टी20 वर्ल्ड कप का फाइनल मुकाबला अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम में खेला गया। टॉस गंवाने के बाद टीम इंडिया बल्लेबाजी करने उतरी और टॉप थ्री संजू, ईशान और अभिषेक की विस्फोटक अर्धशतकीय पारी के दम पर 7 विकेट के नुकसान पर 255 रन का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया। जब गेंदबाजी की बारी आई तो हमेशा की तरह जसप्रीत बुमराह और अक्षर पटेल ने क्लासिकल स्पेल डालकर न्यूजीलैंड को 159 पर ढेर कर दिया और भारत ने बैक टू बैक टी20 वर्ल्ड कप अपने नाम कर ली। वह ऐसा करने वाली पहली टीम बन गई। ये सबकुछ किसी सपने जैसा लगता है न कि संजू आए, अच्छी शुरुआत दिलाई और भारत ने बड़ा स्कोर कर बुमराह के दम टी20 वर्ल्ड कप की ट्रॉफी उठा ली।
लेकिन यकीन मानिए यह सब कुछ इतना आसान नहीं था। टी20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में अगर टीम इंडिया ने एकतरफा अंदाज में न्यूजीलैंड को रौंदकर ट्रॉफी उठाई तो उसकी नींव कप्तान सूर्यकुमार यादव और कोच गौतम गंभीर ने 2024 के बाद रख दी। भारतीय टीम मैनेजमेंट ने इन दोनों के सहयोग से कुछ ऐसे कड़े फैसले लिए जिसने टीम इंडिया को आंतरिक और मानसिक तौर पर इतना सशक्त बना दिया कि टीम मुश्किल परिस्थिति में भी अपने बेसिक्स पर डंटी रही। चलिए एक-एक कर इन फैसलों के बारे में जानते हैं।

हार्दिक पांड्या (साभार-BCCI)
1. कप्तान के तौर पर हार्दिक को न चुनना:- टी20 वर्ल्ड कप 2024 जीतने के बाद जैसे ही रोहित शर्मा ने इस फॉर्मेट को अलविदा कहा तो सबसे पहला सवाल था कि अगला टी20 कप्तान कौन होगा। रेस में सबसे ऊपर हार्दिक पांड्या का नाम चल रहा था और यह तय माना जा रहा था कि कप्तान के तौर पर वही रोहित को रिप्लेस करेंगे। लेकिन टीम मैनेजमेंट और गंभीर ने हार्दिक की इंजरी और टीम में उनके अंदर-बाहर होने को देखते हुए एक ऐसे कप्तान के बारे में सोचा जो स्थाई तौर पर टीम से जुड़े रहें।
2. सूर्यकुमार यादव को टी20 का कप्तान चुनना:- रेस से हार्दिक पांड्या के हटने के बाद सबसे बड़ा सवाल था कि अब कौन टीम को लीड करेगा। ऐसे में गौतम गंभीर ने सूर्यकुमार यादव पर भरोसा जताया। केवल एक फॉर्मेट खेलने वाले सूर्यकुमार यादव को कप्तान चुने जाने का फैसला किसी के लिए आसान नहीं था, लेकिन गंभीर ने सूर्या के साथ पहले किए गए काम को तरजीह दी और उन पर बड़ा दांव खेला। नतीजा सबके सामने है।
3. शुभमन गिल को बाहर करना:- वनडे में खुद को साबित कर चुके शुभमन गिल को टी20 टीम से ड्रॉप करना वह तीसरा फैसला था, जिसने टीम इंडिया को मजबूत बनाया। टीम मैनेजमेंट औसत की तुलना में स्ट्राइक रेट को तरजीह दी और टी20 वर्ल्ड कप की टीम से शुभमन गिल को बाहर कर दिया।

संजू सैमसन
4. संजू सैमसन का सपोर्ट करना:- टीम मैनेजमेंट का चौथा बड़ा फैसला संजू सैमसन को सपोर्ट करना था। न्यूजीलैंड के खिलाफ 5 मैच की टी20 सीरीज में संजू केवल 46 रन बना पाए थे। इसके बावजूद गंभीर और सूर्या ने उन्हें टी20 वर्ल्ड कप टीम में रखा। शुरुआत में भले ही उन्हें प्लेइंग इलेवन से दूर रखा गया, लेकिन जैसे ही एक बार मैनेजमेंट को यह एहसास हुआ कि लेफ्ट-राइट का कॉम्बिनेशन टीम के लिए फायदेमंद साबित होगा तो बिना सोचे-विचारे उन्होंने संजू को प्लेइंग इलेवन से जोड़ लिया। नतीजा संजू ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने 5 पारी में 321 रन बनाए। उन्होंने लगातार 3 मैच में क्रमश: 97, 89 और 89 रन की पारी खेली।
5. एक से ज्यादा ऑलराउंडर को शामिल करना:- इसके अलावा टीम में खास तौर से प्लेइंग इलेवन में एक से ज्यादा ऑलराउंडर को शामिल करने का दांव भी फिट बैठा। हार्दिक पांड्या के अलावा टीम में अक्षर पटेल, रिंकू सिंह और शिवम दुबे जैसे ऑलराउंडर को शामिल किया। उनके टीम से जुड़ने का फायदा टीम को हुआ। जब टॉप-ऑर्डर फेल रही तो इन्ही फिनिशर ने टीम इंडिया की नैय्या पार लगाई। नामीबिया के खिलाफ हार्दिक का अर्धशतक और इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में और न्यूजीलैंड के खिलाफ शिवम दुबे की छोटी लेकिन इंपैक्टफुल पारी इसकी गवाह बनी।
गंभीर-सूर्या की जोड़ी और टीम मैनेजमेंट के द्वारा लिए गए ये 5 फैसले आसान बिल्कुल नहीं थे। लेकिन टीम मैनेडमेंट ने दिखाया कि कुछ बड़ा करने के लिए ऐसे कड़े फैसले लेने पड़ते हैं। इन फैसलों को नतीजा यह रहा कि जहां साउथ अफ्रीका से सुपर-8 में हारने के बाद टीम इंडिया पर वर्ल्ड कप से बाहर होने का खतरा मंडरा रहा था, वहीं भारत ने लगातार 3 मैच में 250 प्लस का स्कोर कर ट्रॉफी डिफेंड की और ऐसा करने वाली दुनिया की पहली टीम बनी।
