Vaishakh Amavasya 2024 Vrat Vidhi, Time And Upay: वैशाख अमावस्या का दिन बहुत ही पवित्र तथा भगवान को समर्पित यह पवित्र दिवस भक्ति तथा सम्पूर्ण समर्पण से भगवान श्री कृष्ण जी के प्रति श्रद्धा भाव अर्पित करने का है। इस वर्ष यह वैशाखी अमावस्या 08 मई को है। इस दिन व्रत रहते हैं। यह व्रत पापों के प्रायश्चित के लिए है। प्रातःकाल मौन रखकर संगम स्नान या किसी पवित्र नदी में स्नान करते हैं। यदि आप घर पर हैं तो पहले स्नान के पात्र में गंगा जल डालिये फिर जल उसके बाद तिल व आंवला तब स्नान करें। प्रातःकाल ब्रम्हमुहूर्त में पूजा करें। पूरे दिन अपने इष्ट भगवान के नाम का मानसिक जप करें। अपने इष्ट के नाम का निरन्तर जप करते रहें। व्रत निराजल या फलाहार रहें। अगले दिन प्रातःकाल पारन करें। महिलाएं व पुरुष सभी व्रत रहें। जिन माताओं व बहनों को मासिक धर्म है वह व्रत रख सकती हैं लेकिन भगवान के मूर्ति का स्पर्श व पूजा नहीं करनी है। मन ही मन केवल भगवान के नाम का जप करें।
वैशाख अमावस्या समय 2024 (Today Amavasya Timing 2024)
वैशाख अमावस्या 7 मई की सुबह 11 बजकर 40 मिनट से 8 मई की सुबह 8 बजकर 51 मिनट तक रहेगी।
वैशाख अमावस्या पर क्या करना चाहिए
जो लोग सफलता चाहते हैं उनके लिए यह अमावस्या वरदान है। इस अमावस्या को व्रत रखकर विशेष पूजा पाठ करके भंडारा करना चाहिए। जिनके पितरों में किसी की कभी अकाल मृत्यु हुई है वो इस दिन विशेष तांत्रिक अनुष्ठान भी कर सकते हैं। त्रिपिंडी श्राद्ध भी करवा सकते हैं। जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष हो वो आज त्रिपिंडी श्राद्ध करके उसकी शांति करवा सकते हैं।
वैशाख अमावस्या उपाय
इस दिन दुर्गासप्तशती का पाठ करना चाहिए। श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ विशेष फलदायी है। प्रातःकाल पवित्र नदी में स्नान करके दान पुण्य करना चाहिए। संकटों से मुक्ति के लिए श्री रामचरितमानस में सुंदरकांड का पाठ करना बहुत ही लाभकारी होता है। इस दिन नदी में स्नान करते समय गायत्री मंत्र का जप करते रहें तथा स्नान के उपरांत नदी के तट पर पवित्र आसन पर बैठकर गीता का पाठ करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। संगम स्नान का विशेष महत्व है।
वैशाख अमावस्या पर बंगलामुखी अनुष्ठान का महत्व
राजनीति में विजय प्राप्ति हेतु तथा किसी भी प्रकार की बाधाओं को समाप्त करने के लिए मौनी अमावस्या के दिन बंगलामुखी पूजा आरम्भ कराकर सकुशल विधिवत सम्पन्न कराने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
वैशाख अमावस्या पर करें विष्णु पूजा
इस शुभ मुहूर्त में बृहस्पति तथा चंद्रमा के बीज मंत्र का जप करें। महामृत्युंजय मंत्र भी फलदायी है। इस समय श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ बहुत लाभ देता है।
