Somnath Temple Flag (सोमनाथ मंदिर पताका): आज 11 मई को भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम कहे जाने वाले सोमनाथ महादेव के दरबार में 'सोमनाथ अमृत पर्व' मनाया जा रहा है। इस खास मौके पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शिरकत कर रहे हैं। कई तरह के खास धार्मिक अनुष्ठान की तैयारी है जिसमें मंदिर के शिखर का कुंभाभिषेक मुख्य तौर पर शामिल है। मंदिर के शिखर पर 11 मीटर का ध्वजदंड लगा है। इसपर भगवा रंग की पताका फहराई जाती है। इस ध्वज पर भगवान शंकर का त्रिशूल और नंदी बैल अंकित हैं। मान्यता है कि यह ध्वज भगवान शिव की निरंतर उपस्थिति और मंदिर की दिव्यता का प्रतीक है।
दिन में तीन बार बदलता है ध्वज
सोमनाथ मंदिर में ध्वज दिन में तीन बार बदला जाता है- सुबह सूर्योदय के समय, दोपहर लगभग 12 बजे और शाम सूर्यास्त के दौरान। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ये तीनों समय सूर्य के तीन महत्वपूर्ण चरणों का प्रतिनिधित्व करते हैं। सुबह का ध्वज नई शुरुआत और सृजन का प्रतीक माना जाता है, दोपहर का ध्वज स्थिरता और संरक्षण का, जबकि शाम का ध्वज विश्राम और संहार का संकेत देता है।
ध्वज बदलने का धार्मिक महत्व क्या है
धार्मिक दृष्टि से यह परंपरा भगवान शिव की त्रिगुणात्मक शक्ति - सृजन, पालन और संहार, से जुड़ी मानी जाती है। शिव को ‘सोमनाथ’ यानी चंद्रमा के स्वामी के रूप में पूजा जाता है और सूर्य-चंद्र दोनों को उनकी ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। यही कारण है कि ध्वज परिवर्तन को आध्यात्मिक ऊर्जा और प्रकृति के संतुलन से भी जोड़ा जाता है।
भक्तों को मिलता है आध्यात्मिक अनुभव
इतिहास की बात करें तो सोमनाथ मंदिर ने कई हमले और पुनर्निर्माण देखे हैं। माना जाता है कि इस मंदिर पर कई बार आक्रमण हुए, लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण हुआ और इसकी परंपराएं जीवित रहीं। स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल की पहल पर वर्तमान मंदिर का पुनर्निर्माण कराया गया था। ध्वज बदलने की यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। यह परंपरा भक्तों को दिनभर शिव की उपस्थिति की याद दिलाती है।
आज भी हजारों श्रद्धालु ध्वज बदलने की इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए मंदिर पहुंचते हैं। ध्वज परिवर्तन के दौरान मंदिर परिसर में मंत्रोच्चार और भजन-कीर्तन का विशेष माहौल बन जाता है, जो भक्तों के लिए एक आध्यात्मिक अनुभव माना जाता है।
