Global Snakes Business : 1970 से अब तक सांपों की वजह से ग्लोबल इकोनॉमी को 1.3 लाख करोड़ डॉलर यानी सालाना 26 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान हो रहा है। लेकिन, अब सांपों की पहचान बदल रही है। डरावने, जहरीले और नुकसान पहुंचाने वाले सांप अब फैशन, फार्मा और न्यूट्रीशन इंडस्ट्री के लिए कच्चे माल का बड़ा स्रोत बन गए हैं। फिलहाल, सांपों की ग्लोबल इकोनॉमी करीब 300 करोड़ डॉलर की है। इसमें सांपों की खाल से फैशन एसेसरीज, जहर से दवाएं और मांस से प्रोटीन मिल रहा है। यही वजह है कि चीन, वियतनाम और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में बड़े पैमाने पर स्नेक फार्मिंग की जा रही है। कई फार्म हर साल लाखों सांप पालते हैं, जिनसे खाल, जहर और मांस की सप्लाई होती है।
Snakes Fashion Industry : UNCTAD की एक रिपोर्ट के मुताबिक सबसे बड़ी कमाई सांप की खाल से होती है। लग्जरी फैशन ब्रांड हैंडबैग, बेल्ट, जूते और वॉलेट बनाने के लिए पाइथन और अन्य प्रजातियों की स्किन का इस्तेमाल करते हैं। अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर निगरानी रखने वाली व्यवस्था CITES के तहत इस कारोबार को परमिट के जरिए नियंत्रित किया जाता है और हर साल बड़ी संख्या में सांपों की खाल तथा उससे बने उत्पाद वैश्विक बाजार में पहुंचते हैं।
Snakes Pharma Industry : इसी तरह MDPI पर पब्लिश रिसर्च पेपर 'Patterns and Risks of China’s Snake Trade Driven by Medicinal and Culinary Traditions' यानी 'औषधीय और पाक परंपराओं से प्रेरित चीन के सांप व्यापार के पैटर्न और जोखिम' में बताया गया है कि खाल के बाद सबसे ज्यादा फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री में सांपों का इस्तेमाल होता है। सांप का जहर कई जीवनरक्षक दवाओं के विकास में इस्तेमाल होता है। हाई ब्लड प्रेशर, खून के थक्के बनने की समस्या, दर्द नियंत्रण और न्यूरोलॉजिकल रिसर्च में इस्तेमाल होने वाले कई यौगिक सांप के विष से विकसित किए गए हैं। एंटी-वेनम बनाने के लिए भी लगातार सांप का जहर निकाला जाता है, इसलिए विषैले सांपों की नियंत्रित फार्मिंग का आर्थिक महत्व लगातार बढ़ रहा है।
Snakes Food Industry : CITES की एक रिपोर्ट के मुताबिक सांपों के सबसे ज्यादा इस्तेमाल वाली तीसरी इंडस्ट्री फूड सेक्टर है। चीन, वियतनाम और कुछ अन्य एशियाई देशों में सांप का मांस पारंपरिक भोजन और उच्च प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थ के रूप में खाया जाता है। इसके अलावा पारंपरिक चिकित्सा में भी सांप से बने कई उत्पादों की मांग बनी हुई है। इसी मांग को पूरा करने के लिए दक्षिणी चीन में सैकड़ों व्यावसायिक स्नेक फार्म संचालित हो रहे हैं।
हजारों स्नेक फार्म, लाखों सांप
चीन और वियतनाम में ही करीब 4,000 से ज्यादा पाइथन फार्म हैं, जहां हर साल लाखों सांप तैयार किए जाते हैं। इन फार्मों का मुख्य उद्देश्य पहले सांप की खाल निकालना था, लेकिन अब वैज्ञानिक मान रहे हैं कि इनकी असली आर्थिक क्षमता इनके मांस और अन्य उत्पादों में छिपी है।
सांपों का वैश्विक बाजार
फूड सिक्योरिटी का भविष्य
मैक्वेरी यूनिवर्सिटी समेत अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों ने थाईलैंड और वियतनाम के दो व्यावसायिक स्नेक फार्मों में 4,600 पाइथन पर एक साल तक अध्ययन किया। रिसर्च में पाया गया कि पाइथन पारंपरिक पशुओं की तुलना में कहीं ज्यादा कुशल तरीके से भोजन को शरीर के वजन में बदलते हैं। ये सांप कई महीनों तक बिना भोजन के जीवित रह सकते हैं, बहुत कम पानी की जरूरत होती है और भोजन मिलने पर तेजी से बढ़ते हैं। एक मादा पाइथन साल में 50 से 100 अंडे दे सकती है, जबकि एक गाय या भैंस औसतन एक साल में एक से भी कम बछड़ा पैदा करती है। यही वजह है कि वैज्ञानिक इसे भविष्य की फूड सिक्योरिटी के लिए संभावित विकल्प मान रहे हैं।
सांपों के कारोबार में भारत कहां?
भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत देशी सांपों का शिकार और व्यापार प्रतिबंधित है, इसलिए भारत जिंदा सांपों या स्नेक स्किन का बड़ा कानूनी निर्यातक नहीं है। हालांकि कस्टम डेटा के अनुसार "Snake Skin" श्रेणी में भारत से करीब 4.81 लाख डॉलर (लगभग ₹4 करोड़) का निर्यात दर्ज है, जो मुख्य रूप से प्रोसेस्ड या री-एक्सपोर्टेड उत्पाद माने जाते हैं। वहीं, भारत से स्नेक वेनम (Snake Venom) का भी सीमित लेकिन नियमित निर्यात होता है। वोल्जा के आंकड़ों के अनुसार जून 2024 से मई 2025 के बीच भारत से स्नेक वेनम की 117 अंतरराष्ट्रीय शिपमेंट हुईं, जिससे भारत इस श्रेणी के प्रमुख निर्यातकों में शामिल है।
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