर रही हैं और कई नियम ऐसे हैं जो उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बनते हैं।
रिचार्ज खत्म होते ही इनकमिंग कॉल बंद करना गलत
सांसद राघव चड्ढा ने संसद में कहा कि यदि किसी ग्राहक का रिचार्ज खत्म हो जाता है तो आउटगोइंग कॉल बंद होना समझ में आता है, लेकिन इनकमिंग कॉल को भी बंद कर देना उचित नहीं है। उनका कहना था कि रिचार्ज समाप्त होते ही व्यक्ति के फोन पर न तो कोई कॉल आ पाती है और न ही जरूरी मैसेज मिल पाते हैं। उन्होंने बताया कि कई बार बैंकिंग ओटीपी या जरूरी सूचनाएं भी ऐसे समय में नहीं पहुंच पातीं। आपात स्थिति में यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है, क्योंकि व्यक्ति दूसरों से संपर्क करने या मदद लेने में असमर्थ हो जाता है।
28 दिन का रिचार्ज प्लान बताया “स्कैम”
सांसद ने टेलीकॉम कंपनियों के 28 दिन वाले रिचार्ज प्लान पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक साल में 12 महीने होते हैं, लेकिन 28 दिन की वैधता वाले प्लान के कारण उपभोक्ताओं को साल में 13 बार रिचार्ज कराना पड़ता है।
उनका तर्क था कि 28 दिन के प्लान के कारण पूरे साल में 364 दिन ही कवर होते हैं और ग्राहकों को एक अतिरिक्त रिचार्ज करवाना पड़ता है। राघव चड्ढा ने कहा कि रिचार्ज प्लान की वैधता कैलेंडर महीने यानी 30 या 31 दिन के हिसाब से होनी चाहिए, ताकि ग्राहकों को अतिरिक्त खर्च न उठाना पड़े।
मोबाइल अब लग्जरी नहीं, जरूरत
सांसद ने संसद में यह भी कहा कि आज के दौर में मोबाइल फोन कोई लग्जरी नहीं रहा, बल्कि आम नागरिक की एक जरूरी आवश्यकता बन चुका है। डिजिटल सेवाओं के बढ़ते उपयोग के कारण मोबाइल कनेक्टिविटी लोगों के जीवन का अहम हिस्सा बन गई है।
टेलीकॉम कंपनियों से पारदर्शिता की मांग
राघव चड्ढा ने टेलीकॉम कंपनियों से अपील की कि वे उपभोक्ताओं के साथ निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवहार करें। उनका कहना था कि प्रीपेड ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए ऐसे नियम बनाए जाने चाहिए, जिससे उन्हें अनावश्यक आर्थिक बोझ और असुविधा का सामना न करना पड़े।
