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EXCLUSIVE: 'द्रोणाचार्य' जीवनजोत सिंह के गुरुमंत्र ने किया कमाल, तीरंदाजों ने गोल्ड पर साधा निशाना

तीरंदाजी में दमदार प्रदर्शन पर के पर द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित आर्चरी कोच जीवनजोत सिंह ने टाइम्स नाउ से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह ये सारे मेडल देश के हैं। उन्होंने सभी को सभी को सपोर्ट करने के लिए देशवासियों को धन्यवाद दिया। उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों को प्रेशर मैनेज करने के लिए क्या खास तरीका अपनाने का गुरुमंत्र दिया था।

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जीवनजोत सिंह से खास बातचीत। फाइल फोटो

स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 के तीरंदाजी में भारतीय टीम ने परचम लहरते हुए दो गोल्ड मेडल जीते। ज्योति सुरेखा वेन्नम, चिकिता तानिपार्थी और पृथिका प्रदीप की भारतीय तीरंदाजी तिकड़ी ने महिलाओं के कंपाउंड तीरंदाजी टीम इवेंट के फाइनल में चीन को हराकर देश के लिए शानदार गोल्ड मेडल जीता। वहीं, भारत के कंपाउंड तीरंदाज साहिल राजेश और चिकिता तानिपार्थी ने साउथ कोरिया को शूट-ऑफ में हराकर एशियन गेम्स मिक्स्ड टीम गोल्ड मेडल जीता।

खिलाड़ियों के दमदार प्रदर्शन पर के पर द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित आर्चरी कोच जीवनजोत सिंह ने टाइम्स नाउ से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह ये सारे मेडल देश के हैं। उन्होंने सभी को सभी को सपोर्ट करने के लिए देशवासियों को धन्यवाद दिया। उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों को प्रेशर मैनेज करने के लिए क्या खास तरीका अपनाने का गुरुमंत्र दिया था।

सवाल- आर्चरी बहुत सक्सेसफुल हो रहा है अपना गोल्ड मेडल डिफेंड करने में इस पर क्या कहेंगे?

जीवनजोत सिंह का जवाब- मैं पहले तो सभी देशवासियों का धन्यवाद करना चाहता हूं जिन्होंने हमें सपोर्ट किया और यह देश का मेडल है। दो गोल्ड मेडल हम लेने में कामयाब हो चुके हैं और आगे भी जो पांच मेडल हमारे लास्ट एशियन गेम्स में थे, उसको और बेटर करके हम पांच से छह गोल्ड मेडल लेके जाएंगे। बच्चों का प्रदर्शन बहुत अच्छा है। इसके पीछे जो हमारी प्रिपरेशन थी कैंप्स में और जो सपोर्ट हमें गवर्नमेंट, साई (SAI) और हमारी फेडरेशन की तरफ से मिली, वो बहुत ज्यादा मैटर करती है।

सवाल- इन बच्चों के लिए भी कितना मैटर करता है जब आप लोग स्टैंड्स से चेयर कर रहे थे। क्योंकि बच्चे बहुत यंग-यंग भी हैं, 18 साल, 20 साल के?

जीवनजोत सिंह का जवाब- मैं जब से इंडिया टीम के साथ काम कर रहा हूं- 2013 में मैंने इंडिया टीम ज्वाइन की- तो जितने भी ये बच्चे हैं, उस टाइम सारे कोई 14-15 साल के थे। तो बार-बार इनसे वहां ग्रुप में डिस्कशन होता था। जब टूर्नामेंट चल रहा होता है। बच्चों को बताते थे कि 2014 के एशियन गेम्स में हमने यह किया, वह किया।दैट इज व्हाई, क्योंकि हम बच्चों का माइंड वहां कंपटीशन और प्रेशर से दूर लेके जाना चाहते हैं।

अगर प्रेशर में टारगेट पे देखते रहेंगे बार-बार, ओपोनेंट को देखते रहेंगे, तो कहीं न कहीं प्रेशर बढ़ता है। तो बच्चे का माइंड डाइवर्ट करने के लिए हम उनको और बातों में व्यस्त रखते हैं ताकि बच्चा दबाव से मुक्त रहकर अपनी शूटिंग और परफॉर्मेंस पर ध्यान दे पाए।

सवाल- क्या कन्वर्सेशंस रहते हैं? क्योंकि बोलते हैं ना कि जब ग्राउंड पे जाते हैं, आर्चरी की फील्ड पे जाते हैं, तो वो आर्चर ही होता है वहां पे जिसको ऑन-ग्राउंड डिसीजन लेना होता है। तो उन चीजों के लिए कैसे प्रिपेयर किया जाता है कि वहां पे जाके आपको फैसला करना है कि क्या बेस्ट है, क्या नहीं है?

कोच जीवनजोत सिंह का जवाब- एक्चुअली, जो मेरी ट्रेनिंग का तरीका रहा आज तक, जैसा मैं आपको बताना चाहता हूं कि जब मैंने इंडिया टीम ज्वाइन किया था, तो एशिया में हमारा कोई रैंक नहीं था। बट 2014 में हमने इंडिया टीम के लिए पांच मेडल लिए। उसमें एक ही चीज बच्चों को बताई मैंने कि जो भी एक्सपेरिमेंट हमने करने हैं, वो प्रैक्टिस में करने हैं, कंपटीशन में कुछ नहीं करना। जो भी चीज हमने की, प्रैक्टिस में की- प्रैक्टिस में अच्छा भी किया, बुरा भी किया। एक्सपेरिमेंट करने के बाद जो अच्छी चीज हमारे पास आई, उसी को कंपटीशन में फॉलो करवाया। तभी जाके हमारे रिजल्ट्स अच्छे हुए।

Umesh Kumar
उमेश कुमारauthor

उमेश कुमार पत्रकारिता में पिछले 7 वर्षों से सक्रिय हैं। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से करने के बाद उन्होंने डिजिटल मीडिया में बतौर स्पोर्ट्स राइटर अपनी मजबूत पहचान बनाई। उमेश ने अमर उजाला (प्रिंट), ईटीवी भारत (हैदराबाद), दैनिक भास्कर और दैनिक जागरण जैसे संस्थानों के साथ काम किया है। उमेश ने क्रिकेट की कई बायलेटरल सीरीज, आईपीएल, वर्ल्ड कप, प्रो कबड्डी लीग, फीफा वर्ल्ड कप, हॉकी वर्ल्ड कप और ओलंपिक जैसे बड़े राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों को कवर किया है। खेलों की गहरी समझ और डेटा-ड्रिवन स्टोरीटेलिंग उनकी लेखनी की खासियत है।

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