अध्यात्म

तरावीह की नमाज कैसे की जाती है, इस समय कौन सी दुआ पढ़ी जाती है, जानिए स्टेप बाय स्टेप पूरी जानकारी

रमजान में हर दिन पांच वक्त की नमाज अदा करने के अलावा तरावीह की नमाज भी पढ़ी जाती है। जानिए इस नमाज को कब और कैसे पढ़ना चाहिए।

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Taraweeh ki Namaz ka Tarika

रमजान में तरावीह की नमाज पढ़ने का विशेष महत्व माना जाता है। इसे ईशा की नमाज के बाद पढ़ा जाता है जिसमें कुल 20 रकात होती है। हर दो रकात के बाद सलाम फेरा जाता है। इस नमाज के जरिए मुस्लिम लोग अपने परिजनों की सलामती की दुआ करते हैं। इस्लामिक धार्मिक मान्यताओं अनुसार जो कोई भी तरावीह की नमाज करता है उसके घर में बरकत होती है। चलिए जानते हैं इस नामत को पढ़ने का सही तरीका और इसकी दुआ।

तरावीह की नमाज़ करने का तरीका

तरावीह की नमाज़ पढ़ने का तरीका अलग-अलग हो सकता है। अगर आप किसी के पीछे तरावीह पढ़ रहे हैं तो इस नमाज में कुरान की तिलावत की जाती है। वहीं, अगर आप घर पर तरावीह पढ़ रहे हैं, तो दो-दो रकात में 30वे पारे की 10 सूरतें पढ़ी जाती हैं।

  • सबसे पहले तरावीह की नमाज़ की नीयत करें
  • फिर “अल्लाहु अकबर” कहकर हाथ नाभि के नीचे बांध लें।
  • सना दुआ को पढ़ें।
  • आऊज (आऊजो बिल्लाहे मिनश) और बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम कहें।
  • इसके बाद इमाम साहब सूरह फातिहा और कुरआन शरीफ की आयतें पढ़ेंगे, जिसे आपको ध्यान से सुनना है।
  • रुकू करें और रुकू की तस्बीह पढ़ें।
  • सजदा करें और सजदे की तस्बीह पढ़ें।
  • इमाम साहब के साथ “अल्लाहु अकबर” कहते हुए खड़े हो जाएं।
  • पहली रकात की तरह अब दूसरी रकात भी इसी तरह पूरी करें।
  • अब आपकी दो रकात तरावीह की नमाज़ पूरी हो गई।
  • इमाम साहब इसी तरह दो-दो रकात करके 20 रकात पूरी करेंगे।
  • हर चार रकात पूरी होने के बाद तरावीह की दुआ पढ़ें।
  • 20 रकात तरावीह पूरी होने के बाद अल्लाह से दुआ मांगें।
  • फिर इमाम के साथ 3 रकात वितर की नमाज़ पढ़ें।
(नोट- तरावीह के नमाज के तरीके की जानकारी islamicjankari.com से ली गई है)

तारावीह की नमाज का तरीका महिलाओं के लिए

यह नमाज़ ईशा की नमाज़ के बाद की जाती है, जिसमें कुल 20 रकात होती हैं और हर 2 रकात के बाद सलाम फेरना होता है। एक महिला घर पर ही अपनी क्षमता के अनुसार तरावीह की नमाज़ पढ़ सकती है और जितना संभव हो सके सुन्नत का ध्यान रख सकती है। महिलाओं के लिए 20 रकात की नमाज़ होती है, जबकि पुरुषों के लिए तरावीह में कुरान पढ़ना जरूरी माना जाता है।

तरावीह की दुआ हिंदी में

'सुबहान ज़िल मुल्कि वल मलकूत, सुब्हान ज़िल इज्ज़ति वल अज़मति वल हय्बति वल कुदरति वल किबरियाई वल जबरूत, सुबहानल मलिकिल हैय्यिल लज़ी ला यनामु वला यमुतू सुब्बुहून कुददुसुन रब्बुना व रब्बुल मलाइकति वर रूह, अल्लाहुम्मा अजिरना मिनन नारि या मुजीरू या मुजीरू या मुजीर'

तरावीह की दुआ अंग्रेजी में

'Subhana zil mulki wal malakut. subhana zil izzati wal azmati wal haibati wal qudrati wal kibriya ay wal jabaroot. subhanal malikil hayyil lazi la yanamu wala yamooto subbuhun quddusun rabbuna Wa Rabbul Malaikati War Ruh- Allahumma Ajirna Minan Naar Ya Mujiro Ya Mujiro Ya Mujeer.'

