Asia Games Womens Hockey: शानदार फॉर्म में चल रही भारतीय महिला हॉकी टीम शुक्रवार को एशियन गेम्स 2026 के फाइनल में गत चैंपियन चीन के सामने होगी। इस मैच में सिर्फ गोल्ड मेडल ही दांव पर नहीं है, बल्कि 44 साल के लंबे इंतजार को खत्म करने और लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 के लिए सीधा क्वालीफाई करने का सुनहरा मौका भी है। भारत ने एशियाई खेलों में एकमात्र स्वर्ण 1982 में दिल्ली में जीता था, जब पहली बार महिला हॉकी को शामिल किया गया था। उसके बाद 1998 और 2018 में भारत फाइनल में पहुंचा लेकिन दक्षिण कोरिया और जापान से हारकर सिल्वर से संतोष करना पड़ा। टोक्यो 2020 में ऐतिहासिक चौथे स्थान के बाद पेरिस ओलंपिक 2024 के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाने का मलाल भी इस टीम के जेहन में है।
जीतते ही ओलंपिक का मिलेगा टिकट
कोच शॉर्ड मारिन की युवा टीम इस बार उस मलाल को मिटाने का माद्दा रखती है। 2025 में खराब फॉर्म के बाद 2026 टीम के लिए टर्निंग पॉइंट रहा है। टीम ने FIH नेशंस कप जीतकर प्रो लीग में वापसी की और पिछले महीने नीदरलैंड-बेल्जियम में हुए वर्ल्ड कप में 1974 के बाद अपना बेस्ट प्रदर्शन करते हुए 5वां स्थान हासिल किया। वर्ल्ड कप में ही भारत ने दुनिया की नंबर-4 टीम चीन को 2-2 से ड्रॉ पर रोका था, जबकि टीम की 11 खिलाड़ी पहली बार वर्ल्ड कप खेल रही थीं।
भारत ने सेमीफाइनल में दक्षिण कोरिया को हराया
सेमीफाइनल की बात करें तो भारत को दक्षिण कोरिया से कड़ी टक्कर मिली। 12 पेनल्टी कॉर्नर में से 1 ही गोल में बदला, 44वें मिनट में इशिका और फिर कप्तान सलीमा टेटे ने गोल कर 2-1 से जीत दिलाई। दूसरी तरफ चीन को जापान ने 60 मिनट तक 0-0 पर रोका, फिर शूटआउट में चीन 4-2 से जीता। भारत के लिए गोलकीपर सविता और बिच्छू देवी दीवार बनी हैं। ड्रैग फ्लिकर दीपिका 6 मैच में 21 गोल दाग चुकी हैं, नवनीत के 10 गोल में 7 फील्ड गोल हैं। चीन के लिए झोंग जियाकी 9 गोल कर चुकी हैं। हेड टू हेड में 28 मैचों में चीन 12-11 से आगे है। कोच मारिन ने कहा, चीन बहुत अच्छी टीम है, लेकिन हमने वर्ल्ड कप में उनसे बेहतर खेल दिखाया। अब संयम रखना होगा।
