अहमदाबाद: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले जा रहे सीरीज के चौथे और आखिरी टेस्ट मैच का पहला दिन ऑस्ट्रेलिया के नाम रहा। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलिया ने उस्मान ख्वाजा के नाबाद शतक की बदौलत 4 विकेट के नुकसान पर 255 रन बना लिए हैं। ख्वाजा 104 रन बनाकर नाबाद हैं। पारी की शुरुआत करने आए ख्वाजा पूरे दिन पिच पर टिके रहे और भारत के खिलाफ भारतीय सरजमीं पर शतक जड़ने का सपना पूरा कर लिया।
246 गेंद में पूरा किया टेस्ट में 14वां सैकड़ा
ख्वाजा ने पहले विकेट के लिए ट्रेविस हेड के साथ 61 रन की साझेदारी की। इसके बाद उन्होंने चौथे विकेट के लिए स्टीव स्मिथ के साथ अर्धशतकीय साझेदारी की और अपना अर्धशतक भी 146 गेंद में 9 चौकों की मदद से पूरा कर लिया। इसके बाद उनके रन बनाने का सिलसिला जारी रहा और पहले दिन का खेल खत्म होने से ठीक पहले 246 गेंद में 15 चौकों की मदद से पूरा कर लिया।
पिछले दो दौरों पर किया ड्रिक्स ले जाने का काम
उस्मान ख्वाजा भारतीय धरती पर स्पेशल सेंचुरी पूरी करने का बाद मुस्कुरा रहे थे। उन्होंने बताया कि उन्हें याद नहीं कि वह सैकड़ा जड़ने के बाद कभी इस तरह मुस्कुराये हों। उन्होंने भारत दौरे पर कभी भी शतक जड़ने का सपना नहीं देखा था क्योंकि 2013 और 2017 के पिछले दौरों पर वह मैदान में ‘ड्रिंक्स’ ले जाया करते थे। लेकिन इस दौरे पर वह ऑस्ट्रेलिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज साबित हुए।
मौजूदा सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी
मौजूदा बॉर्डर गावस्कर ट्ऱॉफी में ख्वाजा अबतक खेले 4 टेस्ट की 7 पारियों में 1 बार नाबाद रहते हुए कुल 257 रन बना चुके हैं। इसमें 1 शतक और 2 अर्धशतक सामिल हैं। नाबाद 104* उनका नाबाद स्कोर है और वो सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं।
शतक जड़ने के बाद हुए भावुक
ख्वाजा ने कहा मुझे नहीं लगता कि मैं एक शतक जड़ने के बाद कभी इतना मुस्कुराया हूं, इसमें भावनायें थीं। मैंने पहले भी भारत के दो टेस्ट दौरे (2013 और 2017) कर चुका हूं। आठ टेस्ट मैचों में ‘ड्रिंक्स’ लेकर जाता था और इस बार मुझे मौका मिला। मेरे पूरे करियर के दौरान मुझे कहा गया था कि मैं स्पिन नहीं खेल सकता इसलिये मुझे कभी भी भारत में खेलने का मौका नहीं मिला। इसलिये क्रीज पर जाकर भारत में शतक जड़ना शानदार था क्योंकि पांच साल पहले अगर आपने मुझे पूछा होता तो मैं सोचता कि आप ‘क्रेजी’ हो। भारत में शतक जड़ने की उम्मीद नहीं की थी इसलिये काफी भावुक हो गया था।'
अंधविश्वास में नहीं है यकीन
अहमदाबाद की पिच के बारे में शतकवीर ख्वाजा ने कहा, विकेट अच्छा था और मैं अपना विकेट नहीं देना चाहता था। यह लड़ाई पूरी तरह मानसिक थी। इसके लिए अपने अहम को ताक पर रखने की जरूरत थी। मैं किसी तरह के अंधविश्वास पर यकीन नहीं करता हूं।
(भाषा इनपुट के साथ)