पुरुषों के लिए तरावीह की नियत

नियत की मैंने दो रकात नमाज़ सुन्नत तरावीह, अल्लाह तआला के वास्ते, वक्त इशा का, पीछे इस इमाम के मुहं मेरा कअबा शरीफ़ की तरफ़, अल्लाहु अकबर कह कर अपना हाथ बांध लेना है और फिर सना पढ़ेंगे !

महिलाओं के लिए तरावीह की नियत

नियत करती हूं मैं दो रकात नमाज़ सुन्नत तरावीह की, अल्लाह तआला के वास्ते, वक्त इशा का, मुहं मेरा मक्का कअबा की तरफ, अल्लाहु अकबर..फिर हाथ ऊपर करके नियत बांध लेते हैं।

तरावीह की नमाज़ में पढ़ी जाने वाली दस सूरतें

सूरह फिल- अलम तरा कैफा फाअला रब्बुका बियस हाबिल फील। अलम यज़अल कै दाहुम फी तजलील। वा अर्सला अलैहिम तैरन अबाबील। तर्मीहिम बिही जारतिम में सिज्जील। फजा अलाहुम का सिफिम माकूल।

सूरह नास- कुल अऊजू बि रब्बिन नासि. मलिकिन नासि. इला हिन्नासि,मिन श र्रि ल वस् वासिल खन्ना सि,अल्लज़ी युवस विसु फी सुदु रिन्नासी,मिनल जिन्नति वन्नास.

सुरह कुरैश- लि इलाफि कुरैश। इलाफिहिम रिहलतश शिताई वस सैफ। फल यअबुदू रब्बा हाज़ल बैत। अल्लज़ी अत अमाहुम मिन जुआ। व आमना हुम मिन खौफ।

सूरह माऊन- अ र अै तल लज़ी युकज़्ज़िबु बिद्दीन, फ जालिकल लज़ी यदुअ उल यतीम वला यहुहुद्दु अला तआमिल मिस्कीन, फ वै लुल लिल मुसल लीनल, लज़ी न हुम अन सलातिहिम साहूनल, लज़ी न हुम युराऊ न व यम नऊनल माऊन।

सूरह कौसर- इन्ना अअतैना कल कौसर, फसल लि लि रब्बि क वन हर, इन न शानि अ क हुवल अबतर।

सूरह काफिरून- कुल या अय्युहल काफ़िरून। ला अबदु माँ ता अबुदन। वाला अन्तुम आबिदु न माँ आबुद। वला अना आ बिदुम माँ अब ततुम। वला अन्तुम आबिदु न माँ आ बू दू। ला कम दिनु कम व लिय दीन।

सूरह नस्र- इज़ा ज अ नसरुल्लाहि वल फ़तहु। व र अै तन ना स यदखुलू न फी दीनिल्लाहि अफ़वाजा। फ़सब्बिह बिहम्दि रब्बि क वस्तग़ फ़िर हू इन्नहु का न तव्वाबा।सूरह लहब- तब्बत यदा अबी ल हबिव व तब्ब। मा अग्ना अनहु मालुहू वमा कसब। सयस्ला नारन ज़ा त ल ह बिव। वम र अतुहू हम्मा लतल हतब। फी जीदिहा हब्लुम मिन मसद।

सूरह इखलास- कुल हुवल्लाहु अहद अल्लाहुस्समद लम यलिद व् लम यूलद वलम यकुल्लहू कुफुवन अहद

सूरह फलक- कुल अऊजू बि रब्बिल फलक। मिन शर्रि मां खलक। वमिन शर्रि ग़ासिकीन इज़ा वकब। व् मिन शर्रिन नफ्फा साति फिल उकद। व् मिन शर्रि हासिदिन इज़ा हसद।

तरावीह की नमाज की फजीलत

ऐसा कहा जाता है कि तरावीह की नमाज में हर सजदे पर 1500 नेकियां लिखी जाती हैं। अल्लाह तआला तरावीह पढ़ने वाले लोगों पर अपनी रहमत बरसाता है। इसलिए रमजान में इस नमाज को पढ़ने का विशेष महत्व माना जाता है।

क्या तरावीह की नमाज़ पढ़ना फर्ज है?

नहीं, तरावीह की नमाज फर्ज नहीं है, क्योंकि यह नमाज़ सुन्नत-ए-मुअक्कदा है।

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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