अध्यात्म

Vishwakarma Puja 2025: कब है विश्वकर्मा पूजा? जानिए सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Vishwakarma Puja 2025 Date, Muhurat, Puja Vidhi: सनातन धर्म में विश्वकर्मा पूजा का खास महत्व है। भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से कारोबार में तरक्की होती है और निर्माण कार्य में होने वाली समस्या से भी छुटकारा मिलता है। यहां से आप जान सकते हैं कि विश्वकर्मा पूजा सितंबर में कब है और साथ ही आप यहां से इसकी पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि जान सकते हैं।

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विश्वकर्मा पूजा 2025 तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि (pic credit: canva)

Vishwakarma Puja 2025 Date, Muhurat, Puja Vidhi: हर साल कन्या संक्रांति के दिन विश्वकर्मा पूजा का त्योहार मनाया जाता है। कहा जाता है विश्वकर्मा पूजा के दिन ही भगवान विश्वकर्मा समुद्र मंथन के दौरान प्रकट हुए थे। भगवान विश्वकर्मा को भगवान ब्रह्मा के सातवें पुत्र हैं। वो संसार से पहले शिल्पकार, वास्तुकार और इंजीनियर हैं। माना जाता है कि जिन घरों, कारखानों, फैक्ट्री आदि में में भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है वहां पर सदैव माता लक्ष्मी का वास बना रहता है। साथ ही, कारोबार में मुनाफा होता है। जो लोग लैपटॉप या मोबाइल से काम करते हैं उन्हें भी यह पूजा जरूर करनी चाहिए। ऐसा करने से काम में तरक्की होती है। यहां से आप विश्वकर्मा पूजा की डेट, पूजा का मुहूर्त जान सकते हैं। यहां पर आपको विश्वकर्मा पूजा की विधि की पूरी जानकारी मिलेगी।

विश्वकर्मा पूजा कब है? (Vishwakarma Puja Kab Hai 2025)

हर साल की तरह इस बार भी विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर, बुधवार को मनाई जाएगी।

विश्वकर्मा पूजा शुभ मुहूर्त (Vishwakarma Puja 2025 Shubh Muhurat)

सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश करने पर विश्वकर्मा जयंती मनाई जाती है। बता दें 16 सितंबर, मंगलवार के दिन रात में 1 बजकर 47 मिनट पर सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। ऐसे में 17 तारीख को सूर्योदय के समय से ही विश्वकर्मा पूजा का शुभ संयोग बनेगा। इसमें पूजा के लिए सबसे उत्तम समय सुबह 10 बजकर 43 मिनट से शुरू होकर दोपहर के 12 बजकर 16 मिनट तक रहेगा।

विश्वकर्मा पूजा विधि (Vishwakarma Puja Vidhi)

विश्वकर्मा पूजा के दिन सुबह स्नान के बाद अपने कारखाने, दुकान की सफाई करें। उसके बाद कारखानों में रखें औजारों की भी सफाई करें। फिर कारखाने में साफ चौकी पर विश्वकर्मा जी की मूर्ति स्थापित करें। उसके बाद विष्णु जी का ध्यान लगा के पूजन शुरू करें। विश्वकर्मा जी को धूप, दीप, फूल, अक्षत आदि अर्पित करें। भोग लगाएं और अंत में पूजा के बाद विश्वकर्मा जी की आरती करें। फिर आपको प्रसाद ग्रहण करना है और लोगों में भी प्रसाद बांटना है।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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