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लिवर की बीमारी का पता लगा सकता है AI, जानें क्या होगा फायदा

AI can detect liver disease: अमेरिका के वाशिंगटन विश्वविद्यालय की प्रमुख लेखिका एरियाना स्टुअर्ट ने कहा, ''बड़ी संख्या में मरीजों को मेटाबॉलिक-एसोसिएटेड स्टेटोटिक लिवर रोग (एमएएसएलडी) का समय रहते पता नहीं चल पाता। यह बेहद ही चिंताजनक है क्योंकि प्रारंभिक निदान में देरी से लिवर रोग को खतरा बना रहता है।

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AI can detect liver disease (Representative image)

AI can detect liver disease: एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड का उपयोग करके प्रारंभिक चरण के मेटाबॉलिक-एसोसिएटेड स्टेटोटिक लिवर रोग (एमएएसएलडी) का सटीक तरीके से पता लगा सकता है। मेटाबॉलिक-एसोसिएटेड स्टेटोटिक लिवर रोग (एमएएसएलडी) दुनिया की सबसे आम क्रॉनिक लिवर की बीमारी है। यह रोग लिवर में वसा के ठीक से नहीं जमने से होता है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं देखने को मिलती है। इस बीमारी के मामले पिछले कुछ सालों में तेजी से सामने आ रहे हैं।

AI से मिलेगी बीमारी की पहचान करने में मदद

यह अक्सर मोटापे, टाइप 2 डायबिटीज और असामान्य कोलेस्ट्रॉल के स्तर जैसी अन्य सामान्य बीमारियों से भी जुड़ा होता है। यह स्थिति तेजी से लीवर रोग के अधिक गंभीर रूपों में विकसित हो सकती है, इसलिए शुरू में ही इसका पता लगाना जरूरी है। हालांकि, अक्सर इसका पता अंतिम चरण तक नहीं चल पाता क्योंकि प्रारंभिक चरण में इस बीमारी के कोई लक्षण सामने नहीं आते, जिससे इसका पता लगाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

एमएएसएलडी की होगी पहचान

अमेरिका के वाशिंगटन विश्वविद्यालय की प्रमुख लेखिका एरियाना स्टुअर्ट ने कहा, ''बड़ी संख्या में मरीजों को मेटाबॉलिक-एसोसिएटेड स्टेटोटिक लिवर रोग (एमएएसएलडी) का समय रहते पता नहीं चल पाता। यह बेहद ही चिंताजनक है क्योंकि प्रारंभिक निदान में देरी से लिवर रोग को खतरा बना रहता है। टीम ने अमेरिका में तीन साइटों से इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड में इमेजिंग निष्कर्षों का विश्लेषण करने के लिए एआई एल्गोरिदम का उपयोग किया। इसमें 834 मरीजों में वसा लिवर रोग के लक्षण पाए गए, लेकिन रिकॉर्ड में केवल 137 मरीजों का ही डेटा शामिल था।

बीमारी का पता करने में एआई का होगा इस्तेमाल

इसमें से 83 प्रतिशत लोगों में बीमारी का पता नहीं चल पाया, जबकि सभी में इस बीमारी के लक्षण थे। शोध को लिवर मीटिंग में प्रस्तुत किया जाएगा, जिसे अमेरिकन एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ लिवर डिजीज द्वारा आयोजित किया जाएगा। पिछले अध्ययनों से पता चला है कि एआई का उपयोग लिवर फाइब्रोसिस का पता लगाने और नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर रोग (एनएएफएलडी) का निदान करने के लिए किया जा सकता है। यह फोकल लिवर घावों को अलग करने, हेपैटोसेलुलर कैंसर का निदान करने, क्रोनिक लिवर रोग (सीएलडी) का पूर्वानुमान लगाने और प्रत्यारोपण विज्ञान को सुविधाजनक बनाने में भी मदद कर सकता है।

इनपुट- आईएएनएस

Vishal Maithil
Vishal Mathelauthor

विशाल मैथिल टाइम्स नाऊ नवभारत में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर 2023 से जुड़े हुए हैं। पत्रकारिता में 6+ वर्षों के अनुभव के साथ वह टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया, गैजेट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों पर गहरी समझ रखते हैं। वे ऑटोमोबाइल, बिजनेस, यूटिलिटी और हाइपरलोकल से लेकर एजुकेशन और इंटरनेशनल बीट्स पर भी काम कर चुके हैं। भोपाल से ताल्लुक रखने वाले विशाल ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से मीडिया रिसर्च में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। रिसर्च के क्षेत्र में उनके कई पेपर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने दैनिक भास्कर, अमर उजाला, मासिक पत्रिका "संदेश" और सोशल मीडिया फर्म में भी काम किया है। टेक-यूटिलिटी और बिजनेस से जुड़ी खबरों को आसान और काम की भाषा में समझाना विशाल को खूब आता है। वो कोशिश करते हैं कि कम शब्दों में ज्यादा और साफ-सुथरी जानकारी मिल जाए। किताबें पढ़ना और संगीत सुनना उनका पसंदीदा काम है। आप इनसे Vishal.mathel@timesgroup.com पर संपर्क कर सकते हैं।

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