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15 साल की तन्वी ने रचा इतिहास,यूथ ओलंपिक बैडमिंटन में सिल्वर मेडल जीतने वाली बनीं पहली भारतीय महिला

तन्वी पत्री ने यूथ ओलंपिक्स बैडमिंटन फाइनल में चीन की झांग यी शिन के खिलाफ 10-19 से पिछड़ने के बाद वापसी की और पांच मैच पॉइंट बचाए। 15 साल की ओडिशा की इस खिलाड़ी ने सिल्वर मेडल जीता, जब उनकी चीनी विरोधी ने एक गेम से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी की।

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तन्वी पत्री ने जीता सिल्वर मेडल। फोटो- स्क्रीन ग्रैब

स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। तन्वी पत्री ने 10-19 से पीछे होने के बाद शानदार वापसी की और पांच मैच पॉइंट बचाए। फिर खुद तीन गोल्ड मेडल पॉइंट हासिल किए, लेकिन 15 साल की भारतीय खिलाड़ी गुरुवार को डकार में यूथ ओलंपिक गेम्स बैडमिंटन फाइनल में शानदार वापसी नहीं कर पाई। चीन की झांग यी शिन ने आखिरकार बाजी मार ली। उन्होंने तीन गेम का रोमांचक मुकाबला 15-21, 21-13, 26-24 से जीतकर ओडिशा की इस किशोरी को ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीतने से रोक दिया।

दिल तोड़ने वाली हार के बावजूद, तन्वी सिल्वर मेडल के साथ लौटीं और यूथ ओलंपिक गेम्स में बैडमिंटन फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। मौजूदा जूनियर वर्ल्ड चैंपियन के खिलाफ उनका प्रदर्शन उनके टैलेंट का एक और संकेत था। फाइनल में दोनों ही खिलाड़ियों के बीच मुकाबला था। तन्वी ने शानदार शुरुआत की और पहला गेम 21-15 से जीत लिया, लेकिन झांग ने दूसरे गेम में जबरदस्त वापसी करते हुए इसे 21-13 से जीतकर निर्णायक गेम के लिए मजबूर कर दिया। इसके बाद एक जबरदस्त फाइनल गेम हुआ, जिसमें दोनों खिलाड़ियों ने एक-दूसरे को पूरी तरह से चुनौती दी।

शानदार ओपनिंग गेम के बाद तन्वी लड़खड़ा गईं

झांग ने पहला गेम 5-3 की बढ़त के साथ शुरू किया, लेकिन तन्वी ने शानदार सात पॉइंट बनाकर मुकाबला पलट दिया। भारतीय खिलाड़ी ने इंटरवल तक 11-5 की बढ़त बना ली और अपनी डिफेंसिव स्किल्स और अटैकिंग वैरायटी का इस्तेमाल करके चीनी शटलर पर दबाव बनाया। झांग ने गेम में वापसी करने की कोशिश की, लेकिन तन्वी ने अपनी बढ़त नहीं छोड़ी। आधे समय तक, भारतीय खिलाड़ी 13-10 से आगे थी और रैलियों पर हावी रही। 18-15 से, उसने लगातार तीन पॉइंट जीतकर पहला गेम 21-15 से अपने नाम कर लिया।

तन्वी ने दूसरे गेम में भी इसी मोमेंटम को बनाए रखा और 4-0 की बढ़त बना ली। हालांकि, झांग ने धीरे-धीरे अपनी रिदम पकड़ ली और कॉर्नर पर निशाना लगाना शुरू कर दिया, जिससे भारतीय खिलाड़ी को ज्यादा दूरी तय करनी पड़ी। चीनी शटलर ने वापसी करते हुए स्कोर 10-10 से बराबर कर दिया, जिसके बाद तन्वी इंटरवल में 11-10 की मामूली बढ़त के साथ गईं। इसके बाद झांग ने कंट्रोल कर लिया और अपनी बढ़त को 17-12 तक पहुंचा दिया, फिर गेम 21-13 से खत्म कर दिया।

निर्णायक गेम में हुआ धैर्य का टेस्ट

निर्णायक गेम धीरज और स्वभाव का टेस्ट बन गया। इंटरवल पर झांग ने 11-7 की बढ़त बना ली थी और अपनी बढ़त को 19-10 तक बढ़ाकर वह खिताब की ओर बढ़ती दिख रही थी। लेकिन, तन्वी ने हार नहीं मानी। उसने जबरदस्त वापसी की। स्कोर को 15-19 कर दिया और झांग को हर पॉइंट के लिए मेहनत करनी पड़ी। चीनी खिलाड़ी ने पाँच मैच पॉइंट कमाए, लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने सभी पाँच बचाकर गोल्ड मेडल की उम्मीदें जिंदा रखीं।

इसके बाद तन्वी ने पासा पलट दिया और अपने लिए तीन मैच पॉइंट बनाए। हालांकि, वह उनमें से किसी को भी गोल में नहीं बदल सकी। आखिरकार झांग ने हिम्मत बनाए रखी और 26-24 से जीत हासिल की और एक रोमांचक मैच के बाद गोल्ड मेडल जीता। तन्वी का सिल्वर मेडल डकार में उनके शानदार कैंपेन का नतीजा था, जहां उन्होंने लगातार अलग-अलग अपोनेंट्स और मैच सिचुएशन को संभालने की अपनी काबिलियत दिखाई। ओडिशा की शटलर ने अपने ग्रुप-स्टेज कैंपेन की शुरुआत मेक्सिको की सारा गोंजालेज पर 21-8, 21-12 से शानदार जीत के साथ की। इसके बाद उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की स्मृति अडेपु को 21-4, 21-12 से हराया और फिर साउथ कोरिया की जियोंग यू जांग को हराकर नॉकआउट राउंड में जगह बनाई।

    Umesh Kumar
    उमेश कुमारauthor

    उमेश कुमार पत्रकारिता में पिछले 8 वर्षों से सक्रिय हैं। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से करने के बाद उन्होंने डिजिटल मीडिया में बतौर स्पोर्ट्स राइटर अपनी मजबूत पहचान बनाई। उमेश ने अमर उजाला (प्रिंट), ईटीवी भारत (हैदराबाद), दैनिक भास्कर और दैनिक जागरण जैसे संस्थानों के साथ काम किया है। उमेश ने क्रिकेट की कई बायलेटरल सीरीज, आईपीएल, वर्ल्ड कप, प्रो कबड्डी लीग, फीफा वर्ल्ड कप, हॉकी वर्ल्ड कप और ओलंपिक जैसे बड़े राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों को कवर किया है। खेलों की गहरी समझ और डेटा-ड्रिवन स्टोरीटेलिंग उनकी लेखनी की खासियत है।

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