अध्यात्म

Veer Bal Diwas 2024: कब और क्यों मनाते हैं वीर बाल दिवस, क्‍या है साहिबजादों की शहादत का इतिहास, जानें इस दिन के महत्‍व को

Veer Bal Diwas 2024 (वीर बाल दिवस 2024 डेट): साल 2022 में पहली बार वीर बाल दिवस मनाया गया। इस दिन सिख धर्म के दसवें गुरु श्री गोविंद सिंह के बेटों की शहादत को याद किया जाता है। चलिए जानते हैं वीर बाल दिवस 2024 की डेट, वीर बाल दिवस क्यों मनाया जाता है, वीर बाल दिवस का इतिहास क्या है, कौन थे चार साहिबजादे और वीर बाल दिवस का महत्व क्या है?

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वीर बाल दिवस 2024 डेट

Veer Bal Diwas 2024 (वीर बाल दिवस 2024 डेट): भारत में हर साल 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाया जाता है। यह दिन सिखों के दसवें गुरु - गुरु गोबिंद सिंह जी के चार वीर पुत्रों के अद्वितीय बलिदान और साहस के प्रति सम्मानित जताने के लिए मनाया जाता है। वीर बाल दिवस गुरु जी के छोटे साहिबजादों - साहिबजादा जोरावर सिंह और साहिबजादा फतेह सिंह के बलिदान को समर्पित है। धर्म और मानवता की रक्षा के लिए जब उन्‍होंने अपने प्राण न्योछावर किए, तब साहिबजादा जोरावर सिंह की उम्र मात्र 9 वर्ष और साहिबजादा फतेह सिंह की उम्र मात्र 6 वर्ष थी।

वीर बाल दिवस क्‍यों मनाया जाता है

साल 2022 में 9 जनवरी को गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि 26 दिसंबर को श्री गुरु गोबिंद सिंह के पुत्रों साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह जी और बाबा फतेह सिंह जी की शहादत की स्मृति में वीर बाल दिवस मनाया जाएगा।

वीर बाल दिवस का इतिहास

सिख धर्म के दसवें गुरु श्री गोविंद सिंह के चार बेटे थे, अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह। साल 1699 में गोविंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की और ये चारों साहिबजादे खालसा का हिस्सा रहे।

साल 1705 की बात है, पंजाब में उस समय मुगलों का शासन हुआ करता था। मुगल गुरु गोविंद सिंह को पकड़ने के लिए पूरा जोर लगा रहे थे। इसी जद्दोजहद में गुरू गोविंद अपने परिवार से बिछड़ गए। उनकी पत्नी माता गुजरी अपने बेटों बाबा जोरावर सिंह, बाबा फतेह सिंह और रसोइए गंगू के साथ किसी गुप्त स्थान पर चली गईं। तब बाबा जोरावर मात्र 7 साल के थे और बाबा फतेह की उम्र 9 साल थी। लालच के चलते रसोइए गंगू ने सरहिंद के नवाब वजीर खां के हाथों उन सभी को पकड़वा दिया। उस समय तक बाबा अजीत सिंह और बाबा जुझार सिंह मुगलों से जंग के दौरान शहीद हो चुके थे।

नवाब वजीर खां ने माता गुजरी और दोनों छोटे साहिबजादों पर बहुत अत्याचार किए और धर्म बदलने के लिए कहा लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया। तब वजीर खान ने दोनों साहिबजादों को दीवार में जिंदा चुनवा दिया। उस दिन 26 दिसंबर की तारीख थी। जब ये बात माता गुजरी को पता चली तो उन्होंने भी अपने प्राण त्याग दिए।

उनकी शहादत का सम्मान करने के लिए भारत सरकार ने साल 2022 में घोषणा की थी कि 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जाएगा।

वीर बाल दिवस का महत्व

26 दिसंबर 1705 को बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की शहादत हुई थी। साल 2022 से वीर बाल दिवस को अंतिम सिख गुरु गोबिंद सिंह के चार साहिबजादों के बलिदान को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। वीर बाल दिवस भारतीय इतिहास के गौरवशाली अध्याय को याद करने का एक मौका देता है और आने वाली पीढ़ियों को सच्चाई और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने के लिए मनाया जाता है।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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