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Google Doodle: Nowruz पर गूगल ने बनाया खास डूडल, पारसियों को नए साल की दी बधाई

Google Doodle: नवरोज के स्पेशल डूडल में फारसी संस्कृति के तत्वों जैसे फूलों के डिजाइन और हफ्ट-सिन टेबल को दिखाया गया है। इसे फारसी में "सिन" से शुरू होने वाली सात वस्तुओं के साथ सेट किया गया है, इसमें प्रत्येक वर्ष के लिए एक अवधारणा को दिखाया गया है।

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Google Doodle Today| Courtesy: Google/ Pendar Yousefi

Google Doodle Today: गूगल ने मंगलवार को एक खास डूडल के जरिए फारसी नववर्ष 'नवरोज' की बधाई दी है। फारसी में नवरोज (Nowruz) का अर्थ है "नया दिन" और यह उत्तरी गोलार्ध में वसंत की शुरुआत का प्रतीक है। नवरोज, पारसी लोगों का नववर्ष है. इसे फारसी नववर्ष भी कहा जाता है। इस खास डूडल (Doodle) को एक ईरानी गेस्ट आर्टिस्ट पेंडार यूसेफी द्वारा डिजाइन किया गया है। बता दें कि गूगल (Google) खास दिन और महान लोगों को याद करने के लिए डूडल बनाता है।

'नवरोज' पर खास डूडल

नवरोज के स्पेशल डूडल में फारसी संस्कृति के तत्वों जैसे फूलों के डिजाइन और हफ्ट-सिन टेबल को दिखाया गया है। इसे फारसी में "सिन" से शुरू होने वाली सात वस्तुओं के साथ सेट किया गया है, इसमें प्रत्येक वर्ष के लिए एक अवधारणा को दिखाया गया है।

3,000 साल पुराना है इतिहास

Google के अनुसार, नवरोज उत्सव लगभग 3,000 सालों से अधिक समय से चला आ रहा है। नवरोज की उत्पत्ति प्राचीन ईरान में खिलने के मौसम का स्वागत करने के लिए हुई थी। यह परंपरा रेशम मार्गों के साथ विभिन्न देशों और जातीय समूहों तक फैल गई। नवरोज के दौरान, परिवार कायाकल्प के प्रतीक वस्तुओं को प्रदर्शित करने के लिए इकट्ठा होते हैं, जैसे अच्छे भाग्य के लिए गेहूं, प्यार के लिए जैतून और स्वास्थ्य के लिए लहसुन।

साल में दो बार मनाया जाता है पारसी नववर्ष

दुनियाभर में पारसी नववर्ष साल में दो बार मनाया जाता है। पहला नववर्ष 21 मार्च को मनाया जाता है और दूसरा नववर्ष 16 अगस्त को मनाया जाता है। 16 अगस्त वाले नवरोज को जमशेदी नवरोज भी कहा जाता है। इस दिन राजा जमशेद नवरोज को याद किया जाता है। वहीं 21 मार्च वाले नवरोज को वसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

Vishal Maithil
Vishal Mathelauthor

विशाल मैथिल टाइम्स नाऊ नवभारत में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर 2023 से जुड़े हुए हैं। पत्रकारिता में 6+ वर्षों के अनुभव के साथ वह टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया, गैजेट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों पर गहरी समझ रखते हैं। वे ऑटोमोबाइल, बिजनेस, यूटिलिटी और हाइपरलोकल से लेकर एजुकेशन और इंटरनेशनल बीट्स पर भी काम कर चुके हैं। भोपाल से ताल्लुक रखने वाले विशाल ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से मीडिया रिसर्च में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। रिसर्च के क्षेत्र में उनके कई पेपर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने दैनिक भास्कर, अमर उजाला, मासिक पत्रिका "संदेश" और सोशल मीडिया फर्म में भी काम किया है। टेक-यूटिलिटी और बिजनेस से जुड़ी खबरों को आसान और काम की भाषा में समझाना विशाल को खूब आता है। वो कोशिश करते हैं कि कम शब्दों में ज्यादा और साफ-सुथरी जानकारी मिल जाए। किताबें पढ़ना और संगीत सुनना उनका पसंदीदा काम है। आप इनसे Vishal.mathel@timesgroup.com पर संपर्क कर सकते हैं।

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