Types Of Teej 2025 (तीज कितने प्रकार की होती है): हिंदू धर्म में कई सारे तीज-त्योहार होते हैं। लेकिन जब भी इन त्योहारों की बात आती है तो तीज का नाम जरूर आता है। तीज का त्योहार महिलाओं के लिए खास है। इस त्योहार में सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुरक्षा के लिए व्रत रखती हैं और कुंवारी कन्याएं भोलेनाथ जैसा पति पाने के लिए इस व्रत को रखती हैं। लेकिन तीज एक तरह का नही होता है। असल में सात तरह का तीज होता है। यहां से आप सात तरह के तीज के बारे में जान सकते हैं।
Seven Different Types Of Teej Festival-
1. हरियाली तीज
सावन के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज मनाई जाती है। ये तीज सुहागिन महिलाएं और कुवांरी कन्याएं रखती हैं। इसमें महिलाएं झूला झूलती हैं और गीत गाती हैं। इस तीज में कपड़े भी हरे रंग के पहने जाते हैं।
2. कजरी तीज
भाद्रपद महीने के कृ्ष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं दिनभर व्रत रखती हैं और रात में चांद और नीम के पेड़ की पूजा करती हैं। इस दिन महिलाएं कजरी गीत गाती हैं और मिट्टी से बने गौरी-शंकर की भी पूजा करती हैं।
3. हरतालिका तीज
भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को देशभर में हरतालिका तीज मनाई जाती है। ये त्योहार सुहागिन महिलाओं के साथ कुवांरी महिलाएं भी रखती हैं, जिससे उन्हें शिव जैसा पति मिलता है। हरतालिका तीज का व्रत निर्जला उपवास के साथ किया जाता है।
4. आखा तीज
अक्षय तृतीया को आखा तीज के नाम से जाना जाता है। इस दिन दान-पुण्य, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। साथ ही उस दिन पितरों को तर्पण भी किया जाता है। इस दिन पूरा दिन ही शुभ मुहूर्त रहता है और यह सभी कार्यों को करने के लिए शुभ होती है। इस दिन को स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना गया है।
5. गणगौर तृतीया
गणगौर तृतीया को यूपी और मध्य प्रदेश में खासतौर से मनाया जाता है। ये त्योहार चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। इस दिन शादीशुदा और कुवांरी महिलाएं शिवजी और पार्वती जी की पूजा करती हैं।
6. रंभा तीज
रंभा तीज का त्योहार हर साल ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। इस दिन व्रत करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और खुशहाल जीवन के लिए इस व्रत को रखती हैं।
7. वराह तीज
भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तृतीया को वराह जयंती मनाई जाती है। इसे वराह तीज भी कहते हैं। कहते हैं कि सबसे पहले भगवान विष्णु ने नील वराह का अवतार लिया फिर आदि वराह बनकर हिरण्याक्ष का वध किया इसके बाद श्वेत वराह का अवतार नरसिंह अवतार के बाद लिया था। कहते हैं कि भगवान वराह ने समुद्र में छुपाकर रखी गई भूदेवी को इसी दिन हिरण्याक्ष के चंगुल से बचाया था।
