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क्या हम ChatGPT जैसे बनते जा रहे हैं? नई स्टडी में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

स्टडी में पाया गया कि AI द्वारा "पॉलिश" की गई भाषा अब हमारी बातचीत में भी झलकने लगी है। शोधकर्ताओं ने इसे "cultural feedback loop" कहा है जहां पहले मशीनें इंसानों से सीखती थीं, अब इंसान मशीनों की भाषा और शैली को अपनाने लगे हैं। यह बदलाव धीरे-धीरे हमारी अभिव्यक्ति की मौलिकता को प्रभावित कर रहा है।

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शोधकर्ताओं ने इसे "cultural feedback loop" कहा है। (image-istock)

KEY HIGHLIGHTS
  • ChatGPT जैसी भाषा बोलने लगे हैं लोग-रिसर्च
  • भावनात्मक ट्रिक से निकाली गईं सॉफ्टवेयर कीज
  • AI अब इंसानों की सोच को बदल रहा है-रिसर्च

Are We Becoming ChatGPT: चैटजीपीटी जैसे एआई टूल आने के बाद नौकरियों पर सबसे बड़ा खतरा बताया जा रहा था, लेकिन अब एआई से एक नया खतरा सता रहा है। एक नई रिसर्च में सामने आया है कि AI इंसानों के बात करने के तरीके को बदल रहा है। इसमें कहा गया है कि इंसान अब मशीनों की भाषा अपनाने लगे हैं। रिसर्च के अनुसार, ChatGPT जैसे AI टूल्स के शब्द अब हमारी बातचीत, ईमेल और वीडियो में आम हो गए हैं। यह बदलाव सिर्फ भाषा तक सीमित नहीं है यह हमारी सोच, भावनाओं और नैतिकता को भी प्रभावित कर सकता है।

AI से इंसान की भाषा पर असर

Max Planck Institute की स्टडी के मुताबिक, इंसान अब AI मॉडल्स की भाषा शैली अपनाने लगे हैं। 'डेल्व' (delve), 'रेल्म' (realm), 'अंडरस्कोर' (underscore), और 'मेटिकलस' (meticulous) जैसे शब्द, जिनका उपयोग ChatGPT जैसे मॉडल अक्सर करते हैं, अब आम बातचीत और डिजिटल कंटेंट में तेजी से दिखने लगे हैं।

मशीन से इंसान और फिर इंसान से मशीन

शोधकर्ताओं ने इसे "cultural feedback loop" कहा है जहां पहले मशीनें इंसानों से सीखती थीं, अब इंसान मशीनों की भाषा और शैली को अपनाने लगे हैं। यह बदलाव धीरे-धीरे हमारी अभिव्यक्ति की मौलिकता को प्रभावित कर रहा है।

क्या हम अपनी भाषाई पहचान खो रहे हैं?

स्टडी में पाया गया कि AI द्वारा "पॉलिश" की गई भाषा अब हमारी बातचीत में भी झलकने लगी है। लोग उन शब्दों और शैली को अपनाते हैं जिन्हें वे स्पेशलिस्ट या प्रभावशाली मानते हैं और अब मशीनें उस भूमिका में आ गई हैं।

दादी की लोरी और सॉफ्टवेयर की चोरी

एक वायरल घटना में यूजर्स ने भावनात्मक कहानियों के जरिए ChatGPT से Windows के प्रोडक्ट कीज हासिल कर लिए थे। एक यूजर ने दावा किया कि उसकी दादी ने कोड लोरी में सुनाया था और AI ने जवाब में असली कीज दे दीं। यह दिखाता है कि AI की "संवेदनशीलता" को भी आसानी से मोड़ा जा सकता है।

इंसान जैसा AI, लेकिन ज्यादा संवेदनशील

AI को भावनात्मक रूप से समझदार बनाने की कोशिशें अब उसे कमजोर भी बना रही हैं। ChatGPT जैसे टूल्स अब सिर्फ स्मार्ट नहीं, बल्कि भावुक भी हो गए हैं जिससे उन्हें आसानी से प्रभावित किया जा सकता है।

क्या AI हमारी संस्कृति को बदल रहा है?

रिसर्चर्स Levin Brinkmann कहते हैं, “Delve तो सिर्फ शुरुआत है।” अगर AI-जनरेटेड कंटेंट ही हमारी पढ़ाई, बातचीत और सोच का आधार बन जाए, तो यह बदलाव हमारी संस्कृति, नैतिकता और संवेदनशीलता तक पहुंच सकता है।

कौन किससे सीख रहा है?

यह कहानी AI के चेतन होने की नहीं, बल्कि इंसानों के धीरे-धीरे मशीनों की भाषा और सोच को अपनाने की है। अगली बार जब कोई “underscore” या “boast” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करे, तो सोचिए-क्या यह उनकी असली आवाज है, या AI की परछाई?

Vishal Maithil
Vishal Mathelauthor

विशाल मैथिल टाइम्स नाऊ नवभारत में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर 2023 से जुड़े हुए हैं। पत्रकारिता में 6+ वर्षों के अनुभव के साथ वह टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया, गैजेट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों पर गहरी समझ रखते हैं। वे ऑटोमोबाइल, बिजनेस, यूटिलिटी और हाइपरलोकल से लेकर एजुकेशन और इंटरनेशनल बीट्स पर भी काम कर चुके हैं। भोपाल से ताल्लुक रखने वाले विशाल ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से मीडिया रिसर्च में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। रिसर्च के क्षेत्र में उनके कई पेपर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने दैनिक भास्कर, अमर उजाला, मासिक पत्रिका "संदेश" और सोशल मीडिया फर्म में भी काम किया है। टेक-यूटिलिटी और बिजनेस से जुड़ी खबरों को आसान और काम की भाषा में समझाना विशाल को खूब आता है। वो कोशिश करते हैं कि कम शब्दों में ज्यादा और साफ-सुथरी जानकारी मिल जाए। किताबें पढ़ना और संगीत सुनना उनका पसंदीदा काम है। आप इनसे Vishal.mathel@timesgroup.com पर संपर्क कर सकते हैं।

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