टेक एंड गैजेट्स

1 रु. में देसी घी का ऑफर बना देगा कंगाल, फेसबुक पर दिख रहा विज्ञापन, सरकार ने किया अलर्ट

1 रुपये में 1 किलो देसी घी का विज्ञापन आजकल फेसबुक पर छाया हुआ है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इस घी के चक्कर में आपका बैंक अकाउंट खाली हो सकता है।

Image

क्रेडिट कार्ड फ्रॉड का बढ़ सकता है खतरा/Photo-Cyber Dost

अगर सोशल मीडिया पर आपको ₹1 में प्रीमियम देसी घी या किसी महंगे प्रोडक्ट का ऑफर दिखाई दे, तो बिना जांचे-परखे उस पर क्लिक करना भारी पड़ सकता है। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की पहल Cyber Dost ने लोगों को ऐसे फर्जी सोशल मीडिया विज्ञापनों से सावधान रहने की सलाह दी है। एजेंसी के अनुसार, साइबर ठग बड़े डिस्काउंट और सीमित समय के ऑफर का लालच देकर लोगों को धोखाधड़ी का शिकार बना रहे हैं।

Meta प्लेटफॉर्म पर चल रहे हैं फर्जी विज्ञापन

जारी की गई चेतावनी में बताया गया है कि Meta प्लेटफॉर्म (Facebook और Instagram) पर ₹1 में प्रीमियम प्रोडक्ट बेचने का दावा करने वाले कई फर्जी विज्ञापन देखे जा रहे हैं। इन विज्ञापनों में बेहद कम कीमत और भारी छूट दिखाकर यूजर्स को वेबसाइट पर ले जाया जाता है, जहां उनसे भुगतान या कार्ड से जुड़ी जानकारी मांगी जाती है।

क्रेडिट कार्ड फ्रॉड का बढ़ सकता है खतरा

Cyber Dost के मुताबिक, ऐसे विज्ञापनों का मुख्य उद्देश्य लोगों की क्रेडिट कार्ड या पेमेंट संबंधी जानकारी चुराना होता है। यूजर जैसे ही ऑफर का लाभ लेने के लिए अपनी कार्ड डिटेल दर्ज करता है, साइबर अपराधी उसका गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे अनधिकृत ट्रांजैक्शन, बैंक खाते से पैसे निकलने या अन्य वित्तीय नुकसान का खतरा बढ़ जाता है।

साइबर ठग ऐसे फंसाते हैं जाल में

ऑनलाइन ठगी करने वाले अक्सर "Limited Time Offer", "90% OFF", "₹1 में खरीदें" जैसे आकर्षक संदेशों का इस्तेमाल करते हैं। इसके साथ ही वेबसाइट को असली ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसा दिखाया जाता है, ताकि लोगों को शक न हो। कई मामलों में नकली वेबसाइट पर ऑर्डर करने के बाद न तो सामान मिलता है और न ही भुगतान वापस होता है।

खुद को ऐसे रखें सुरक्षित

किसी भी अविश्वसनीय या असामान्य रूप से सस्ते ऑफर पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए। किसी भी विज्ञापन पर क्लिक करने से पहले वेबसाइट का URL, विक्रेता की विश्वसनीयता और ग्राहक समीक्षाओं की जांच करें। साथ ही, अनजान वेबसाइटों पर अपने क्रेडिट या डेबिट कार्ड की जानकारी साझा करने से बचें। यदि कोई ऑफर सच होने से भी ज्यादा अच्छा लगे, तो उसके फर्जी होने की संभावना पर जरूर विचार करें।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

और पढ़ें
End of Article