बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर लगेगा बैन! उम्र सीमा तय करने की तैयारी, सरकार को मिले अहम सुझाव
- Edited by: आलोक कुमार
- Updated Jan 29, 2026, 08:58 PM IST
आर्थिक समीक्षा 2025-26 ने डिजिटल लत को एक बढ़ती हुई समस्या के रूप में पहचाना है, जो युवाओं और वयस्कों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। समीक्षा में परिवारों को शिक्षित करने और उन्हें मोबाइल का इस्तेमाल करने की समयसीमा तय करने और साझा ऑफलाइन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर लगेगा बैन!
Economic Survey 2026: आप पेश हुए इकोनॉमिक सर्वे में बच्चों और किशोरों में बढ़ती सोशल मीडिया की लत पर चिंता जताई गई है। इसके साथ ही बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के वैश्विक संकेतों का हवाला देते हुए सरकार की आर्थिक समीक्षा में गुरुवार को कहा गया कि ऑनलाइन मंच का इस्तेमाल करने के लिए उम्र आधारित सीमा पर विचार किया जाना चाहिए। साथ ही, डिजिटल लत से बचने के लिए ऑनलाइन शिक्षण में भी कटौती की जानी चाहिए। संसद में पेश की गई समीक्षा में कहा गया कि बच्चों की डिजिटल आदतों को सुधारने में स्कूलों की भूमिका महत्वपूर्ण है। बच्चों को हानिकारक सामग्री से बचाने के लिए शैक्षिक सामग्री तक पहुंच को सरल उपकरणों (जैसे साधारण फोन या टैबलेट) को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
उम्र के अनुसार इस्तेमाल की मिले अनुमति
समीक्षा के अनुसार, ‘‘उम्र आधारित पहुंच सीमा को लेकर नीतियों पर विचार किया जा सकता है, क्योंकि कम उम्र के उपयोगकर्ता अनिवार्य उपयोग और हानिकारक सामग्री के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। मंच को उम्र के सत्यापन और उम्र के अनुरूप डिफॉल्ट सेटिंग लागू करने के लिए जिम्मेदार बनाया जाना चाहिए। यह विशेष रूप से सोशल मीडिया, जुए वाले ऐप, 'ऑटो-प्ले' फीचर्स और लक्षित विज्ञापनों के लिए अनिवार्य होना चाहिए।''
स्कूलों को उठाने होंगे ये कदम
समीक्षा में सुझाव दिया गया कि बढ़ती डिजिटल लत की समस्या से निपटने के लिए सुरक्षित उपकरणों को बढ़ावा दिया जाए। इसमें कहा गया, ‘‘स्कूलों को 'डिजिटल आरोग्य पाठ्यक्रम' शुरू करना चाहिए, जिसमें स्क्रीन समय को लेकर जागरूकता, साइबर सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता शामिल हो। कोविड-19 के दौरान शुरू हुए ऑनलाइन शिक्षण उपकरणों पर निर्भरता को कम किया जाना चाहिए और ऑफलाइन शिक्षण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।''
आर्थिक समीक्षा 2025-26 ने डिजिटल लत को एक बढ़ती हुई समस्या के रूप में पहचाना है, जो युवाओं और वयस्कों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। समीक्षा में परिवारों को शिक्षित करने और उन्हें मोबाइल का इस्तेमाल करने की समयसीमा तय करने और साझा ऑफलाइन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इसमें स्कूलों और सामुदायिक केंद्रों के माध्यम से अभिभावकों के लिए कार्यशालाएं आयोजित करने का आह्वान किया गया है, ताकि वे स्वस्थ सीमाएं निर्धारित करने, लत के लक्षणों को पहचानने और 'पैरेंटल कंट्रोल' टूल्स का प्रभावी ढंग से उपयोग करने का प्रशिक्षण ले सकें।