ना खंबा, ना तार, वाई-फाई की तरह सप्लाई होगी बिजली, इस देश में हुआ सफल प्रयोग
- Authored by: Pradeep Pandey
- Updated Jan 21, 2026, 07:58 AM IST
“अकूस्टिक वायर” एक ऐसी तकनीक है, जिसमें हाई-इंटेंसिटी अल्ट्रासोनिक साउंड वेव्स का इस्तेमाल कर हवा में एक अदृश्य रास्ता बनाया जाता है। यह रास्ता तार की तरह काम करता है, जिसके सहारे बिजली के छोटे-छोटे स्पार्क सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ते हैं। इससे बिना किसी फिजिकल संपर्क के इलेक्ट्रॉनिक और स्मार्ट डिवाइसों को पावर दी जा सकती है।
Electricity Through Air/Photo-AI
फिनलैंड के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा प्रयोग किया है जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। यहां के वैज्ञानिकों ने बिना किसी तार या केबल के हवा के माध्यम से बिजली ट्रांसमिट करने में सफलता हासिल की है। इस प्रयोग में हाई-इंटेंसिटी साउंड वेव्स (अल्ट्रासोनिक तरंगें), लेजर और रेडियो फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल किया गया। शोधकर्ताओं का लक्ष्य भविष्य में प्लग, वायर और पारंपरिक इलेक्ट्रिकल कनेक्शन को पूरी तरह खत्म करना है। यह तकनीक आने वाले समय में घरों, फैक्ट्रियों और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की दुनिया बदल सकती है।
फिनलैंड में असल में क्या हुआ?
फिनलैंड के वैज्ञानिकों ने हवा के जरिए बिजली भेजने का सफल प्रदर्शन किया। उन्होंने अल्ट्रासोनिक साउंड वेव्स, लेजर और रेडियो फ्रीक्वेंसी को मिलाकर एक प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट तैयार किया। इस प्रयोग से यह साबित हुआ कि बिना प्लग, तार या केबल के भी ऊर्जा को नियंत्रित तरीके से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जा सकता है। भविष्य में इससे डिवाइसों को कहीं भी वायरलेस पावर देना संभव हो सकता है।
इस आइडिया के पीछे कौन था?
इस शोध का नेतृत्व यूनिवर्सिटी ऑफ हेलसिंकी और यूनिवर्सिटी ऑफ ओउलू की टीमों ने किया। इनके साथ कुछ निजी कंपनियां भी जुड़ी थीं, जो “पावर-बाय-लाइट” और रेडियो फ्रीक्वेंसी एनर्जी हार्वेस्टिंग तकनीकों पर काम कर रही हैं। यह प्रोजेक्ट फिजिक्स, इंजीनियरिंग और अत्याधुनिक इनोवेशन का बेहतरीन उदाहरण है, जिसने फिनलैंड को वायरलेस बिजली रिसर्च में अग्रणी बना दिया है।
क्या है “अकूस्टिक वायर”?
“अकूस्टिक वायर” एक ऐसी तकनीक है, जिसमें हाई-इंटेंसिटी अल्ट्रासोनिक साउंड वेव्स का इस्तेमाल कर हवा में एक अदृश्य रास्ता बनाया जाता है। यह रास्ता तार की तरह काम करता है, जिसके सहारे बिजली के छोटे-छोटे स्पार्क सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ते हैं। इससे बिना किसी फिजिकल संपर्क के इलेक्ट्रॉनिक और स्मार्ट डिवाइसों को पावर दी जा सकती है।
क्या यह फिजिक्स के नियमों को तोड़ता है?
नहीं, यह फिजिक्स के नियमों के खिलाफ नहीं है। यह वह “वायरलेस बिजली” नहीं है, जैसा आमतौर पर लोग कल्पना करते हैं। यहां फ्री-फ्लोटिंग पावर नहीं, बल्कि फील्ड-गाइडेड एनर्जी ट्रांसफर किया गया है। अल्ट्रासोनिक तरंगें हवा की डेंसिटी को आकार देती हैं, जिससे बिजली के सूक्ष्म स्पार्क एक तय रास्ते पर चलते हैं। लेजर लाइट को बहुत कम मात्रा में बिजली में बदलकर सुरक्षित रूप से ट्रांसमिट किया जाता है। वहीं, रेडियो फ्रीक्वेंसी हार्वेस्टिंग आसपास मौजूद माइक्रोवेव ऊर्जा को माइक्रोवॉट्स में बदलकर कम पावर वाले सेंसरों को चलाती है। असली उपलब्धि अनलिमिटेड बिजली नहीं, बल्कि ऊर्जा पर सटीक नियंत्रण है।
यह कैसे संभव हुआ?
शोधकर्ताओं ने अल्ट्रासोनिक बीम और लेजर सिस्टम को बेहद सटीक तरीके से कैलिब्रेट किया। लेजर दूर मौजूद रिसीवर तक ऊर्जा पहुंचाने के साथ-साथ गैल्वैनिक आइसोलेशन भी प्रदान करता है। रेडियो फ्रीक्वेंसी हार्वेस्टिंग तकनीक आसपास की तरंगों से बिजली बनाकर लो-एनर्जी डिवाइसों को पावर देती है। इन तीनों तकनीकों के संयोजन से यह साबित हुआ कि हवा के जरिए भी बिजली सुरक्षित और प्रभावी ढंग से भेजी जा सकती है।
क्या फिनलैंड ऐसा करने वाला पहला देश है?
दुनियाभर में मोबाइल फोन और छोटे डिवाइसों के लिए वायरलेस चार्जिंग पहले से मौजूद है, लेकिन हवा के जरिए वास्तविक बिजली को सुरक्षित रूप से ट्रांसमिट करने में फिनलैंड अग्रणी देशों में शामिल है। साउंड, लाइट और रेडियो तीनों को एक साथ बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करना अब तक अभूतपूर्व माना जा रहा है।
क्या इससे विज्ञान की दुनिया बदल जाएगी?
यह प्रयोग इस सोच को चुनौती देता है कि बिजली के लिए तार जरूरी हैं। यह दिखाता है कि नई कल्पना, सटीक तकनीक और आधुनिक फिजिक्स मिलकर पुराने मसलों का समाधान निकाल सकते हैं। आने वाले समय में यह खोज केबल-फ्री घरों, फैक्ट्रियों और इंडस्ट्रियल सिस्टम्स के लिए नए रास्ते खोल सकती है।