Interesting Facts of I Love U Virus: आई लव यू (ILoveYou) शब्द प्यार का इजहार करने के लिए लोकप्रिय है। लेकिन ये तीन शब्द एक वायरस के नाम के रूप में भी जाने जाते हैं, जिनमें कुछ सेकेंड में कंप्यूटर को क्रैश करने की क्षमता होती हैं। ये वायरस किसी भी डिपार्टमेंट के सभी कंप्यूटर्स को एकसाथ खराब कर सकता है। साल 2000 में पहली बार ये आसतित्व में आया था। तब से अब तक हजारों कंप्यूटर्स को यह वायरस नुकसान पहुंचा चुका है।
कंप्यूटर में कैसे बनाता है पहुंच
ईमेल से ये वायरस यूजर के कंप्यूटर में पहुंचता है। जो ईमेल आता है उसका सब्जेक्ट I Love You होता है साथ ही Love Letter For You नाम का अटैचमेंट होता है। यूजर जैसे ही अपनी मेल कंप्यूटर में खोलता है, ये वायरस एक्टिव हो जाता है और फिर खुद-ब-खुद रिफ्लेक्ट हो जाता है और आपके इनबॉक्स में उपलब्ध 50 लोगों को वही मैसेज भेज देता है। बस एक बार घुस जाने पर यह पूरे सर्वर और मेल सिस्टम को क्रैश कर देता है। यह वायरस पेजर और पेजिंग सर्विसेज को भी नुकसान पहुंचा कर बंद करने का कारण बन चुका है।
अब दुनिया के पहले वायरस के बारे में जानते हैं
पाकिस्तान में दुनिया का पहला कंप्यूटर वायरस 1986 में बना। इस वायरस का नाम ब्रेन था। दुनिया में इससे पहले भी कंप्यूटर वायरस बने थे, लेकिन वे पर्सनल कंप्यूटर पर नहीं आए थे। और जिस तरह ये फैला था उस तरह नहीं फैले पाए थे। इसीलिए पहले वाले वायरस ज्यादा लोकप्रिय नहीं हो पाएं। हालांकि‘ब्रेन’ नुकसान करने के मामले में बहुत घातक नहीं था। पर ये फैलता बहुत जल्दी था और इसको हटाना मुश्किल था। इसी वायरस के चलते अरबों डॉलर की एंटीवायरस इंडस्ट्री को बढ़ावा मिला। वायरस मालवेयर का एक प्रकार है।
पाकिस्तान के दो भाइयों ने मिलकर तैयार किया था ब्रेन वायरस
इस वायरस को बनाने वाले में 19 साल के बासित फ़ारुख अल्वी और उनके भाई अमजद का नाम आता है। इन्होंने एक मेडिकल सॉफ़्टवेयर बनाया। इनकी लाहौर में एक कंपनी थी, जिसका नाम था ब्रेन टेलिकॉम। वह सॉफ़्टवेयर की पायरेसी को रोकने चाहते थे। इसी बीच में माइक्रोसॉफ़्ट ने डॉस ऑपरेटिंग सिस्टम उतार दिया। डॉस में सुरक्षा की नज़र से कई कमियां थीं और दोनों भाइयों ने एक प्रोग्राम लिखा।
यह प्रोग्राम फ़्लॉपी में पायरेसी वाला सॉफ़्टवेयर होने पर सात केबी की खाली जगह पर कब्जा कर लेता था। इससे स्क्रीन फ़्रीज़ हो जाती। सिस्टम स्लो हो जाता और एक मैसेज दिखाई देता। वायरस के इलाज के लिए तीन फ़ोन नंबर भी दिए हुए थे। जो दोनों भाइयों के होते थे। इससे ठीक करके वे पैसा कमाते थे।
