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दिल्ली HC ने Google पर लगाया 30 लाख का जुर्माना, विज्ञापन में कीवर्ड्स का खेल पड़ा भारी, भारत में बदलेगा Keywords विज्ञापन का तरीका

Google पर Delhi High Court ने 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना Hindware के नाम का इस्तेमाल करके चलाए गए विज्ञापन को लेकर लगा है। कोर्ट के इस फैसले का भारत की टेक इंडस्ट्री से स्वागत किया है।

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Google पर दिल्ली HC ने लगाया 30 लाख का जुर्माना, टेक इंड्स्ट्री ने फैसले का स्वागत कहा- अब भारत में बदलेगा Keywords विज्ञापन का तरीका

Google अपने एकाधिकार का दुरुपयोग लंबे समय से करता आ रहा है। यूरोपियन यूनियन ने गूगल पर एकाधिकार के दुरुपयोग को लेकर कई बार जुर्माना भी लगाया है और गूगल ने जुर्माना भरा भी है, बावजूद इसके गूगल अपनी आदतों से बाज नहीं आता है। अब भारत में भी गूगल की यह चोरी पकड़ी गई है। गूगल पर दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने एक ट्रेडमार्क केस को लेकर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा गूगल पर लगा यह जुर्माना सिर्फ एक जुर्माना भर नहीं है, बल्कि भारत में गूगल के जरिए विज्ञापन चलाने का तरीका भी बदलने वाला है। आइए समझते हैं कि पूरा मामला क्या है और भारतीय बाजार में इसका क्या असर पड़ेगा?

Hindware ने गूगल पर किया था केस

यह पूरा मामला साल 2013 का है। साल 2013 में सैनिटरीवेयर ब्रांड Hindware ने पाया कि उसकी प्रतिद्वंद्वी कंपनियां Grohe India और Cera Sanitaryware ने Google Ads के जरिए "Hindware" शब्द को एक विज्ञापन कीवर्ड के रूप में खरीदा था। इसके चलते जब कोई व्यक्ति Google पर "Hindware" सर्च करता था, तो सबसे ऊपर इन प्रतिस्पर्धी कंपनियों के विज्ञापन दिखाई देते थे, जबकि कायदे से दिखना Hindware चाहिए था।

Hindware का आरोप था कि उसका ब्रांड नाम एक पंजीकृत और प्रसिद्ध ट्रेडमार्क है, जिसका उपयोग उसकी अनुमति के बिना किया जा रहा है। बाद में Cera और Grohe के साथ समझौता हो गया, लेकिन Google इंडिया और Google LLC के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रही। अब इस केस में गूगल की हार हुई है और उसके ऊपर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगा है।

क्या होता है Keyword एडवरटाइजिंग?

Google अपने विज्ञापन प्लेटफॉर्म Google Ads के जरिए अपने सर्च प्लेटफॉर्म पर किसी खास कीवर्ड यानी शब्दों या वाक्यांशों को लेकर विज्ञापन जारी करने की सुविधा देता है। इन्हें "कीवर्ड" कहा जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Google Ads को Google AdWords भी कहा जाता है। जब कोई यूजर उन शब्दों को सर्च करता है, तो संबंधित विज्ञापन सर्च परिणामों में दिखाई देते हैं। इसे एक उदाहरण से समझें तो यदि कोई कंपनी किसी प्रसिद्ध ब्रांड का नाम कीवर्ड के रूप में खरीद ले (अपने नाम की बजाय अपने प्रतिद्वंदी कंपनी के नाम या कीवर्ड का इस्तेमाल करे) तो उस ब्रांड को खोजने वाले यूजर को प्रतिस्पर्धी कंपनी का विज्ञापन दिखाया जा सकता है।

Delhi HC imposes 30 lakh fine on Google

Delhi HC imposes 30 lakh fine on Google

Hindware ने क्यों जताई आपत्ति?

Hindware का कहना था कि यदि कोई यूजर "Hindware" सर्च कर रहा है, तो वह स्पष्ट रूप से उसी कंपनी के प्रोडक्ट को सर्च कर रहा है। ऐसे में किसी दूसरी कंपनी का विज्ञापन सबसे ऊपर दिखना उपभोक्ताओं में भ्रम पैदा कर सकता है और संभावित ग्राहक उसके (Hindware) के बजाय प्रतिस्पर्धी ब्रांड के प्रोडक्ट की ओर जा सकता है। कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि ट्रेडमार्क का विज्ञापन के लिए उपयोग करना भारतीय ट्रेडमार्क कानून के तहत उल्लंघन की श्रेणी में आता है।

Google ने क्या दी सफाई?

Google ने अदालत में कहा कि कीवर्ड केवल बैकएंड सिस्टम में उपयोग होते हैं और इन्हें यूजर सीधे नहीं देख सकता। इसलिए इसे ट्रेडमार्क का "उपयोग" नहीं माना जाना चाहिए। कंपनी ने यह भी कहा कि प्रायोजित (Sponsored) विज्ञापनों के साथ "Ad" का लेबल लगाया जाता है, जिससे यूजर उन्हें सामान्य सर्च परिणामों से अलग पहचान सकते हैं। Google का तर्क था कि इससे भ्रम की संभावना कम हो जाती है।

अदालत ने Google के खिलाफ क्या कहा?

