अध्यात्म

घर पर बिना पंडित के तुलसी विवाह कैसे करें? जानें शालिग्राम- तुलसी विवाह करने का आसान तरीका

Ghar Per Tulsi Vivah Kaise Karen (घर पर बिना पंडित के तुलसी विवाह कैसे करें): आज तुलसी विवाह है और अगर आप किसी कारण से अपने घर पर पंडित जी को नहीं बुला सकते हैं तो आपको यहां से मदद मिलने वाली है। यहां बताया गया है कि आज आप बिना पंडित जी के घर पर तुलसी विवाह कैसे कर सकते हैं।

Image

बिना पंडित के घर पर तुलसी विवाह कैसे करें (pic credit: canva)

Ghar Per Tulsi Vivah Kaise Karen (घर पर बिना पंडित के तुलसी विवाह कैसे करें): सबसे पहले तुलसी का गमला रखें और साथ में एक पाटा भी रखें। पाटे पर स्वास्तिक बनाएं और फिर इसके ऊपर पीले रंग का वस्त्र बिछाएं। पाटे पर शालिग्राम जी के लिए आसन लगाएं। तुलसी का विवाह शालिग्राम जी से कराया जाता है तो इसके बाद रंगोली बनाएं और साथ ही शालिग्राम जी के आसन के सामने स्वास्तिक बनाएं। इसके बाद शालिग्राम जी को आसन पर विराजमान करें। फिर कलश की स्थापना करें। एक कलश जल से भरकर रख दें और उसमें हल्दी, सुपारी, सिक्का, थोड़े तिल और फूल डालकर आम के पत्ते लगा दें। अब कलश के ऊपर नारियल रखें। इसके बाद गणेश जी की मूर्ति को शालिग्राम जी के बगल में विराजमान करें। अब हाथ जोड़कर संकल्प करें- हे तुलसी मैया, हे शालिग्राम भगवान, आज मैं आपका विवाह संपन्न करा रही हूं। अगर कोई गलती हो जाए तो मुझे क्षमा करें।

इसके बाद विवाह की विधि शुरू करें। जिसमें सबसे पहले जल के छींटे डालें। अब देसी घी का दीपक जलाएं। अब गणेश जी की पूजा करें। तिलक, रोली, कलावा और मोदक चढ़ाएं। फिर कलश की पूजा करें। तिलक, रोली, कलावा और मोदक चढ़ाएं। अब पीली हल्दी में दूध या पानी मिलाकर 5 बार शालिग्राम भगवान और तुलसी जी को लगाएं। इसके बाद 5 बाद शालिग्राम जी को मेहंदी लगाएं और तुलसी जी को भी मेहंदी लगाएं। फिर शालिग्राम जी को चंदन से और तुलसी जी को रोली से तिलक करें। अब वस्त्र चढ़ाएं। शालिग्राम जी को पीले रंग का जनेऊ और कलावा समर्पित करें और तुलसी जी को लाल रंग की चुनरी चढ़ाएं। अब फूलों की दो माला लें। एक माला को शालिग्राम जी से छुआ कर तुलसी माता को पहनाएं और दूसरी माला को तुलसी जी से स्पर्श कराकर शालिग्राम जी पहनाएं। इसके बाद तुलसी जी को श्रृंगार का सामान चढ़ाएं। अब एक पीला कपड़ा लें और उसमें सुपारी और सिक्का रखें। फिर इसी कपड़े को तुलसी जी की चुनरी से बांध दें और शालिग्राम जी को पहना दें। ये गढ़जोड़ा है। फिर 7 बार फेरे कराएं। अब एक सिंदूर की डिबिया लें और एक सिक्का लें। इस सिक्के को शालिग्राम जी से स्पर्श कराके तुलसी जी को लगा दें। फिर अपने सीधे हाथ में कुछ रुपये फूल और जल लेकर कन्यादान का संकल्प लें। इसके बाद आपको जो भी बर्तन, सोना, चांदी, कपड़े समर्पित करने हैं आप कर सकते हैं। फिर हाथ में तिल और फूल लेकर तुलसी जी की कथा सुनें। इस तिल को जल के लोटे में डालें और थोड़े शालिग्राम भगवान को समर्पित करें। फिर आरती करें और जल लेकर आंचवना करें। तुलसी विवाह पूर्ण हुआ।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

और पढ़ें
End of Article