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मोबाइल यूजर्स के लिए सरकारी चेतावनी, एक गलती और सलाखों के पीछे होंगे आप

DoT ने स्पष्ट किया कि IMEI छेड़छाड़, फर्जी SIM खरीदना या किसी और को SIM देने से गंभीर कानूनी परिणाम हो सकते हैं। अगर आपके नाम पर जारी SIM का बाद में गलत इस्तेमाल हुआ, तो आप ही अपराधी माने जा सकते हैं।

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सरकार ने देश के करोड़ों मोबाइल यूजर्स के लिए बड़ी चेतावनी जारी की है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने कहा है कि यदि किसी व्यक्ति के नाम पर जारी SIM कार्ड का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड या किसी अन्य अवैध गतिविधि के लिए किया जाता है, तो खाताधारक को कानूनी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

दूरसंचार विभाग ने कहा है कि अपने मोबाइल डिवाइस का IMEI नंबर जरूर चेक करें कि वह असली है या नहीं। सेकेंड हैंड फोन खरीदने से पहले इसका खास ध्यान रखें। इसके अलावा ऐसी किसी भी डिवाइस (मोमोडेम, मॉड्यूल या SIM बॉक्स आदि) को खरीदना या इस्तेमाल करना आपको मुसीबत में डाल सकता है जिनके IMEI को बदलना या कॉन्फिगर करना संभव हो।

इसके अलावा फर्जी दस्तावेज या धोखाधड़ी के माध्यम से SIM कार्ड लेना भी अपराध है। अपने नाम पर लिया SIM किसी और को देना, जो इसका गलत इस्तेमाल कर सकता हो। DoT ने स्पष्ट किया कि IMEI छेड़छाड़, फर्जी SIM खरीदना या किसी और को SIM देने से गंभीर कानूनी परिणाम हो सकते हैं। अगर आपके नाम पर जारी SIM का बाद में गलत इस्तेमाल हुआ, तो आप ही अपराधी माने जा सकते हैं।

कानूनी और नियमों का ढांचा

Telecommunications Act, 2023 के तहत मोबाइल हैंडसेट और अन्य उपकरणों के IMEI या दूरसंचार पहचानकर्ता छेड़छाड़ करने पर सख्त दंड हैं। इस कानून के उल्लंघन पर तीन साल तक की जेल या 50 लाख रुपये तक जुर्माना, या दोनों लग सकते हैं।

साथ ही, Telecommunications (Telecom Cyber Security) Rules, 2024 के तहत IMEI बदलने या ऐसे उपकरण रखने पर रोक है। जो कंपनियां रीसेल या रिफर्बिश्ड डिवाइस बेचती हैं, उन्हें हर डिवाइस का IMEI केंद्रित ब्लैकलिस्ट डेटाबेस में चेक करके ही बेचना होगा। यह उपभोक्ताओं की सुरक्षा करता है और चोरी हुए उपकरणों का पता लगाने में मदद करता है।

संचार साथी पहल

सरकार ने Sanchar Saathi Initiative शुरू किया है, जो नागरिकों को उनके मोबाइल कनेक्शन की सुरक्षा और सत्यापन के डिजिटल टूल प्रदान करता है। DoT की सलाह है कि सभी लोग IMEI विवरण Sanchar Saathi पोर्टल या ऐप के माध्यम से जांचें, जिससे पता चले कि डिवाइस का ब्रांड, मॉडल और निर्माता सही है या नहीं। सरकार द्वारा ये सख्त नियम और पहल इसलिए लागू की गई हैं ताकि टेलीकॉम संसाधनों का गलत इस्तेमाल रोका जा सके और सभी नागरिकों के लिए सुरक्षित दूरसंचार प्रणाली सुनिश्चित की जा सके।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

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