अध्यात्म

Vat savitri Purnima 2023 Date: कब रखा जाएगा साल का दूसरा वट सावित्री व्रत? जानें डेट

  • Authored by: लवीना शर्मा
  • Updated May 19, 2023, 05:51 PM IST

Vat Savitri Vrat 2023 Date: वट सावित्री पूर्णिमा व्रत (Vat Savitri Purnima Vrat 2023) जून में पड़ेगा। ये व्रत वट सावित्री अमावस्या (Vat Savitri Amavasya 2023) के ठीक 15 दिन बाद पड़ता है। मुख्य रूप से गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में वट पूर्णिमा व्रत (Vat Purnima Vrat 2023) रखा जाता है।

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Vat Purnima Vrat 2023 Date: वट सावित्री पूर्णिमा व्रत कब है?

Vat Savitri Purnima 2023 Date: वट सावित्री अमावस्या व्रत (Vat Savitri Amavasya Vrat 2023) के 15 दिन बाद वट सावित्री पूर्णिमा व्रत (Savitri Purnima Vrat) रखा जाता है। ये व्रत यूपी, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार, दिल्ली, हरियाणा कई राज्यों में रखा जाता है। हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है इस व्रत को करने से पति को लंबी आयु प्राप्त होती है। इस व्रत की कथा सावित्री और सत्यवान से जुड़ी है। कहते हैं ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन ही सावित्री ने अपने पति सत्यवान को यमराज से जीवित कराया था। जानिए इस साल वट सावित्री पूर्णिमा व्रत कब (Vat Savitri Vrat Purnima 2023 Kab Hai) रखा जाएगा।

Vat Purnima Vrat 2023 Date And Muhurat (वट सावित्री पूर्णिमा व्रत 2023 डेट)

वट सावित्री का व्रत ज्येष्ठ महीने में दो बार पड़ता है एक बार ज्येष्ठ अमावस्या पर दूसरी बार ज्येष्ठ पूर्णिमा पर। ज्येष्ठ अमावस्या वट सावित्री व्रत 19 मई को पड़ चुका है अब 3 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा वट सावित्री व्रत पड़ेगा। इस साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 3 जून को सुबह 11 बजकर 16 मिनट से शुरू होगी और इसकी समाप्ति 4 जून 2023 को सुबह 9 बजकर 11 मिनट पर होगी। ऐसे में पूर्णिमा तिथि का वट सावित्री व्रत 3 जून दिन शनिवार को रखा जाएगा।

इस साल वट सावित्री पूर्णिमा व्रत बेहद शुभ योग में पड़ रहा है। पूर्णिमा वट सावित्री व्रत के दिन शिवयोग रहेगा। कहते हैं इस योग में शुभ काम, पूजा-पाठ करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

Vat Savitri Purnima Vrat Significance (ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन वट पूर्णिमा व्रत क्यों मनाया जाता है?)

वट सावित्री पूर्णिमा व्रत मुख्य तौर पर गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में मनाया जाता है वहीं उत्तर भारत में ज्येष्ठ अमावस्या के दिन वट सावित्री व्रत पड़ता है। इन दोनों ही व्रत की पूजा विधि से लेकर व्रत कथा तक सबकुछ एक है।

लवीना शर्मा
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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