अध्यात्म

Vat Savitri Puja 2024: बरगद का पेड़ न मिलने पर वट सावित्री की पूजा कैसे करें

Vat Savitri Puja 2024: वट सावित्री व्रत में बरगद के पेड़ की पूजा जरूरी मानी जाती है। लेकिन अगर घर के पास बरगद का पेड़ न हो तो ऐसे में ये पूजा कैसे करेंगे इस बारे में में हम आपको बताएंगे।

Image

Vat Savitri Vrat Kaise Kare Agar Bargad Ka Tree Na Mile

Vat Savitri Puja Without Bargad Tree: हर साल ज्येष्ठ अमावस्या के दिन वट सावित्री पूजा पड़ती है। इस पूजा में विशेष रूप से बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है। कहते हैं इस पेड़ की पूजा के बिना ये व्रत अधूरा माना जाता है। लेकिन अगर आपके घर के पास वट यानि बरगद का पेड़ नहीं है तो ऐसे में वट सावित्री की पूजा कैसे कर सकते हैं। इस बारे में हम आपको बताएंगे जिससे पूजा का संपूर्ण फल आपको प्राप्त हो सके।

वट सावित्री व्रत में क्यों होती है बरगद के पेड़ की पूजा

पौराणिक मान्यताओं अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या के दिन सावित्री के पति सत्यवान को वट यानि बरगद के पेड़ के नीचे अपने प्राण प्राप्त हुए थे। यही वजह है कि इस अमावस्या पर बरगद के पेड़ की पूजा करते हुए सुहागिन स्त्रियां वट सावित्री व्रत रखती हैं। कहते हैं वट वृक्ष की पूजा से ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

बरगद का पेड़ न मिले तो कैसे करें वट सावित्री पूजा

अगर आपके घर के आस-पास बरगद का पेड़ नहीं है तो आप कहीं से इस पेड़ की टहनी या छोटी डाली मंगवा लीजिए। फिर इसकी विधि विधान पूजा करें। इससे भी आपका व्रत संपूर्ण माना जाएगा। इस दिन कई जगह लोग बरगद की टहनी बेचते भी हैं आप चाहें तो इसे वहां से भी खरीद सकते हैं।लेकिन अगर आपको बरगद की टहनी भी नहीं मिल रही है तब आप तुलसी के पेड़ के पास बैठकर भी वट सावित्री व्रत की पूजा कर सकते हैं। इससे भी आपकी पूजा संपूर्ण मानी जाएगी। इस दौरान वट सावित्री पूजा के सभी नियमों का पालन करें। साथ ही तुलसी माता से अपनी सारी कामना भी बता दें।

वट वृक्ष पूजन मंत्र

अवैधव्यं च सौभाग्यं देहि त्वं मम सुव्रते।

पुत्रान्‌ पौत्रांश्च सौख्यं च गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तुते।।

यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोऽसि त्वं महीतले।

तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च सम्पन्नं कुरु मा सदा।।

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

और पढ़ें
End of Article