मंगलवार को एशियाई खेलों से सिल्वर मेडल जीतकर नई दिल्ली लौटीं मीराबाई चानू ने अपनी खुशी ज़ाहिर करते हुए कहा कि उन्हें इस कामयाबी का बरसों से इंतज़ार था। चानू ने जापान में हुए एशियाई खेलों में महिलाओं की 49 किग्रा वेटलिफ्टिंग कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीता। उनके शानदार करियर में पहले से ही ओलंपिक मेडल, वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडल और तीन कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड मेडल शामिल हैं, और अब इसमें यह कॉन्टिनेंटल मेडल भी जुड़ गया है।
मंगलवार सुबह नई दिल्ली पहुंचने के बाद चानू ने कहा, "मैं बहुत खुश हूं। मुझे इस दिन का बरसों से इंतज़ार था। मेरे पास पहले से ही ओलंपिक मेडल और वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडल थे, और मैं तीन बार कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीत चुकी थी। लेकिन यह हमारा सबसे बड़ा सपना था; यह मेरे लिए बहुत ज़रूरी था, और आखिरकार मैंने इसे हासिल कर लिया है। मैंने अपने कलेक्शन में एशियाई खेलों का मेडल भी जोड़ लिया है, और भारत और वेटलिफ्टिंग के लिए कुछ हासिल करके मैं बेहद खुश हूं।"
32 साल की चानू ने कुल 198 किग्रा वज़न उठाया; उन्होंने स्नैच में 87 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 111 किग्रा वज़न सफलतापूर्वक उठाया। नॉर्थ कोरिया की री सोंग गम ने 215 किग्रा के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि विजयाना ने ब्रॉन्ज़ मेडल हासिल किया। अपनी तैयारी के बारे में बात करते हुए चानू ने कहा कि पिछले एशियाई खेलों में चोट लगने के बाद ये खेल उनके लिए खास तौर पर अहम थे।
उन्होंने कहा, "हमने बहुत अच्छी ट्रेनिंग की। ये एशियाई खेल मेरे लिए बहुत ज़रूरी थे क्योंकि पिछले खेलों में मुझे चोट लग गई थी। इसलिए, यह खुद को साबित करने का मेरे लिए सबसे अच्छा मौका था। तैयारी के रूटीन में ज़्यादा बदलाव नहीं हुआ; हमने उन्हीं तरीकों को अपनाया जो हम पहले इस्तेमाल करते आ रहे थे।"
इस मेडल के साथ एशियाई खेलों में चानू का लंबा इंतज़ार खत्म हुआ। हांगझोऊ 2023 में चोट के कारण उन्हें क्लीन एंड जर्क की अपनी आखिरी कोशिश से हटना पड़ा था, जिससे वह पोडियम तक पहुँचने से मामूली अंतर से चूक गई थीं और चौथे स्थान पर रही थीं।
32 साल की चानू ग्लासगो में हुए 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के बाद आइची-नागोया गेम्स में शामिल हुई थीं। वह तीन बार कॉमनवेल्थ गेम्स की चैंपियन भी रही हैं और टोक्यो 2020 में उन्होंने ओलंपिक सिल्वर मेडल जीता था।
एशियन गेम्स में अपना पहला मेडल जीतने के साथ ही, चानू कर्णम मल्लेश्वरी के बाद दूसरी ऐसी भारतीय वेटलिफ्टर बन गईं जिन्होंने ओलंपिक, एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स, वर्ल्ड चैंपियनशिप, एशियन चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में मेडल जीते हैं।
मणिपुर के नोंगपोक काकचिंग में जन्मीं चानू ने 2008 में वेटलिफ्टिंग की औपचारिक ट्रेनिंग शुरू की और भारत की प्रमुख वेटलिफ्टर्स में से एक के तौर पर अपनी पहचान बनाई। चानू ने कहा कि टीम इस मौके का पूरा फ़ायदा उठाने के लिए पक्का इरादा कर चुकी थी और उनके पास प्रतियोगिता के दौरान उठाए जाने वाले वज़न को लेकर एक साफ़ रणनीति थी।
उन्होंने कहा, "हम इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहते थे। हम वज़न को लेकर एक साफ़ रणनीति के साथ स्टेज पर उतरे, जिसमें यह तय था कि क्या उठाना है और कहां से शुरुआत करनी है... हमने बस उन खास वज़न कॉम्बिनेशन पर ज़्यादा ध्यान दिया जिनका हमें सामना करना पड़ सकता था और उसी के हिसाब से योजना बनाई..."
