व्हाट्सएप यूजर्स की जासूसी करने वाले स्पाइवेयर मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। स्पाइवेयर बनाने वाली कंपनी NSO Group को 2019 में किए गए हैकिंग हमले के चलते अब भारी भरकम हर्जाना भरना पड़ेगा। पांच साल तक चले कानूनी संघर्ष के बाद जूरी ने फैसला सुनाया कि NSO Group को 167.25 मिलियन डॉलर (करीब 1,400 करोड़ रुपये) की दंडात्मक क्षतिपूर्ति और 4.44 लाख डॉलर (करीब 3.7 करोड़ रुपये) की मुआवजा क्षतिपूर्ति चुकानी होगी।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 2019 में शुरू हुआ था, जब मेटा के स्वामित्व वाले WhatsApp ने NSO Group के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। व्हाट्सएप का आरोप था कि NSO ने अपने जासूसी सॉफ्टवेयर Pegasus का इस्तेमाल कर दुनियाभर में 1,400 से ज्यादा लोगों को निशाना बनाया, जिनमें पत्रकार, मानवाधिकार कार्यकर्ता, और राजनीतिक कार्यकर्ता शामिल थे।
इस हमले में भारत के 100 लोग, मेक्सिको के 456, बहरीन के 82, मोरक्को के 69 और पाकिस्तान के 58 लोग निशाने पर थे। कुल मिलाकर 51 देशों के लोग प्रभावित हुए। Pegasus को WhatsApp की वॉइस कॉलिंग सुविधा में पाए गए एक Zero-Day Vulnerability (CVE-2019-3568) के जरिए फैलाया गया था।
कानूनों का किया उल्लंघन
दिसंबर 2024 में, अमेरिकी जिला न्यायाधीश फिलिस जे. हैमिल्टन ने माना कि NSO Group ने अमेरिकी और कैलिफोर्निया राज्य के कानूनों का उल्लंघन किया। उन्होंने कहा कि मई 2019 के दौरान Pegasus को WhatsApp के अमेरिका स्थित सर्वर के माध्यम से 43 बार भेजा गया।
WhatsApp प्रमुख विल कैथकार्ट ने कहा, "यह फैसला न सिर्फ NSO को सजा देने का एक ऐतिहासिक कदम है, बल्कि यह पूरे स्पायवेयर उद्योग के लिए एक चेतावनी भी है।" इसके अलावा, WhatsApp ने कहा कि वह अब अदालत से NSO को हमेशा के लिए प्लेटफॉर्म से दूर रखने का आदेश मांगेगा और डिजिटल अधिकारों के लिए काम कर रहे संगठनों को दान देगा। यह फैसला निजता और मानवाधिकारों की रक्षा करने वालों के लिए बड़ी जीत मानी जा रही है।
