हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणपति पूजन के बिना अधूरी मानी जाती है। हर महीने आने वाली विनायक चतुर्थी भगवान गणेश की आराधना के लिए बेहद शुभ मानी जाती है। इन्हीं चतुर्थी तिथियों में वरदा विनायक चतुर्थी का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से गणेश पूजा करने पर सुख, समृद्धि और मनोकामनाओं की प्राप्ति होती है।
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इस बार वरदा विनायक चतुर्थी की तारीख को लेकर लोगों में थोड़ी उलझन बनी हुई है। कई पंचांगों में तिथि का समय अलग-अलग दिखाई दे रहा है, जिसके कारण लोग जानना चाहते हैं कि यह व्रत 19 मई को रखा जाएगा या 20 मई को। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चतुर्थी तिथि और सूर्योदय के आधार पर व्रत की सही तिथि तय की जाती है।
कब शुरू होगी चतुर्थी तिथि
पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि 19 मई की शाम से प्रारंभ होकर 20 मई तक रहने की संभावना मानी जा रही है। ऐसे में उदया तिथि को महत्व देने वाले लोग 20 मई को वरदा विनायक चतुर्थी का व्रत रख सकते हैं। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों में पंचांग के अनुसार तिथि में थोड़ा अंतर देखने को मिल सकता है।
क्यों खास मानी जाती है वरदा विनायक चतुर्थी
‘वरदा’ शब्द का अर्थ होता है वरदान देने वाला। मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में सकारात्मकता आती है। कई भक्त इस दिन उपवास रखकर गणेश मंत्रों का जाप भी करते हैं।
शुभ पूजा मुहूर्त
गणेश पूजा के लिए सुबह का समय सबसे शुभ माना जाता है। भक्त स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनकर भगवान गणेश को दूर्वा, मोदक, लाल फूल और सिंदूर अर्पित करते हैं। मध्यान्ह काल में पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।
पूजा में रखें इन बातों का ध्यान
पूजा के दौरान गणेश जी को तुलसी अर्पित नहीं की जाती। इसके अलावा दूर्वा और मोदक का भोग विशेष रूप से शुभ माना जाता है। पूजा के समय गणेश मंत्र और गणेश चालीसा का पाठ करने की भी परंपरा है।
व्रत का धार्मिक महत्व
मान्यता है कि वरदा विनायक चतुर्थी का व्रत रखने से बुद्धि, सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। कई लोग इस दिन नए कार्य की शुरुआत भी शुभ मानते हैं।भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए श्रद्धा और सच्चे मन से की गई पूजा सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है।
