भारत सरकार ने इस ऐप पर लगाया बैन, कहा- फोन से तुरंत डिलीट करें
- Authored by: Pradeep Pandey
- Updated Jan 30, 2026, 11:31 AM IST
Mobile App Banned In India: अधिकारियों के मुताबिक, यह ऐप कम समय में ज्यादा कमाई और पक्के रिटर्न का वादा करता था। यूजर्स को छोटे टास्क पूरे करने या निवेश के नाम पर पैसे जमा करने के लिए कहा जाता था। इसके बाद या तो ऐप बंद हो जाता था या यूजर अकाउंट ब्लॉक कर दिए जाते थे।
भारत में बैन हुआ यह मोबाइल ऐप/ Photo- Canva
भारत सरकार समय-समय पर उन संदिग्ध मोबाइल ऐप्स की पहचान करती है जिनसे देश के नागरिकों को परेशानी हो सकती है और राष्ट्र के लिए खतरा हैं। पहले इन ऐप्स की पहचान की जाती है और फिर इन्हें बैन किया जाता है। अब सरकार ने संगठित साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क पर कड़ी कार्रवाई करते हुए ‘Wingo’ एंड्रॉयड ऐप पर बैन लगा दिया है।
सरकार ने Wingo ऐप से जुड़े पूरे डिजिटल इकोसिस्टम को ब्लॉक कर दिया है। जांच में सामने आया कि यह ऐप यूजर्स की जानकारी के बिना उनके फोन से फर्जी SMS भेज रहा था। इसके बाद सरकार ने एंड्रॉयड यूजर्स के लिए अलर्ट जारी करते हुए अनजान और अनचाहे ऐप डाउनलोड न करने की चेतावनी दी है।
शिकायतों के बाद गृह मंत्रालय की त्वरित कार्रवाई
कई शिकायतें मिलने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) ने इस साइबर ठगी नेटवर्क को तोड़ने के लिए तुरंत कदम उठाए। अधिकारियों के अनुसार, Wingo ऐप यूजर्स को जल्दी पैसे कमाने का लालच देता था और चुपचाप उनके मोबाइल डिवाइस व निजी डेटा का दुरुपयोग करता था।
सर्वर, टेलीग्राम चैनल और यूट्यूब वीडियो ब्लॉक
कार्रवाई के तहत Wingo ऐप से जुड़े Command and Control सर्वर को जियो-ब्लॉक कर दिया गया। इसके अलावा, Wingo से जुड़े चार टेलीग्राम चैनल जिनके कुल यूजर करीब 1.53 लाख थे, ब्लॉक किए गए। साथ ही, इस ठगी से संबंधित 53 से ज्यादा यूट्यूब वीडियो भी हटाए गए हैं।
कैसे Wingo ऐप के जरिए की जा रही थी साइबर ठगी
अधिकारियों के मुताबिक, यह ऐप कम समय में ज्यादा कमाई और पक्के रिटर्न का वादा करता था। यूजर्स को छोटे टास्क पूरे करने या निवेश के नाम पर पैसे जमा करने के लिए कहा जाता था। इसके बाद या तो ऐप बंद हो जाता था या यूजर अकाउंट ब्लॉक कर दिए जाते थे।
भुगतान सुरक्षित बैंकिंग चैनलों की बजाय UPI या निजी वॉलेट के जरिए कराया जाता था, जिससे लेन-देन का पता लगाना मुश्किल हो जाता था। एप संपर्क सूची, गैलरी और लोकेशन जैसी संवेदनशील अनुमतियां भी मांगता था, जिससे निजी डेटा चोरी का गंभीर खतरा पैदा हो गया।
फर्जी कस्टमर केयर और पोंजी स्कीम का संकेत
ऐप में दिए गए कस्टमर केयर नंबर फर्जी पाए गए और पैसा गंवाने के बाद कोई मदद नहीं मिलती थी। कई मामलों में शिकायतें बढ़ने पर एप Google Play Store से गायब हो जाता था। यूज़र्स को दूसरों को जोड़ने पर अतिरिक्त कमाई का लालच भी दिया जाता था, जो एक रेफरल-आधारित पोंजी स्कीम की ओर इशारा करता है।
एंड्रॉयड यूजर्स खुद को कैसे रखें सुरक्षित
सरकार ने एंड्रॉयड यूजर्स को सलाह दी है कि वे गारंटीड या रोजाना मुनाफे का दावा करने वाले एप्स से बचें। किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी वैधता जांचें और कॉन्टैक्ट्स, गैलरी या SMS जैसी अनावश्यक अनुमतियां न दें। इसके अलावा, इनाम या कमाई के नाम पर पहले से पैसे न दें, अनजान UPI ID या QR कोड पर भुगतान न करें और कभी भी OTP या बैंक डिटेल साझा न करें।
ठगी का शिकार होने पर तुरंत करें शिकायत
सरकार ने संदिग्ध ऐप्स को तुरंत अनइंस्टॉल करने और साइबर फ्रॉड से निपटने के लिए बने केंद्र के पोर्टल पर रिपोर्ट करने की अपील की है। पीड़ितों को सलाह दी गई है कि वे तुरंत 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर कॉल करें, शिकायत दर्ज कराएं और अपने बैंक या UPI ऐप के जरिए लेन-देन ब्लॉक कराएं।