दिल्ली हाईकोर्ट ने Hindware के पक्ष में फैसला सुनाते हुए Google को "Hindware" और उससे जुड़े शब्दों को विज्ञापन कीवर्ड के रूप में इस्तेमाल करने से रोक दिया। अदालत ने कहा कि Google ट्रेडमार्क मालिक द्वारा वर्षों में बनाई गई ब्रांड पहचान और प्रतिष्ठा का व्यावसायिक लाभ उठा रहा था। अदालत ने टिप्पणी की कि Google प्रतिद्वंद्वी कंपनियों को ट्रेडमार्क नीलाम कर उससे कमाई कर रहा है, जबकि उस ट्रेडमार्क पर उसका कोई स्वामित्व नहीं है। इसे अदालत ने "फ्री-राइडिंग" करार दिया।

क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

यह फैसला केवल Hindware और Google तक सीमित नहीं है। इससे भारत में ऑनलाइन विज्ञापन और ट्रेडमार्क विवादों पर दूरगामी असर पड़ सकता है। भविष्य में कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धी ब्रांडों के नामों का उपयोग करके ऑनलाइन विज्ञापन चलाना अधिक कठिन हो सकता है।

साथ ही, यह निर्णय डिजिटल विज्ञापन उद्योग और ट्रेडमार्क अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर नई बहस को भी जन्म दे सकता है, हालांकि Google ने कहा है कि वह स्थानीय कानूनों का सम्मान करता है और कानूनी प्रक्रिया के तहत अपने पक्ष को आगे रखेगा। कंपनी का कहना है कि उसकी नीति पहले से ही विज्ञापन के टेक्स्ट में दूसरे ब्रांड के ट्रेडमार्क के उपयोग की अनुमति नहीं देती, लेकिन कीवर्ड बिडिंग को वह वैध मानती है।

आगे क्या हो सकता है?

यह फैसला भारत में ऑनलाइन विज्ञापन के नियमों को प्रभावित कर सकता है। यदि यह निर्णय आगे की अदालतों में भी कायम रहता है, तो Google और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपनी विज्ञापन नीतियों में बदलाव करना पड़ सकता है, जिससे ट्रेडमार्क धारकों को अधिक सुरक्षा मिल सकेगी।

टेक इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया

कोर्ट के फैसले के बाद जोहो (Zoho) के संस्थापक श्रीधर वेम्बू (Sridhar Vembu) ने जेरोधा के सीईओ नितिन कामथ के एक एक्स पोस्ट का समर्थन किया और आरोप लगाया कि Google अपने विज्ञापन व्यवसाय के माध्यम से "पूरी तरह अनैतिक" प्रथाओं का पालन कर रहा था।

वेम्बु ने X पर लिखा, "मैं इस मामले में नितिन के साथ हूं। गूगल जो कर रहा था, वह पूरी तरह अनैतिक था और मुझे खुशी है कि भारत में इसे अवैध पाया गया है। इन संदिग्ध व्यावसायिक प्रथाओं के लिए उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।"

नितिन कामथ ने क्या कहा?

नितिन कामथ ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है और कहा कि यह तरीका बड़ी और छोटी, दोनों तरह की कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती रही है। आज भी, अगर आप Zerodha खोजते हैं, तो आपको प्रतिस्पर्धियों के सर्च रिजल्ट दिखाई देंगे। ऐसा एक दशक से भी ज्यादा समय से हो रहा है, हालांकि इसे मापना मुश्किल है, लेकिन इसकी वजह से हमें काफी बिजनेस का नुकसान हुआ है। सोचिए क्या होता है। जब भी कोई "Zerodha" खोजता है, तो ट्रैफिक सही तौर पर Zerodha के पास आना चाहिए, लेकिन अक्सर होता यह है कि Google Search पर शुरुआती कुछ रिजल्ट विज्ञापन होते हैं, जो ग्राहक को किसी प्रतिस्पर्धी की वेबसाइट पर ले जाते हैं। इस प्रक्रिया में, हम वह बिजनेस खो देते हैं जो हमारे पास आना चाहिए था। यह बात और भी बुरी हो जाती है क्योंकि हम विज्ञापन नहीं देते हैं।

अनुपम मित्तल ने भी किया फैसला का स्वागत

Shaadi.com के फाउंडर और शार्क टैंक इंडिया (Shark Tank India) के जज अनुपम मित्तल ने Hindware ट्रेडमार्क विवाद में Google के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट के हालिया फैसले पर अपनी राय दी है। उन्होंने इसे इस हफ्ते भारत में हुई सबसे बड़ी कारोबारी घटनाओं में से एक बताया और कहा कि इससे डिजिटल विज्ञापन के अर्थशास्त्र में काफी बदलाव आ सकता है। LinkedIn पर एक पोस्ट में मित्तल ने कहा, "इस हफ्ते भारत की सबसे बड़ी कारोबारी खबर दिल्ली हाई कोर्ट से आई है।"

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेय author

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिय... और देखें

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