Olympics 2024 Rewind: फ्रांस की राजधानी पेरिस में 26 जुलाई से 11 अगस्त के बीच आयोजित ओलंपिक खेलों में 110 भारतीय खिलाड़ियों ने 16 खेलों में भाग लिया था। भारतीय दल एक सिल्वर और पांच कांस्य सहित कुल 6 पदक जीतने में सफल रहा। भारत पेरिस ओलंपिक की पदक तालिका में 71वें पायदान पर रहा। कई भारतीय खिलाड़ी पदक के करीब पहुंचे लेकिन पोडियम पर चढ़ने में नाकाम रहे। पेरिस ओलंपिक कई मायनों में यादगार रहा।
एक ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय
युवा शूटर मनु भाकर एक ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में महिला एकल का कांस्य पदक अपने नाम किया। इसके बाद सरबजोत सिंह के साथ 10 मीटर एयर पिस्टल की मिक्स्ड डबल्स स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। उनसे पहले और कोई भारतीय एक ओलंपिक खेलों में दो पदक नहीं जीत सका था।
स्वप्निल कुसाले ने जीता कांसा
भारत के युवा शूटर स्वप्निल कुसाले ने पुरुषों की 50 मीटर थ्री पोजीशन स्पर्धा में कांस्य पदक अपने नाम किया। उनके पदक ने भारत की पेरिस ओलंपिक में शूटिंग स्पर्धा में पदकों की संख्या को तीन तक पहुंचा दिया।
नीरज बने लगातार दो पदक जीतने वाले पहले एथलीट
टोक्यो ओलंपिक में पुरुषों की जैवलिन थ्रो स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतने वाले एथलीट नीरज चोपड़ा पेरिस में सिल्वर मेडल अपने नाम करने में सफल रहे। पाकिस्तान के अरशद नदीम ने नीरज का लगातार दो ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय बनने का सपना तोड़ दिया। बावजूद इसके नीरज ट्रैक एंड फील्ड इवेंट्स में लगातार दो पदक जीतने वाले भारत के पहले एथलीट बने।
पुरुष हॉकी टीम ने जीता लगातार दूसरा कांस्य
भारत की हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी वाली पुरुष हॉकी टीम लगातार दूसरे ओलंपिक खेलों में कांस्य पदक जीतने में सफल रही। टोक्यो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम ने कांस्य पदक जीतकर 40 साल का पदक का सूखा खत्म किया था। पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर हॉकी टीम ने 52 साल लंबे अंतराल के बाद लगातार दो पदक अपने नाम करने में सफल रही।
अमन सहरावत ने बचाई कुश्ती की लाज
युवा पहलवान अमन सहरावत भारतीय कुश्ती की ओलंपिक में पदक जीतने की परंपरा को बरकरार रखने में सफल रहे। उन्होंने पुरुषों की 57 किग्रा फ्रीस्टाइल स्पर्धा में कांस्य पदक अपने नाम किया। उन्होंने भारत के लिए पेरिस ओलंपिक में छठा और आखिरी पदक जीता। भारत के हाथ कुश्ती में सबसे बड़ी निराशा विनेश फोगाट मामले में लगी। फाइनल से पहले महज 100 ग्राम वजन ज्यादा होने की वजह से उन्हें डिस्क्वालीफाई कर दिया गया और वो बगैर किसी पदक के वापस स्वदेश लौटीं। अमन के पदक ने इस चोट पर मरहम का काम किया।
