Mobile phone industry: इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी (आईटी) सचिव एस कृष्णन ने बुधवार को उद्योग जगत से कहा कि उन्हें ‘भारत में डिजाइन और विकसित’ मोबाइल फोन का लक्ष्य लेकर चलना चाहिए। उन्होंने वैल्यू चैन में डिजाइन का पहलू नजरअंदाज नहीं करने के लिए भी कहा। उन्होंने कहा कि घरेलू बाजार के समग्र आकार और हैंडसेट के औसत अपेक्षित जीवनकाल को बैकग्राउंड में देखा जाए तो मात्रा के मामले में देश में विनिर्मित मोबाइल फोन ‘स्थिर स्थिति’ में पहुंच गए हैं।
निर्यात बाजारों का करें उपयोग
कृष्णन ने ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम (बीआईएफ) कार्यक्रम में यह भी कहा कि भारत को खुद को एक प्रतिस्पर्धी गंतव्य के रूप में स्थापित करना चाहिए जहां कंपनियां घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात के लिए भी मैन्युफैक्चरिंग कर सकें। सचिव ने कहा कि यहां से उत्पादन क्षमताओं के महत्तम उपयोग के लिए कंपनियों को निर्यात बाजारों का भी उपयोग करने की जरूरत होगी।
मेड इन इंडिया मोबाइल फोन
उन्होंने कहा कि कंपनियों को ‘भारत में विकसित डिजाइन’ वाले मोबाइल फोन के बारे में सोचने की जरूरत है। डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं दोनों की ताकत के आधार पर आगे बढ़ने से देश में अधिक मूल्य सृजन होगा।
कृष्णन ने कहा कि यह सवाल उठ रहा है कि ‘भविष्य का डिजाइन’ कैसा होगा, इसका उत्तर अन्य देशों के साथ-साथ भारत भी दे सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पास जिस तरह की डिजाइन की ताकत है, और जिस तरह की क्षमताएं हैं, उसे देखते हुए डिजाइन की बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। यह मोबाइल उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण लक्ष्य होना चाहिए।’’
मैन्युफैक्चरिंग में 52.5 अरब डॉलर का है आंकड़ा
कृष्णन ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र बढ़कर लगभग 115 अरब डॉलर हो गया है, जिसमें से मोबाइल फोन सबसे तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र है। उन्होंने कहा, ‘‘इस क्षेत्र का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा है। मोबाइल फोन का कुल मैन्युफैक्चरिंग वर्तमान में लगभग 4.2 लाख करोड़ रुपये यानी लगभग 52.5 अरब डॉलर का है.. इसके साथ यह इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।’’
इनपुटः भाषा
