फीफा वर्ल्ड कप 2026 का शानदार आगाज हो चुका है। इस बार टूर्नामेंट की मेजबानी तीन देश कनाडा, मेक्सिको और अमेरिका मिलकर कर रहे हैं। गुरुवार को मेक्सिको सिटी के मशहूर एज्टेका स्टेडियम में ओपनिंग सेरेमनी हुई। इसके बाद मेजबान मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका के बीच उद्घाटन मैच खेला गया। स्टेडियम में 80 हजार से ज्यादा फैन्स की मौजूदगी में आतिशबाजी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ टूर्नामेंट का शानदार आगाज हुआ। इसी बीच फलस्तीन फुटबॉल संघ के अध्यक्ष जिब्रिल रजौब अमेरिका में प्रवेश की अनुमति का इंतजार कर रहे हैं। रजौब इस वक्त मेक्सिको सिटी में हैं। वह गुरुवार को मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका के बीच हुए उद्घाटन मैच में भी स्टेडियम में मौजूद थे।
दुनियाभर के फुटबॉल संघ प्रमुखों को मिलता है आमंत्रण
दरअसल, फीफा हर चार साल में दुनिया भर के फुटबॉल संघ प्रमुखों को वर्ल्ड कप में आमंत्रित करता है। इसे वह वैश्विक एकता का उत्सव मानता है। रजौब भी इसी के तहत अमेरिका जाने की कोशिश कर रहे हैं, जहां टूर्नामेंट के ज्यादातर मैच होने हैं। लेकिन कई अन्य अधिकारियों की तरह उन्हें अभी तक अमेरिका से वीजा नहीं मिला है।रजौब ने इस स्थिति पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि यह उचित है कि दुनिया भर के फुटबॉल से जुड़े लोगों के अधिकारों को रोका जाए या उनसे वंचित किया जाए।" फलस्तीन की राष्ट्रीय टीम इस वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई नहीं कर सकी है। लेकिन परंपरा के मुताबिक रजौब को आमंत्रित किया गया है। फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने पिछले साल कहा था, "कनाडा, मेक्सिको और अमेरिका में होने वाले वर्ल्ड कप के लिए सभी का स्वागत होगा। हम इसी दिशा में काम कर रहे हैं।"
अमेरिका ने वीजा देने से किया इंकार
हालांकि, अमेरिका ने कई देशों के प्रतिनिधियों को वीजा देने से इनकार किया है। इनमें सोमालिया के एक रेफरी और इराक की टीम के साथ जाने वाले एक फोटोग्राफर भी शामिल हैं।इन्फेंटिनो ने इस सप्ताह कहा कि फीफा वीजा समस्याओं को हल करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वह किसी देश की सरकार के फैसले को बदल नहीं सकता।अमेरिका के विदेश विभाग ने रजौब के वीजा पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की है। पिछले वर्ष अमेरिका ने फलस्तीनी पासपोर्ट धारकों पर नई पाबंदियां लगाई थीं, जिनमें फलस्तीनी प्राधिकरण से जुड़े लोगों पर भी रोक शामिल थी। पिछले साल संयुक्त राष्ट्र महासभा में फलस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास का वीजा भी रद्द कर दिया गया था।
