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चीन का अमेरिका और इजरायल पर 'टेक स्ट्राइक, दर्जनभर कंपनियों पर लगाया बैन!

चीनी अधिकारियों ने देश की कंपनियों को लगभग एक दर्जन विदेशी साइबर सिक्योरिटी कंपनियों के प्रोडक्ट का इस्तेमाल बंद करने का निर्देश दिया है। चीन को डर है कि विदेशी साइबर सुरक्षा सॉफ्टवेयर के जरिए गोपनीय जानकारी दूसरे देशों तक पहुंच सकती है, हालांकि इन स्रोतों की पहचान उजागर नहीं की गई है क्योंकि मामला संवेदनशील बताया जा रहा है।

China's tech strike A dozen US and Israeli companies have been banned

China's tech strike A dozen US and Israeli companies have been banned

चीन ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए अमेरिका और इजराइल की कई प्रमुख साइबर सुरक्षा कंपनियों के सॉफ्टवेयर पर रोक लगा दी है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी अधिकारियों ने देश की कंपनियों को लगभग एक दर्जन विदेशी साइबर सुरक्षा प्रदाताओं के उत्पादों का इस्तेमाल बंद करने का निर्देश दिया है।

अमेरिकी और इजराइली कंपनियां निशाने पर

इस प्रतिबंध में ब्रॉडकॉम के स्वामित्व वाली VMware, Palo Alto Networks और Fortinet जैसी अमेरिकी कंपनियां शामिल हैं। इसके अलावा इजराइल की Check Point Software Technologies का नाम भी इस सूची में बताया गया है। अधिकारियों को आशंका है कि इन कंपनियों का सॉफ्टवेयर संवेदनशील डेटा इकट्ठा कर उसे विदेशों में भेज सकता है।

क्यों बढ़ी चीन की चिंता

रिपोर्ट में मामले से जुड़े लोगों के हवाले से कहा गया है कि चीन को डर है कि विदेशी साइबर सुरक्षा सॉफ्टवेयर के जरिए गोपनीय जानकारी दूसरे देशों तक पहुंच सकती है, हालांकि इन स्रोतों की पहचान उजागर नहीं की गई है क्योंकि मामला संवेदनशील बताया जा रहा है।

सरकारी एजेंसियों और कंपनियों की चुप्पी

इस मुद्दे पर चीन की इंटरनेट निगरानी संस्था साइबरस्पेस एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ चाइना और उद्योग एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वहीं जिन विदेशी कंपनियों का नाम रिपोर्ट में आया है, उन्होंने भी रॉयटर्स के सवालों का जवाब नहीं दिया।

पश्चिमी तकनीक से दूरी की रणनीति

अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तकनीकी तनाव के बीच बीजिंग लंबे समय से पश्चिमी तकनीक के विकल्प के रूप में घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है। सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अलावा कंप्यूटर और वर्ड-प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर तक में चीनी विकल्पों को अपनाने पर ज़ोर दिया जा रहा है।

एनवीडिया चिप्स पर भी सख्ती

हाल के समय में चीन ने अमेरिकी चिप निर्माता एनवीडिया को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी सरकार ने कंपनियों से कहा है कि वे एनवीडिया के H200 AI चिप्स केवल “विशेष परिस्थितियों” में ही खरीदें, जैसे विश्वविद्यालयों में शोध के लिए। इससे साफ है कि चीन अभी भी अमेरिकी तकनीक को लेकर सतर्क बना हुआ है।

आगे क्या होगा?

बताया जा रहा है कि सरकार आगे और कंपनियों के साथ बैठक कर दिशा-निर्देश स्पष्ट कर सकती है, लेकिन यह अभी तय नहीं है कि इन बैठकों में नियमों को लेकर कोई ठोस स्पष्टता दी जाएगी या नहीं। फिलहाल, यह कदम चीन की उस नीति को दर्शाता है, जिसमें वह तकनीकी आत्मनिर्भरता और डेटा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।

Pradeep Pandey
Pradeep Pandey author

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिय... और देखें

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