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यूं ही नहीं बन गए थे पुजारा टीम इंडिया की दूसरी दीवार, पहले तोड़ा था राहुल द्रविड़ का रिकॉर्ड

जब फैंस फटाफट क्रिकेट की दीवानी हो और इसका प्रभाव टेस्ट क्रिकेट में भी पड़ने लगे। टीमें बैजबॉल को अपनाने की बात करने लगे। ऐसे दौर में पुजारा ने टेस्ट क्रिकेट के असली मतलब को न केवल समझाया बल्कि उसे जिया भी। पुजारा ने अपनी मेहनत और धैर्य के साथ टीम इंडिया की दूसरी दीवान बनने का गौरव हासिल किया।

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चेतेश्वर पुजारा (साभार-ICC/BCCI)

बैजबॉल के जमाने में जब चेतेश्वर पुजारा जैसे बल्लेबाज की तारीफ की जाए तो समझ जाइए कि वह कितने खास रहे होंगे। फटाफट क्रिकेट के इस दौर में जब बल्लेबाज कुछ गेंदों में ही लंबे-लंबे शॉर्ट्स लगाकर मशहूर हो जाना चाहते हैं, उस दौरे में पुजारा ने टेस्ट क्रिकेट का एक अलग ही रंग दिखाया। उन्होंने साबित किया कि केवल आक्रामक शॉट खेलकर नहीं बल्कि अपनी डिफेंस से भी विरोधी गेंदबाजों को झुकाया जा सकता है। शायद यही कारण था कि उन्हें राहुल द्रविड़ के बाद टीम इंडिया की दूसरी दीवार कहा जाने लगा।

एक दशक से अधिक समय तक टेस्ट क्रिकेट में भारतीय बल्लेबाजी की रीढ़ रहे चेतेश्वर पुजारा ने आखिरकार 103 टेस्ट के साथ अपनी पारी को विराम दे दिया। दूसरी दीवार बनने का गौरव उन्हें यूं ही नहीं मिला था, बल्कि उन्होंने अपनी जिद के दम पर हासिल किया। जब पुजारा ने एक पारी में सबसे ज्यादा गेंद खेलने के राहुल द्रविड़ के रिकॉर्ड को तोड़ा तो भारतीय टीम को यह भरोसा हो चला कि द्रविड़ की कमी पूरी हो गई है।

टेस्ट की डिमांड पर खरे उतरे पुजारा

टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाज से उम्मीद की जाती है कि वह मैदान पर अधिक से अधिक समय बिताएगा। इससे टीम को मजबूती मिलती है। राहुल द्रविड़ एक ऐसे बल्लेबाज थे, जो पिच पर ज्यादा समय बिताने और ज्यादा गेंद खेलने के लिए मशहूर थे। राहुल द्रविड़ ने 2004 में पाकिस्तान के खिलाफ एक पारी में 495 गेंद खेली थी। यह किसी भी भारतीय बल्लेबाज का टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा गेंद खेलने का रिकॉर्ड था।

2017 में पुजारा ने तोड़ा द्रविड़ का रिकॉर्ड

चेतेश्वर पुजारा ने 2017 में राहुल द्रविड़ के इस रिकॉर्ड को तोड़ दिया। पुजारा ने 2017 में रांची में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक पारी में 525 गेंद का सामना किया था। इस पारी में उन्होंने 202 रन बनाए थे। मैच ड्रॉ रहा और पुजारा प्लेयर ऑफ द मैच चुने गए।

SENA कंट्री के असली सेनापति

पुजारा के नाम साउथ अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, इंग्लैंड में मिली सर्वाधिक जीत (11 बार) का हिस्सा बनने का रिकॉर्ड है। दूसरे नंबर पर जसप्रीत बुमराह (10 बार) हैं। यह बताता है कि वह SENA कंट्री में भारत के कितने बड़े सेनापति थे। खासतौर से ऑस्ट्रेलिया में जाकर दो बार टीम इंडिया ने जो बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी अपने नाम की, उसके सूत्रधार पुजारा ही थे।

अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट में पुजारा का योगदान

2010 से 2023 के बीच पुजारा ने 103 टेस्ट की 176 पारी में 43.37 की औसत से 7,195 रन बनाए। इस दौरान 19 शतक, जिसमें 3 दोहरे शतक थे और 35 अर्धशतक लगाए। उनका सर्वाधिक स्कोर 206 था। क्रिकेट के प्रति उनकी दीवानगी को इस बात से भी समझा जा सकता है कि जब खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट खेलने से बचना चाहते हैं, उन्होंने रनों का अंबार खड़ा कर दिया। वह फर्स्ट क्लास क्रिकेट में भारत की तरफ से सबसे ज्यादा दोहरे शतक लगाने वाले बल्लेबाज हैं। उनके नाम 18 दोहरा शतक लगाने का रिकॉर्ड है।

बीसीसीआई ने पुजारा के योगदान को किया याद

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने 'एक्स' पर एक पुजारा की एक बेजोड़ पारी वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, "भारतीय क्रिकेट के सबसे दृढ़ और प्रशंसित टेस्ट विशेषज्ञों में से एक, चेतेश्वर पुजारा ने खेल के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा कर दी है। रांची में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनकी शानदार पारी को फिर से याद करें। धन्यवाद पुजारा।"

एक और वीडियो पोस्ट में बीसीसीआई ने 2012 में न्यूजीलैंड के खिलाफ पुजारा के शतक की झलकियों को शेयर किया। एक पोस्ट में बीसीसीआई ने लिखा, "टेस्ट क्रिकेट में टीम इंडिया का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे साहसी और बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक। चेतेश्वर पुजारा को शानदार टेस्ट करियर के लिए बधाई और आगे के सफर के लिए शुभकामनाएं!"

Sameer Thakur
समीर कुमार ठाकुर author

समीर कुमार ठाकुर टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की स्पोर्ट्स टीम के सदस्य हैं। करीब 10 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ वे न केवल क्रिकेट, बल्कि हॉकी, फुटब... और देखें

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