अध्यात्म

आज की रात जरूर करें इस शालिग्राम स्त्रोत का पाठ, अकाल मृत्यु और रोग से होगा बचाव

Shaligram Stotra Path: आज तुलसी विवाह की रात शालिग्राम स्त्रोत का पाठ जरूर करना चाहिए। मान्यता है कि इसका जप करने से ब्रह्महत्या जैसे महापाप भी खत्म हो जाते हैं। इसके साथ ही अकाल मृत्यु नहीं होती है। रोगों का भी नाश हो जाता है और अंत में विष्णुलोक की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं कि यह स्त्रोत क्या है और इसका पाठ कैसे करें?

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जरूर पढ़ें भगवान शालिग्राम स्त्रोत

Shaligram Stotra Path: तुलसी विवाह का पर्व भगवान विष्णु और माता तुलसी के मिलन का प्रतीक है, और इस अवसर पर शालिग्राम भगवान की पूजा विशेष फलदायी होती है। आज 2 नवंबर 2025 को तुलसी विवाह के दिन श्री शालिग्राम स्तोत्र का पाठ करने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है। यह स्तोत्र भविष्योत्तर पुराण में श्रीकृष्ण और युधिष्ठिर के संवाद के रूप में वर्णित है। इसका जप करने से ब्रह्महत्या जैसे महापाप भी नष्ट हो जाते हैं, अकाल मृत्यु टलती है, सभी रोग दूर होते हैं और विष्णुलोक की प्राप्ति होती है। गोधूलि बेला में तुलसी विवाह के समय इस स्तोत्र का पाठ करने से विवाह का फल दस गुना बढ़ जाता है। पूजा के दौरान शालिग्राम के सामने घी का दीपक जलाकर, तुलसी दल चढ़ाकर और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र के साथ इस स्तोत्र का 1, 3 या 11 बार पाठ करें।

श्री शालिग्राम स्तोत्र का पूर्ण पाठ

श्री गणेशाय नमः।

अस्य श्रीशालिग्रामस्तोत्रमन्त्रस्य श्रीभगवान् ऋषिः। नारायणो देवता। अनुष्टुप् छन्दः। श्रीशालिग्रामस्तोत्रमन्त्रजपे विनियोगः॥

