आईसीसी ट्रॉफी जीतने की टीम इंडिया का इंतजार और भी लंबा हो गया है। ओवल में खेले गए वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मुकाबले में उसे ऑस्ट्रेलिया के हाथों 209 रन से करारी हार का सामना करना पड़ा। भारत को चौथी पारी में 444 रन बनाने थे, लेकिन पूरी टीम केवल 234 रन ही बना सकी, लेकिन सवाल उठता है कि इस हार की असली वजह क्या रही? आइए जानने की कोशिश करते हैं कि टीम इंडिया से कहां चूक हुई जिसका खामियाजा उसे हार के रुप में भुगतना पड़ा।
कप्तान और कोच पिच को पढ़ने में नाकाम
कोच राहुल द्रविड़ और कप्तान रोहित शर्मा पिच को पढ़ने में नाकाम रहे। टेस्ट क्रिकेट में टीम चौथे पारी में बल्लेबाजी करने से बचती है और ऐसे में रोहित ने टॉस जीतकर गेंदबाजी करने का फैसला कर लिया। ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में विशाल स्कोर खड़ा कर टीम इंडिया को दबाव में ला दिया।
अश्विन को अंतिम ग्यारह में न रखना
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रविचंद्रन अश्विन का रिकॉर्ड शानदार रहा है। ऐसे में उन्हें अंतिम ग्यारह में न रखना टीम इंडिया के लिए बड़ी चूक साबित हुई। अश्विन इतने अनुभवी गेंदबाज हैं कि पिच से मदद मिले या न मिले वह विकेट लेने में सक्षम हैं। ऑस्ट्रेलिया ने यह गलती नहीं की और उसने नाथन लियोन को टीम में रखा।
टॉप ऑर्डर का न चलना
बल्लेबाजी टीम इंडिया की ताकत रही है और इस मैच में उसका टॉप ऑर्डर पूरी तरह से फेल रहा। जब ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी 469 रन का जवाब देना था तो टॉप ऑर्डर के बल्लेबाजों ने हाथ खड़े कर दिए। टीम इंडिया 71 रन के स्कोर पर 4 विकेट गंवा चुकी थी और उस पर फॉलोओन का खतरा था। वो तो भला हो अजिंक्य रहाणे और शार्दुल ठाकुर का जिसने अपनी बल्लेबाजी से इसे टाल दिया। दूसरी पारी में भी टॉप ऑर्डर के बल्लेबाजों ने अच्छी शुरुआत तो की, लेकिन उसे बड़े स्कोर में नहीं बदल पाए जिसका खामियाजा टीम इंडिया को भुगतना पड़ा।
नहीं निकाल पाए बाएं हाथ के बल्लेबाजों का तोड़
उस्मान ख्वाजा को छोड़ दें तो टीम इंडिया के गेंदबाज बाएं हाथ के बल्लेबाजों का तोड़ नहीं निकाल पाए। पहली पारी में ट्रेविस हेड ने 163 रन की पारी खेली जबकि डेविड वॉर्नर ने 43 और आखिर में एलेक्स कैरी ने भी 48 रन की पारी खेली। दूसरी पारी में कैरी ने फिर कैरी ने सर्वाधिक 66 और मिचेल स्टार्क ने 41 रन की पारी खेली।
गेंदबाजी में अकेले पड़ गए सिराज
गेंदबाजी की बात करें तो इस मैच में अकेले मोहम्मद सिराज ही थे जिसने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों के सामने अपनी रफ्तार और लेंथ से परेशानी खड़ी की। उन्हें दूसरे छोर से किसी का साथ नहीं मिला। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाज की तरह भारतीय गेंदबाज एक लेंथ पर गेंदबाजी नहीं कर पाए जबकि ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाजों ने इसे बाखूबी अंजाम दिया, जिसका नतीजा रहा कि भारतीय बल्लेबाज अच्छी शुरुआत के बावजूद भी कुछ नहीं कर पाए।
