नागोया: भारत के 23 वर्षीय पहलवान नितेश सिवाच ने आइची-नागोया एशियाई खेलों में पुरुषों के ग्रीको-रोमन 97 किग्रा इवेंट के फाइनल में जापान के पहलवान यूरी नकाजातो के खिलाफ स्वर्णिम इतिहास रचने से चूक गए। फाइनल मुकाबले में उन्हें जापानी पहलवान के खिलाफ एकतरफा मुकाबले में 0-4 के अंतर से हार का सामना करना पड़ा और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
जापानी पहलवान ने दिखाया दम
भारत और जापान के पहलवानों के बीच शुरुआत अच्छी हुई लेकिन नितेश ने रिंग से बाहर निकलकर एक अंक गंवा दिया। इसके थोड़ी देर बाद भारतीय पहलवान 0-2 से पिछड़ गए। पहले राउंड के शुरुआती तीन मिनट में नितेश के खिलाफ जापानी पहलवान ने 2-0 की बढ़त बना ली थी। दूसरे राउंड के पहले मिनट में नितेश ने दो अंक और गंवा दिए और 0-4 से पिछड़ गए। इसके बाद उनके हाथ से स्वर्ण पदक फिसलता गया।
सेमीफाइनल में टेक्निकल सुपीरियरिटी के आधार पर दर्ज की थी जीत
नितेश सिवाच मंगोलिया के गनखुयाग गनबातार को 9-0 से हराकर एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों के ग्रीको-रोमन 97 किग्रा इवेंट के फाइनल में पहुंचे थे। ये जीत उन्होंने 'टेक्निकल सुपीरियरिटी' के आधार पर हासिल की थी। इसी प्रदर्शन को वह फाइनल मुकाबले में जारी नहीं रख सके और उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा।
64 साल बाद स्वर्ण पदक जीतने वाले पहलवान बनने का मौका गंवाया
नितेश नकाज़ातो को मात देकर नितेश सिवाच गोल्ड मेडल अपने नाम करने में सफल होते तो वह 64 साल में ग्रीको-रोमन रेसलिंग में एशियन गेम्स का गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय बन जाते लेकिन उनके हाथ से शानदार मौका फिसल गया। एशियन गेम्स में ग्रीको-रोमन रेसलिंग में गोल्ड मेडल जीतने वाले आखिरी भारतीय गणपत अंदलकर और मालवा सिंह थे। दोनों ने साल 1962 के एशियाई खेलों में भारत के लिए ग्रीको-रोमन रेसलिंग में गोल्ड मेडल जीते थे।
नाइची-आगोया में ग्रीको-रोमन में भारत को दिलाया दूसरा पदक
भारत के लिए आइची-नागोया एशियाई खेलों में यह ग्रीको-रोमन रेसलिंग में भारत के लिए दूसरा पदक है। इससे पहले सुनील कुमार ने पुरुषों के 87 किग्रा इवेंट में कांस्य पदक जीता था। नितेश सिवाच के सिल्वर मेडल के साथ 20वें एशियाई खेलों में भारत के पदकों की संख्या 10 गोल्ड, 23 सिल्वर और 32 कांस्य पदक के साथ 65 हो गई है। भारत पदक तालिका में आठवें पायदान पर काबिज है।