युधिष्ठिर उवाच।

श्रीदेवदेव देवेश देवतार्चनमुत्तमम्।

तत्सर्वं श्रोतुमिच्छामि ब्रूहि मे पुरुषोत्तम॥१॥

श्रीभगवानुवाच।

गण्डक्यां चोत्तरे तीरे गिरिराजस्य दक्षिणे।

दशयोजनविस्तीर्णा महाक्षेत्रवसुन्धरा॥२॥

शालिग्रामो भवेद्देवो देवी द्वारावती भवेत्।

उभयोः सङ्गमो यत्र मुक्तिस्तत्र न संशयः॥३॥

शालिग्रामशिला यत्र यत्र द्वारावती शिला।

उभयोः सङ्गमो यत्र मुक्तिस्तत्र न संशयः॥४॥

आजन्मकृतपापानां प्रायश्चित्तं य इच्छति।

शालिग्रामशिलावारि पापहारि नमोऽस्तु ते॥५॥

अकालमृत्युहरणं सर्वव्याधिविनाशनम्।

विष्णोः पादोदकं पीत्वा शिरसा धारयाम्यहम्॥६॥

शङ्खमध्ये स्थितं तोयं भ्रामितं केशवोपरि।

अङ्गलग्नं मनुष्याणां ब्रह्महत्यादिकं दहेत्॥७॥

स्नानोदकं पिवेन्नित्यं चक्राङ्कितशिलोद्भवम्।

प्रक्षाल्य शुद्धं तत्तोयं ब्रह्महत्यां व्यपोहति॥८॥

अग्निष्टोमसहस्राणि वाजपेयशतानि च।

सम्यक् फलमवाप्नोति विष्णोर्नैवेद्यभक्षणात्॥९॥

नैवेद्ययुक्तां तुलसीं च मिश्रितां विशेषतः पादजलेन विष्णोः।

योऽश्नाति नित्यं पुरतो मुरारेः प्राप्नोति यज्ञायुतकोटिपुण्यम्॥१०॥

खण्डिताः स्फुटिता भिन्ना वन्हिदग्धास्तथैव च।

शालिग्रामशिला यत्र तत्र दोषो न विद्यते॥११॥

न मन्त्रः पूजनं नैव न तीर्थं न च भावना।

न स्तुतिर्नोपचारश्च शालिग्रामशिलार्चने॥१२॥

ब्रह्महत्यादिकं पापं मनोवाक्कायसम्भवम्।

शीघ्रं नश्यति तत्सर्वं शालिग्रामशिलार्चनात्॥१३॥

नानावर्णमयं चैव नानाभोगेन वेष्टितम्।

तथा वरप्रसादेन लक्ष्मीकान्तं वदाम्यहम्॥१४॥

नारायणोद्भवो देवश्चक्रमध्ये च कर्मणा।

तथा वरप्रसादेन लक्ष्मीकान्तं वदाम्यहम्॥१५॥

कृष्णे शिलातले यत्र सूक्ष्मं चक्रं च दृश्यते।

सौभाग्यं सन्ततिं धत्ते सर्व सौख्यं ददाति च॥१६॥

वासुदेवस्य चिह्नानि दृष्ट्वा पापैः प्रमुच्यते।

श्रीधरः सुकरे वामे हरिद्वर्णस्तु दृश्यते॥१७॥

वराहरूपिणं देवं कूर्माङ्गैरपि चिह्नितम्।

गोपदं तत्र दृश्येत वाराहं वामनं तथा॥१८॥

पीतवर्णं तु देवानां रक्तवर्णं भयावहम्।

नारसिंहो भवेद्देवो मोक्षदं च प्रकीर्तितम्॥१९॥

शङ्खचक्रगदाकूर्माः शङ्खो यत्र प्रदृश्यते।

शङ्खवर्णस्य देवानां वामे देवस्य लक्षणम्॥२०॥

दामोदरं तथा स्थूलं मध्ये चक्रं प्रतिष्ठितम्।

पूर्णद्वारेण सङ्कीर्णा पीतरेखा च दृश्यते॥२१॥

छत्राकारे भवेद्राज्यं वर्तुले च महाश्रियः।

चिपिटे च महादुःखं शूलाग्रे तु रणं ध्रुवम्॥२२॥

ललाटे शेषभोगस्तु शिरोपरि सुकाञ्चनम्।

चक्रकाञ्चनवर्णानां वामदेवस्य लक्षणम्॥२३॥

वामपार्श्वे च वै चक्रे कृष्णवर्णस्तु पिङ्गलम्।

लक्ष्मीनृसिंहदेवानां पृथग्वर्णस्तु दृश्यते॥२४॥

लम्बोष्ठे च दरिद्रं स्यात्पिण्गले हानिरेव च।

लग्नचक्रे भवेद्याधिर्विदारे मरणं ध्रुवम्॥२५॥

पादोदकं च निर्माल्यं मस्तके धारयेत्सदा।

विष्णोर्द्दष्टं भक्षितव्यं तुलसीदलमिश्रितम्॥२६॥

कल्पकोटिसहस्राणि वैकुण्ठे वसते सदा।

शालिग्रामशिलाबिन्दुर्हत्याकोटिविनाशनः॥२७॥

तस्मात्सम्पूजयेद्ध्यात्वा पूजितं चापि सर्वदा।

शालिग्रामशिलास्तोत्रं यः पठेच्च द्विजोत्तमः॥२८॥

स गच्छेत्परमं स्थानं यत्र लोकेश्वरो हरिः।

सर्वपापविनिर्मुक्तो विष्णुलोकं स गच्छति॥२९॥

दशावतारो देवानां पृथग्वर्णस्तु दृश्यते।

ईप्सितं लभते राज्यं विष्णुपूजामनुक्रमात्॥३०॥

कोट्यो हि ब्रह्महत्यानामगम्यागम्यकोटयः।

ताः सर्वा नाशमायान्ति विष्णुनैवेद्यभक्षणात्॥३१॥

विष्णोः पादोदकं पीत्वा कोटिजन्माघनाशनम्।

तस्मादष्टगुणं पापं भूमौ बिन्दुनिपातनात्॥३२॥

इति श्रीभविष्योत्तरपुराणे श्रीकृष्णयुधिष्ठिरसंवादे शालिग्रामस्तोत्रं सम्पूर्णम्।

क्या है इस स्त्रोत का लाभ?

युधिष्ठिर भगवान श्रीकृष्ण से पूछते हैं कि देवताओं की सर्वोत्तम पूजा क्या है। श्रीकृष्ण बताते हैं कि गंडकी नदी के उत्तर तट पर हिमालय के दक्षिण में दस योजन का क्षेत्र शालिग्राम है, जहां शालिग्राम और द्वारका शिला का संगम मुक्ति देता है। शालिग्राम शिला का जल पापहर है, इसका पादोदक पीने से अकाल मृत्यु और रोग नष्ट होते हैं। शंख में घुमाया हुआ जल ब्रह्महत्या जैसे पाप जला देता है। विष्णु का नैवेद्य खाने से हजारों यज्ञों का फल मिलता है, और तुलसी मिश्रित पादजल से कोटि यज्ञों का पुण्य प्राप्त होता है।

टूटी-फूटी शालिग्राम में भी दोष नहीं होता है, इसके पूजन में मंत्र-तीर्थ की आवश्यकता नहीं है। शालिग्राम पूजा से मन-वाणी-काया के सभी पाप शीघ्र नष्ट होते हैं। विभिन्न रंग-आकार की शालिग्राम में अलग-अलग अवतारों का वास है – कृष्ण रंग में वासुदेव, पीत में नारसिंह, शंख-चक्र में दामोदर रूप है। छत्र आकार राज्य देता है, गोलाकार धन, चिपटा दुःख देता है। शालिग्राम का बिंदु कोटि हत्या नष्ट करता है, और इसका स्तोत्र पढ़ने से विष्णुलोक प्राप्ति होती है। पादोदक पीने से कोटि जन्मों के पाप नष्ट होते हैं।

तुलसी विवाह पर पाठ की विधि

तुलसी विवाह की पूजा के बाद शालिग्राम के सामने आसन लगाकर इस स्तोत्र का पाठ करें। पहले 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' 11 बार जपें। घी का दीपक जलाएं, तुलसी दल चढ़ाएं। पाठ समाप्ति पर 'ॐ शालिग्रामाय नमः' बोलकर प्रणाम करें। परिवार सहित पाठ करें तो पुण्य दोगुना होता है। अविवाहित कन्याएं पाठ कर अच्छे वर की कामना करें। इस स्तोत्र से घर में विष्णु कृपा का वास होता है और तुलसी विवाह का फल अक्षय हो जाता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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