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AI Impact Summit 2026: जीत अदाणी बोले- भविष्य में 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' तय करेगी देशों की ताकत!

अदाणी समूह के जीत अदाणी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर दूरदर्शी बयान दिए हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में AI केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि किसी भी देश की 'राष्ट्रीय संप्रभुता' (National Sovereignty) को तय करने वाला सबसे बड़ा कारक होगा।

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AI Impact Summit 2026

AI Impact Summit 2026: अदाणी समूह के कार्यकारी निदेशक जीत अदाणी ने गुरुवार को कहा कि भारत को आयात पर निर्भर रहने के बजाय अपना स्वयं का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई आने वाले समय में राष्ट्रीय संप्रभुता को नए सिरे से परिभाषित करेगा।

भाषा (पीटीआई) की एक रिपोर्ट के अनुसार, कारोबारी दिग्गज गौतम अदाणी के छोटे बेटे जीत अदाणी ने भारत की ’इंटेलिजेंस सेंचुरी’ (बौद्धिक सदी) का खाका पेश करते हुए संप्रभुता के तीन प्रमुख स्तंभों ऊर्जा, कंप्यूट और क्लाउड, तथा सेवाओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ये तीनों भारत की एआई रणनीति के केंद्र में हैं।

ऊर्जा और कंप्यूटिंग सेवाओं के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बने भारत

’इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ में अदाणी ने कहा कि अपने एआई भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भारत को ऊर्जा और कंप्यूटिंग सेवाओं के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करनी होगी। उन्होंने अक्षय ऊर्जा समूहों को एआई डेटा केंद्रों और औद्योगिक गलियारों के साथ इंटीग्रेट करने की योजनाओं का विवरण देते हुए कहा, "एआई कोड में लिखा जाता है, लेकिन यह बिजली से संचालित होता है। इसलिए ऊर्जा सुरक्षा ही वास्तव में बौद्धिक सुरक्षा है। सस्टेनेबल एनर्जी हमारे लिए एक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ बनेगी।"

एआई का सबसे पहला लाभ भारतीय नागरिकों को मिले

कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर उन्होंने कहा, "क्लाउड संप्रभुता का अर्थ अलगाव नहीं, बल्कि स्वायत्तता है। भारत को अपनी महत्वपूर्ण एआई जरूरतों को घरेलू स्तर पर ही पूरा करना चाहिए। हमारे स्टार्टअप, शिक्षा जगत, रक्षा, स्वास्थ्य सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों के लिए उच्च-क्षमता वाली कंप्यूटिंग सुविधाओं तक स्वदेशी पहुंच होनी चाहिए।" अदाणी ने जोर देकर कहा कि एआई का सबसे पहला लाभ भारतीय नागरिकों को मिलना चाहिए, जिससे कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिल सके।

एआई संप्रभुता को नए सिरे से परिभाषित करेगा

उन्होंने संप्रभु और हरित-ऊर्जा आधारित एआई मंचों के लिए अदाणी समूह की 100 अरब डॉलर की प्रतिबद्धता का भी जिक्र किया। जीत ने इसे ’पांच-गीगावाट और 250 अरब डॉलर के एकीकृत ऊर्जा-एवं-कंप्यूट परिवेश’ की शुरुआत बताया, जिसे भारत की बौद्धिक क्रांति को गति देने के लिए तैयार किया गया है। उन्होंने कहा, "सवाल अब यह नहीं है कि भारत एआई सदी में शामिल होगा या नहीं। सवाल यह है कि क्या एआई सदी के बुनियादी ढांचे, बुद्धिमत्ता, मानकों और मूल्यों पर भारत की छाप होगी? मेरा दृढ़ विश्वास है कि ऐसा जरूर होगा।’" उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि जिस तरह बिजली से संचालित होने वाले उद्योगों ने भू-राजनीति को बदला और इंटरनेट ने वाणिज्य का कायाकल्प किया, उसी तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब संप्रभुता को नए सिरे से परिभाषित करेगी।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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