कई बार किसी इंसान की पहचान सिर्फ उसके काम से नहीं, बल्कि उसके पहनावे से भी बन जाती है। महात्मा गांधी की धोती, भगत सिंह की टोपी और डॉ. भीमराव आंबेडकर का सूट आज भी उन्हें याद दिलाते हैं। इसी तरह लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुणेरी पगड़ी (Puneri Pagdi) भी उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गई थी। यह सिर्फ सिर पर बांधा जाने वाला कपड़ा नहीं था, बल्कि सम्मान, आत्मविश्वास और भारतीय संस्कृति का प्रतीक माना जाता था।
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खास बात यह है कि आज जब ट्रेडिशनल फैशन फिर से लोकप्रिय हो रहा है, तब पुणेरी पगड़ी भी शादी, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और खास अवसरों पर नए अंदाज में नजर आने लगी है। अगर आपने कभी सोचा है कि तिलक जी की पगड़ी इतनी अलग क्यों दिखती थी और आज के समय में इसे कैसे स्टाइल किया जा सकता है।

Bal Gangadhar Tilak Puneri Pagdi
क्या होती है पुणेरी पगड़ी?
बाल गंगाधर तिलक अक्सर ही लाल रंग की पुणेरी पगड़ी या टोपी पहना करते थे। पुणेरी पगड़ी महाराष्ट्र के पुणे क्षेत्र की पारंपरिक पगड़ी है। इसका शेप सामान्य पगड़ियों से थोड़ा अलग होता है। यह आगे से सधी हुई, ऊपर से सपाट और किनारों से साफ-सुथरी दिखाई देती है। इसे गरिमा और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है। पहले इसे समाज के सम्मानित लोग, विद्वान और सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्ति पहनते थे।
सिर्फ फैशन नहीं, सम्मान का प्रतीक भी
पुणेरी पगड़ी पहनना केवल सजने-संवरने का तरीका नहीं था। महाराष्ट्र में इसे सम्मान और प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता है। आज भी कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों, सम्मान समारोहों और पारंपरिक आयोजनों में मेहमानों को पुणेरी पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया जाता है।
आज के समय में कैसे करें स्टाइल?
अगर आप किसी शादी, सांस्कृतिक समारोह, गणेश उत्सव या पारंपरिक कार्यक्रम में अलग दिखना चाहते हैं, तो पुणेरी पगड़ी बेहतरीन विकल्प हो सकती है।
- सफेद या ऑफ-व्हाइट कुर्ता-पायजामा के साथ पहनें।
- नेहरू जैकेट जोड़कर रॉयल लुक दें।
- कोल्हापुरी चप्पल या मोजड़ी के साथ पूरा लुक संतुलित रखें।
- ज्यादा एक्सेसरी पहनने की बजाय पगड़ी को ही आकर्षण का केंद्र बनने दें।
- महिलाएं भी अपना सकती हैं यह स्टाइल
आज कई सांस्कृतिक आयोजनों, फोटोशूट और थीम वेडिंग में महिलाएं भी पुणेरी पगड़ी पहनती नजर आती हैं। साड़ी, नौवारी साड़ी या इंडो-वेस्टर्न आउटफिट के साथ इसे स्टाइल करके एक अलग और आत्मविश्वास से भरा लुक बनाया जा सकता है।
बाल गंगाधर तिलक की पुणेरी पगड़ी एक साधारण हेडगियर नहीं थी, बल्कि उनकी सोच, स्वाभिमान और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक थी। आज जब लोग अपनी जड़ों से जुड़ते हुए फैशन को अपनाना चाहते हैं, तब यह पारंपरिक पगड़ी फिर से खास बनती दिखाई देती है। इतिहास और स्टाइल का ऐसा सुंदर मेल बहुत कम देखने को मिलता है।
