एक पुरानी कहावत है कि दीवारों के भी कान होते हैं लेकिन अब टेक्नोलॉजी और वाई-फाई के इस दौर में अब यह भी कहा जा सकता है कि दीवारों के कान ही नहीं, आंखें भी हैं। नई रिसर्च में सामने आया है कि अब सामान्य WiFi सिग्नल का उपयोग करके दीवार के पार मौजूद इंसानों की गतिविधियों का पता लगाया जा सकता है।
एक ओपन-सोर्स एज AI सिस्टम π RuView को इसी उद्देश्य से विकसित किया गया है। यह सिस्टम बिना किसी कैमरे के सिर्फ WiFi सिग्नल के जरिए इंसान की बॉडी पोज, मूवमेंट पैटर्न और यहां तक कि सांस व दिल की धड़कन जैसी जानकारी भी पहचान सकता है। इस तकनीक ने सुरक्षा और निजता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
WiFi सिग्नल से बॉडी पोज़ की पहचान
यह तकनीक WiFi हार्डवेयर द्वारा एकत्र किए जाने वाले चैनल स्टेट इंफॉरमेशन (CSI) डेटा का उपयोग करती है। जब कोई व्यक्ति WiFi सिग्नल के दायरे में चलता-फिरता है, तो उसके शरीर के कारण सिग्नल के रास्ते में हल्का बदलाव होता है। सिस्टम इन बदलावों को रिकॉर्ड कर विश्लेषण करता है और डीप लर्निंग एल्गोरिद्म के जरिए मानव शरीर की गतिविधि और पोज़ को पुनर्निर्मित कर सकता है। इस प्रक्रिया में सिग्नल के एम्प्लीट्यूड और फेज में होने वाले बदलावों को प्रोसेस किया जाता है।
सांस और हार्ट रेट तक का पता
इस सिस्टम में शरीर की गतिविधि के साथ-साथ जीवन संकेतों का भी विश्लेषण किया जा सकता है। विशेष फिल्टरिंग तकनीक की मदद से सांस लेने की गति और हृदय की धड़कन का भी अनुमान लगाया जा सकता है। इसका मतलब है कि यह तकनीक किसी कमरे में मौजूद व्यक्ति की शारीरिक गतिविधियों के साथ उसकी बायोमेट्रिक जानकारी भी पहचान सकती है।
कम कीमत वाले डिवाइस से संभव निगरानी
इस तकनीक का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इसे चलाने के लिए महंगे उपकरणों की जरूरत नहीं होती। छोटे माइक्रोकंट्रोलर डिवाइस, जैसे कि ESP32, जिनकी कीमत लगभग 1 डॉलर के आसपास हो सकती है, इन्हें एक नेटवर्क के रूप में लगाकर पूरे कमरे की निगरानी की जा सकती है। चार से छह ऐसे डिवाइस मिलकर 360 डिग्री तक का कवरेज दे सकते हैं और यह सिस्टम इंटरनेट या क्लाउड पर निर्भर भी नहीं होता।
गोपनीयता और कानून से जुड़ी चिंताएं
विशेषज्ञों के अनुसार कैमरों पर तो कई देशों में कड़े नियम लागू हैं, लेकिन WiFi आधारित निष्क्रिय निगरानी तकनीक अभी कानूनी रूप से स्पष्ट श्रेणी में नहीं आती। क्योंकि यह तकनीक दिखाई नहीं देती और इसके लिए किसी जगह में सीधे प्रवेश की जरूरत भी नहीं होती। ऐसे में यह तकनीक भविष्य में सुरक्षा और निजता के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।
सुरक्षा विशेषज्ञों की चेतावनी
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी तकनीकों को रोकने के लिए नई नीतियां और नियम बनाना जरूरी होगा। संवेदनशील स्थानों पर RF शील्डिंग, संदिग्ध डिवाइस की निगरानी और नेटवर्क सुरक्षा को मजबूत करना ऐसे उपाय हैं, जिनसे इस तरह की संभावित जासूसी को रोका जा सकता है।
