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Indian Amry के जवान अब हवा में उड़ेंगे, सेना के बेड़े में शामिल होंगे हाइटेक रोबोट-ड्रोन्स

  • Authored by: अंशुमन साकल्ले
  • Updated Jan 25, 2023, 09:40 PM IST

इंडियन आर्मी अपने जवानों के लिए ना सिर्फ जेटपैक सूट्स लाने वाली है, बल्कि रोबोड से लेकर टेदर्ड ड्रोन्स भी अब सेना हा हिस्सा बनने वाले हैं. मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस ने इन सबके पूर्ती के लिए कमर्शियल बिड जारी की है.

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आर्मी को जो जेटपैक सूट चाहिए उनकी संख्या 44 है और इन्हें स्पेशल ऑपरेशन पर इस्तेमाल किया जाएगा.

KEY HIGHLIGHTS
  • असमान में उडेंगे आर्मी के जवान
  • रोबोड की आंखों से दिखेगा दुश्मन
  • टेदर्ड ड्रोन्स भी इस्तेमाल में आएंगे

Jetpack Suites, Robots And Tethered Drones For Indian Army: मिनस्ट्रि ऑफ डिफेंस ने 24 जनवरी 2023 को इंडियन आर्मी द्वारा हिमालयन रेंज में निगरानी के लिए रोबोट्स, जेटपैक और टेदर्ड ड्रोन्स की कमर्शियल बिड जारी की है. आर्मी को 100 रोबोटिक म्यूल्स की जरूरत है जिसके लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल दिया गया है. ये खरीद की प्रक्रिया का दूसरा चरण है और कमर्शियल के साथ टेक्निकल बिड के लिए इशू किया गया है. आर्मी चार पैर वाले ऐसे रोबोट बेड़े में शामिल करना चाह रही है जो खुद काम कर सके, किसी भी राह पर जा सके और खुस दुरुस्त होने के साथ परेशानियों से बच सके.

रोबोट में होनी चाहिए ये खासियत

इन सबके अलावा रोबोड का कद 1 मीटर हो, इसका भार 60 किग्रा से ज्यादा ना हो और 10 किग्रा भार के साथ 10,000 फीट से ज्यादा एल्टिट्यूड पर भी ये काम कर सके. फिलहाल सीमा से सटी कुछ आर्मी पोस्ट पर सामान और राशन पहुंचाने के लिए इन म्यूल्स का इस्तेमाल किया जा रहा है. ये रोबोट खुद ही सारे काम कर ले और तय रास्ते पर 3 घंटे से ज्यादा तक सफर कर सके.

प्लेन के साथ उड़ेंगे आर्मी के जवान!

इंडियन आर्मी को रोबोट्स के अलावा आधुनिक तकनीक के जेटपैक सूट्स की भी जरूरत है. इसके साथ एक इंजन लगा होता है और किसी बैगपैक की तरह ये पहने जाते हैं. इसे पहनने के बबाद जवान किसी भी जगह पर उड़ सकते हैं. आर्मी को जो जेटपैक सूट चाहिए उनकी संख्या 44 है और इन्हें स्पेशल ऑपरेशन पर इस्तेमाल किया जाएगा. इसका भार 40 किग्रा से ज्यादा ना हो और 80 किग्रा के जवान को लेकर उड़ान भर सके. इसकी अधिकतम रफ्तार 50 किमी/घंटा से कम ना हो.

खास किस्म के ड्रोन्स भी चाहिए

इंडियन आर्मी को टेदर्ड ड्रोन्स की भी जरूरत है, ये एक खास किस्म का ड्रोन होता है जो जमीन से एक केबल के जरिए जुड़ा हुआ होता है. इसका इस्तेमाल डेटा डाउनलोड करने और कमांड देने में किया जाता है. आर्मी को जो ड्रोन चाहिए उसका भार करीब 15 किग्रा होना चाहिए, 60 मीटर तक केबल से जुड़ा रहकर ये काम करे और 6 घंटे तक उड़ता रहे. इस ड्रोन में 5 किमी दूर से आ रही गाड़ी और 2 किमी दूर से आ रहे इंसान की पहचान कर ले.

अंशुमन साकल्ले
अंशुमन साकल्लेauthor

अंशुमन साकल्ले जून 2022 से टाइम्स नाउ नवभारत (www.timesnowhindi.com/) में बतौर सीनियर स्पेशल करेस्पॉन्डेंट कार्यरत हैं। ये ईएमएमसी, दैनिक भास्कर, एनडीटीवी और जी न्यूज डिजिटल में काम करने के बाद संस्थान से जुड़े। इन्हें सभी मुख्य बीट्स पर काम करने का अनुभव है और ये 12 वर्ष से भी ज्यादा इसी पेशे में गुजार चुके हैं। एक्सपर्टीज की बात करें तो ऑटो और टेक से जुड़ी तमाम खबरों का जिम्मा यही संभाल रहे हैं। ऑन ग्राउंड रिपोर्ट हो या वीडियो या फिर गाड़ियों का रिव्यू, ये हमेशा अलग-अलग एंगल से खबरों को रोचक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। भोपाल के रहने वाले अंशुमन बड़े घुमक्कड़ हैं और ये देश की लगभग सभी प्रचलित जगहों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कर चुके हैं। एनडीटीवी से लेकर अब तक इन्होंने सिर्फ ऑटोमोबाइल जगत से जुड़ी खबरों पर ही काम किया है, हालांकि कोर बीट से इतर चुनाव, बजट या किसी भी बडे इवेंट पर इन्हें बड़ी और महत्वपूर्ण खबरों की जिम्मेदारी भी दी जाती है। इन सबके अलावा राजनीति में भी इन्हें खासी दिलचस्पी है, यही वजह है कि मध्यप्रदेश की पॉलिटिक्स को ये बहुत गहराई से जानते हैं।

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